जहरखुरानी का सबसे मुफीद दिल्ली रूट

Farrukhabad Updated Mon, 17 Sep 2012 12:00 PM IST
फर्रुखाबाद। दिल्ली तथा आसपास के शहरों से कमाकर लौटने वाले जहरखुरानी गिरोह के निशाने पर हैं। हर दिन कोई न कोई जहरखुरानों का शिकार हो रहा है। सप्ताह भर में आधा दर्जन से अधिक लोगों की गाढ़ी कमाई जहरखुरान लूट चुके हैं। पुलिस सिर्फ बस अड्डे और रेलवे स्टेशन पर एनाउंस कराकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेती है।
जहरखुरानी गिरोह ट्रेन के साथ-साथ बसों में भी सक्रिय है। आए दिन लोग इनके शिकार हो रहे हैं। बावजूद इसके पुलिस ने चुप्पी साध रखी है। लोगों का आरोप है कि पुलिस की निष्क्रियता की वजह से जहरखुरानों के हौसले बुलंद हैं। पुलिस रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर एनाउंस करके अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेती है। दूसरी तरफ पुलिस के अपने तर्क हैं। पुलिस का कहना है कि जब तक यात्री सजग नहीं होंगे, तब तक गिरोह का जाल नहीं तोड़ा जा सकता है।
सप्ताह भर में आधा दर्जन से अधिक लोग जहरखुरानी के शिकार हो चुके हैं। जहरखुरानों ने 12 सितंबर को दिल्ली से आ रहे ब्रजेश और मोहसिन को अपना शिकार बनाया। इन्हें नशीला पदार्थ खिलाकर उनका सारा सामान लूट लिया। 13 को दिल्ली से आ रहे रामपाल नामक यात्री को बेहोश कर लूट लिया और 15 सितंबर को कालिंदी एक्सप्रेस से आ रहे हरदोई के दीपू को लूट लिया। दीपू कमालगंज में बेहोश मिला। इसी तरह शमसाबाद के मोहल्ला सरैया निवासी भगवानदास नामक युवक को गिरोह ने रोडवेज बस में शिकार बनाया। रविवार को दिल्ली से आ रहे युवक को रोडवेज बस में जहरखुरानी गिरोह ने निशाना बनाया। युवक को लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है। होश में न आने के कारण युवक की पहचान नहीं हो सकी है। गंभीर बात यह है कि लोहिया अस्पताल में जहरखुरानी गिरोह के शिकार जितने भी यात्री भर्ती हुए, उनमें से ज्यादातर का कहना था कि वे एटा तक होश में थे। एटा के बाद क्या हुआ, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है।
यूं फंसाते हैं शिकार
पुलिस की मानें तो जहरखुरानी गिरोह के सदस्य ट्रेन और बसों में चुपचाप सवार हो जाते हैं। बसों में वे बाकायदा टिकट लेकर सवार होते हैं। इस कारण कंडक्टर को भी शक नहीं होता है। गिरोह के सदस्य पड़ोस में बैठने वाले यात्रियों से अखबार, माचिस, गुटखा, बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू जैसी चीजें मांगकर बातचीत की शुरुआत करते हैं। जब उन्हें लगता है कि यात्री उनकी बातों में आ गया है तो वे उसे खाने-पीने की चीजों का आफर देते हैं। खाने-पीने की चीजें पहले खुद खाते हैं। इससे साथ में बैठे यात्री का विश्वास बढ़ जाता है। जहरखुरान केले में इंजेक्शन से नशे की दावा डाले रहते हैं और बिस्कुट में नशे का केमिकल लगा होता है, जिसे खाते ही यात्री बेहोश हो जाते हैं। अगला स्टाप आते ही जहरखुरान सामान समेट तक उतर जाते हैं।
सावधानी ही बचाव
पुलिस और जीआरपी अपने स्तर पर सक्रिय होने का दावा करती है, लेकिन वह मानती है कि यात्रियों को इस गिरोह से बचने के लिए खुद सावधान रहना होगा। सफर में किसी का दिया हुआ कुछ भी न खाएं पीयें। खैनी, गुटखा और सिगरेट को भी हाथ न लगाएं।

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