टेक्सटाइल पार्क की उम्मीदों को झटका

Farrukhabad Updated Wed, 19 Sep 2012 12:00 PM IST
टेक्सटाइल पार्क की उम्मीदों को झटका
फर्रुखाबाद। वस्त्र छपाई उद्योग के विकास के लिए जिले में टेक्सटाइल पार्क स्थापित करने की कोशिशों को जबरदस्त झटका लगा है। मुख्यमंत्री के आदेश के बाद भी जिला प्रशासन अभी तक जमीन आवंटन की प्रक्रिया पूरी नहीं कर सका है।
टेक्सटाइल पार्क के लिए 200 एकड़ जमीन की दरकार है। जिले के व्यापारियों ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात कर जमीन का मुद्दा उठाया था। इस पर विशेष सचिव ने जमीन के लिए जिला प्रशासन से मसौदा मांगा। टेक्सटाइल पार्क के लिए मुड़गांव में ग्राम समाज की 31.109 हेक्टेयर जमीन को आवंटित करने की योजना बनाई गई। अपर जिलाधिकारी केके सिंह ने आवंटन के लिए कार्रवाई करने को जिला उद्योग केंद्र प्रबंधक एचडीराम को जिम्मेदारी सौंपी। जिला उद्योग केंद्र प्रबंधक ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि यह जमीन टुकड़ों में है। इस रिपोर्ट को एडीएम ने 27 अगस्त को शासन को भेजा। इसके बाद से इस मुद्दे पर कोई गंभीरता नहीं दिखाई गई है। अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के जिला अध्यक्ष रोहित गोयल कहते हैं कि जिला प्रशासन ने जिस तरह का रवैया अपनाया, उससे तो यही लगता है कि प्रशासन खुद टेक्सटाइल पार्क के पक्ष में नहीं है। गोयल के मुताबिक यदि मुड़गांव की जमीन पार्क के मानक के अनुरूप नहीं है तो गैसिंगपुर, गौसरपुर व सकवाई में भी ग्राम सभा की जमीन खाली हैं। धीरपुर में यूपीएसआईडी की जमीन बेकार पड़ी है। इनका भी प्रस्ताव बनाया जा सकता था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
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मंत्री से उम्मीद
टेक्सटाइल पार्क को लेकर अब व्यापारी लघु उद्योग व निर्यात मंत्री भगवत शरण से 22 सितंबर को मुलाकात करेंगे। इससे पहले अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के जिला अध्यक्ष रोहित गोयल ने संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष संदीप बंसल व जिले के अश्विन साध, सुभाष अग्रवाल व निशांत के साथ मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात की थी, जिसके बाद जमीन आवंटन को लेकर रिपोर्ट तैयार की गई। व्यापारियों का कहना है कि वे एक बार फिर टेक्सटाइल पार्क के लिए जोर लगाएंगे।
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छपाई से है पुराना नाता
जिले में छपाई उद्योग सालों पुराना है। यहां के उत्पादों की विदेशों में भी मांग रहती है। सुविधाएं न मिलने से बड़ी संख्या में कारोबारी पलायन कर गए हैं। यह सिलसिला जारी है। इस उद्योग को बढ़ावा देने की खातिर 2008 से टेक्सटाइल पार्क की मांग की जा रही है। जमीन न मिलने से योजना लटकी हुई है।
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क्या है टेक्सटाइल पार्क योजना
फर्रुखाबाद। बिखरे कारखानों को एक जगह स्थापित कर उन्हें मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने के लिए वस्त्र मंत्रालय ने टेक्सटाइल पार्क योजना लागू की है। इसमें परियोजना का 40 प्रतिशत या अधिकतम 40 करोड़ का अनुदान मिलता है। लघु उद्योग के स्तर पर आधुनिक मशीनें लगाने के लिए 15 प्रतिशत के आधार पर 45 लाख का अनुदान देने का प्रावधान है। पावरलूम उद्योग के लिए 20 प्रतिशत के आधार से पुराने आधुनिक लूमों पर 60 लाख व नए आधुनिक लूमों पर एक करोड़ तक की सहायता मिलती है। वस्त्र प्रोसेसिंग, टेक्नीकल टेक्सटाइल मशीनों एवं नए आटोमेटिक लूमों पर पांच फीसदी ब्याज अनुदान व 10 प्रतिशत कैपिटल सब्सिडी का प्रावधान है। अन्य मशीनों पर पांच प्रतिशत ब्याज अनुदान की सुविधा देय होती है।
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पांच हजार करोड़ का होगा कारोबार
फर्रुखाबाद। योजना लागू होने के बाद 500 करोड़ सालाना का कारोबार पांच साल में 5 हजार करोड़ का हो जाएगा। पार्क में बिजली, पानी, स्वास्थ्य, क्रेच, आवास, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के साथ ही सारी सुविधाएं रहेंगी। यह 110 करोड़ रुपए की योजना है। इसमें 40 फीसदी रकम भारत सरकार, 9 फीसदी प्रदेश सरकार देगी। कारोबारियों को 51 फीसदी धन लगाना पडे़गा। 280 कारोबारी तैयार भी हैं।

वापस लौटेंगे 70 फीसदी कारोबारी
फर्रुखाबाद। टेक्सटाइल पार्क में आर्थिक सहभागिता के लिए जिले से पलायन कर चुके 70 फीसदी कारोबारी वापसी के लिए तैयार हैं। इन्होंने इसके लिए हामी भी भरी है। दिल्ली, नोएडा, मुंबई और गुजरात में कारोबार कर रहे सुरेश चंद्र, राजकुमार, शिमला कुमारी, शीतल, अवधेश कुमार, कवि साध, कुलदीप गोयल, नीलमा, अंजू, कपिल, रीतेश कुमार, जेनिस, गौतम, सुधीर कुमार, रिषी, राविन्सन, विजय, विशाल, प्रशांत, प्रीती, जीके साध, प्रकाश, नीलेश, रमेश, नरशी शाह, सरस कुमार, दिनेश कुमार, नमिश, रीतेश ने यहां से अपना करोबार शुरू करने के मन पक्का कर लिया है।
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25 हजार को मिलेगा रोजगार
फर्रुखाबाद। टेक्सटाइल पार्क की योजना परवान चढ़ने के बाद तकरीबन 25 हजार बेरोजगारों के लिए रोजी रोटी का जरिया खुल जाएगा। अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के जिला अध्यक्ष रोहित गोयल कहते हैं कि योजना शुरू होने के बाद तमाम तरह के रोजगार के अवसर खुलेंगे। जिले के पढ़े लिखे युवाओं को घर में ही रोजगार नसीब हो जाएगा। गौरतलब है कि 15 साल पहले करीब 50 हजार को इस कारोबार से रोजगार मिला हुआ था।

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