कसौटी पर खरी नहीं उतरीं समितियां

Farrukhabad Updated Mon, 24 Sep 2012 12:00 PM IST
फर्रुखाबाद। ग्रामीण स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण समितियां कसौटी पर खरी नहीं उतरीं। खातों में पड़ी रकम को खर्च नहीं कर पाईं। इससे योजना का लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पाया। पुरानी रकम खर्च न हो पाने से नई किश्त इनके खातों में भेजी ही नहीं। धन खातों में डंप है। बरसात के बाद गांवों में जलभराव, मच्छर, दूषित पेयजल की समस्याएं गंभीर हो रही हैं। बीमारी फैल ही है। इसके बावजूद समितियां कुछ करने की बजाय धन खाते में कैद किए हैं।
गांवों में पेयजल, स्वच्छता व स्वास्थ्य की समस्याओं के समाधान के लिए ग्रामीण स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण समितियों का गठन किया गया था। जिले में 513 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें से 510 ग्राम सभाओं में समितियां गठित की गईं। इनके 917 राजस्व ग्रामाें के लिए वर्ष 2010-2011 में 91 लाख 70 हजार रुपए भेजे गए थे। समितियों ने इस धन को खर्च ही नहीं किया। इससे योजना जमीन पर ही नहीं उतर पाई। गांव के लोग लाभ से वंचित रह गए।
इस रकम की बाबत ग्राम पंचायतों से उपभोग मांगा गया था। ऐसा इन्हें 2011-2012 में नई कि श्त देने के लिए किया था। किसी भी समिति ने यह लेखा-जोखा महकमे को नहीं दिया। इससे इस वित्तीय वर्ष में शासन ने जिले को धन ही नहीं भेजा। नए सत्र 2012-2013 में महकमे को 51 लाख रुपए मिले हैं। इस धन को खर्च धन के हिसाब से समितियाें क ो दिया जाना था। इसक ो लेकर फिर से उपभोग मांगा गया। इस बार फिर समितियों ने लेखा विवरण नहीं दिया। इससे महकमे ने समितियों के खाते में रकम ही नहीं भेजी ।
एक ओर तो खाताें में धन पड़ा है, दूसरी ओर समस्याएं सिर उठाए हैं। इस धन से हैंडपंपों के पास से जलभराव खत्म किया जा सकता था। इससे दूषित पानी की समस्या का निदान मिल जाता। गांवों में जलभराव वाली जगहों पर मैलाथियान, कैरोसिन के छिड़काव से मच्छरों की समस्याओं से भी निजात मिल सकती थी।
अमेठी जदीद के प्रधान मुफीद अहमद का कहना है कि एएनएम की वजह से योजना सफल नहीं हो पा रही है। वह टीकाकरण अभियान में व्यस्त रहती हैं। एएनएम से कई बार साफ -सफाई को ठीक रखने के लिए धन खर्च करने को कहा गया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इस बारे में सीएमओ को भी बताया जा चुका है।

समितियों को कर रहे हैं सक्रिय : सीएमओ
फर्रुखाबाद। सीएमओ डा. राकेश कुमार का कहना है कि समितियाें को सक्रिय किया जा रहा है। एएनएम को हिदायत दी गई है। उनका कहना है कि ग्राम पंचायत की सियासत के चलते योजना प्रभावी नहीं हो पा रही है। डीएम को समस्या बताई जा चुकी है। खातों का लेखाजोखा मांगा गया है। प्रधान अगर खाता संचालन में कोताही बरतते हैं तो बीडीओ को लिखा जाएगा।
फर्रुखाबाद। ग्रामीण स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण समिति में ग्राम प्रधान, एएनएम, आशा बहू, बीडीसी और गांव के रसूखदार क ो रखा जाता है। ग्राम प्रधान व एएनएम के साथ समिति का खाता खुलता है। समिति की हर तीसरे माह बैठक होनी चाहिए। जानकारों की मानी जाए तो समितियां गांव के लोगों के साथ बैठक ही नहीं करती हैं। कागजी कार्रवाई कर काम चला लिया जाता है। समिति क ो साल में 10 हजार रुपए मिलते हैं। इससे पौधारोपण, गरीब को इलाज में मदद, नालियों की सफाई, जलभराव से निजात दिलाना, हैंडपंपों के पास सफाई रखना, मच्छरों व मक्खियों से बचाव के लिए दवाइयों का छिड़काव करना, दीवारों पर नारे लिखवाना शामिल है।

फर्रुखाबाद। स्वास्थ्य महकमा समिति के खातों की जांच कराएगा। उपभोग पत्र न देने पर कार्रवाई की भी गाज गिर सकती है। महकमे के अंदरूनी सूत्रों की बात पर भरोसा किया जाए तो कई ग्राम सभाओं में रकम को यूं ही उड़ा दिया गया। इसके चलते ही लेखाजोखा नहीं दिया जा रहा है।

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