लावारिस के वारिसों का अस्पताल में हंगामा

Farrukhabad Updated Wed, 26 Sep 2012 12:00 PM IST
फर्रुखाबाद। लहू के रिश्ते से कहीं ज्यादा अपनेपन का रिश्ता मजबूत होता है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया फतेहगढ़ के दुकानदारों ने। दुर्घटना में घायल युवक की लोहिया अस्पताल में सोमवार देर रात मौत की खबर फतेहगढ़ के दुकानदारों के लिए ‘अपनों’ की मौत से कमतर नहीं थी। युवक की मौत पर जहां कुछ दुकानदार अस्पताल प्रशासन पर मनमानी का आरोप लगाते हुए हंगामा कर रहे थे, वहीं कुछ फफक कर रो पड़े।
फतेहगढ़ में कुछ समय पहले एक युवक आया और दुकानों पर काम करने लगा। युवक के बारे में दुकानदारों को को जानकारी नहीं थी, लेकिन उसने ज्यादातर लोगों को अपना मुरीद बना लिया। यह युवक बीकी 23 सितंबर की रात फतेहगढ़ कोतवाली के कानपुर रोड स्थित एक निजी अस्पताल के सामने घायल हो गया। स्थानीय लोगों की सूचना पर पुलिस ने उसे लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया। अगले दिन जब कोतवाली रोड के दुकानदारों को घटना की जानकारी मिली तो वे अस्पताल पहुंचे। आपस में तय करके एक व्यक्ति को इस युवक की देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी। युवक को आपातकालीन कक्ष में रखा गया। दुकानदारों का आरोप है कि घायल युवक को लावारिस के रूप में भर्ती कराया गया था, इसलिए अस्पताल प्रशासन ने इलाज में कोताही की। उसे दूसरे दिन आपातकालीन कक्ष से हटा कर जनरल वार्ड में भर्ती कर दिया गया। सोमवार देर रात अचानक उसकी हालत बिगड़ने लगी। युवक की देखरेख के लिए अस्पताल में मौजूद दुकानदार ने नर्स को बुलाया, लेकिन काफी प्रयास के बाद भी नर्स वार्ड में नहीं पहुंची। आखिरकार इस लावारिस ने तड़पते हुए दम तोड़ दिया। अस्पताल में मौजूद दुकानदार ने युवक की मौत की अपने साथियों को दी। कुछ ही देर में दुकानदार रत्नेश, होरीलाल, संजू कटियार, रामभरोसे, राजू और नवनीत समेत दर्जनभर से ज्यादा लोग अस्पताल पहुंच गए। जब इन लोगों को अस्पताल में घायल युवक के इलाज में कोताही बरतने की जानकारी मिली तो वे हंगामा करने लगे। दुकानदारों ने अस्पताल प्रशासन पर मनमानी का आरोप लगाया और वहां मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों को खरी-खोटी सुनाई। सुबह पुलिस पहुंची और शव का पंचनामा भर पोस्टमार्टम कराया।
कुछ ही सालों में बन गया चहेता
फर्रुखाबाद। फतेहगढ़ के दुकानदार रत्नेश ने बताया कि वह करीब 10 वर्षी से क्षेत्र में रह रहा था। वह खाना खाने से पहले गाय को जरूर खिलाता था। कोई दुकानदार उससे कोई भी सामान मंगवाता तो वह उसका पूरा हिसाब देता था। उसकी इमानदारी ने सभी को मोह लिया। आसपास के दुकानदार ही उसका परिवार हो गए थे। रत्नेश ने बताया कि वह अपना नाम राजीव तिवारी मलानी निवासी बरेली बताता था, लेकिन वास्तव में उसका क्या नाम था और वह कहां का रहने वाला था, यह किसी को भी ठीक से पता नहीं है।
चंदे से हुआ अंतिम संस्कार
फर्रुखाबाद। फतेहगढ़ के जब दुकानदारों को जब युवक की मौत की जानकारी हुई तो दुकानदारों ने आपस में चंदा इकट्ठा किया। युवक का आज दोपहर घटियाघाट पर अंतिम संस्कार किया गया। दुकानदार होरीलाल ने बताया कि उस रोड पर कोई दीवार नहीं बची, जिस पर इस युवक ने कुछ न कुछ लिखा न हो लेकिन कोई भी दुकानदार उससे नाराज नही होता था।









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