गृहकर का प्रस्ताव फिर ठंडे बस्ते में डाला

Farrukhabad Updated Tue, 14 Aug 2012 12:00 PM IST
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फर्रुखाबाद। नगर पालिका प्रशासन ने शहर के सभी भवनों को कर निर्धारण के दायरे में लाने का मामला एक बार फिर ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी कर ली है। बीते दिनों पालिका बोर्ड की हुई बैठक में प्रस्तुत किए गए इस आशय के एकमात्र प्रस्ताव को विचारार्थ छोड़कर नए सिरे से मूल्यांकन करने की कवायद शुरू कर दी है।
उल्लेखनीय है कि बीते दिनों हुई पालिका बोर्ड की बैठक में सभासद फरीदा ताहिर ने दो प्रस्ताव इस आशय के प्रस्तुत किए थे कि वर्तमान बोर्ड को जन एवं लोकप्रिय तथा पारदर्शी बनाने के लिए निर्माण, सफाई, जलकल, पथ प्रकाश, कर संपत्ति विभागों में सभासदों की कमेटियों का गठन किया जाए और विभिन्न कार्यों के संपादन व भुगतान भी कमेटी की स्वीकृत से होना चाहिए। दूसरे प्रस्ताव के तहत उन्होंने पालिका सीमा के भीतर बने सभी भवनों की क्रमवार संख्या डालकर सूचीबद्घ करने और न्यूनतम आधार पर कर निर्धारण करने के लिए पंचवर्षीय कर निर्धारण प्रक्रिया लागू कराने का प्रस्ताव सदन में रखा था। लेकिन सदन की बैठक में सदस्यों के बिना चर्चा के इस प्रस्ताव को विचारार्थ पारित कर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। मालूम हो कि सदर पालिका में बीते करीब 40 वर्षों से भवनों का कर निर्धारण नहीं किया गया है, जबकि इस अर्से में हर में मकानोें की संख्या में भारी वृद्घि हो चुकी है। लेकिन कर विभाग 1967 में लागू कर निर्धारण के हिसाब से वसूली और औपचारिकता निभा रहा है। शासन द्वारा गृहकर व जलकर निर्धारण तथा भवन स्वामियों से उसकी वसूली के प्रति सख्ती किए जाने के आदेशों के बाद पहले तो फार्म वितरित कराए गए और सीमित क्षेत्रों में फार्म वितरण कर टैक्स लागू करने में कोई गंभीरता नहीं दिखाई। इस बीच निकाय चुनाव की घंटी बज गई। तब पालिका प्रशासन ने यह कहकर काम रोक दिया कि अब नए बोर्ड के गठन के बाद ही कर निर्धारण की कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी। नए बोर्ड के गठन के बाद सदन की पहली बैठक में ही कर निर्धारण का मुद्दा जोर शोर से उठा, मगर फिर दब गया। हालांकि चुनाव से पहले ही क्षेत्र के हिसाब और मकानों की हालत देखकर दो रुपए से लेकर 20 पैसे फुट तक की कर निर्धारण दरें तय कर द गई थीं। लेकिन सदन की बैठक में फरीदा ताहिर के इन दरों के पुनर्विचार के प्रस्ताव पर कर निर्धारण का मामला फिर लटक गया है। सभासद फरीदा ताहिर का कहना है कि विभाग ने जो दरें तय की हैं। अगर लागू रहीं तो भवन स्वामियों पर भारी बोझ पड़ेगा। इसलिए उन्होंने सदन से इस प्रस्ताव पर पुर्नविचार करने का आग्रह किया। पालिकाध्यक्ष वत्सला अग्रवाल ने भी प्रस्ताव पर सहमति दे दी है, जबकि अधिशासी अधिकारी आरडी वाजपेयी ने बताया कि कर विभाग को अब नए सिरे से मूल्यांकन करने के आदेश दे दिए गए हैं। जो दरें तय हो गईं, उसकी सूची शासन को भेजी जाएगी। निदेशालय से अनुमति मिलने के बाद सरकारी तौर पर गजट करा दिया जाएगा। इसमें थोड़ा समय तो लगेगा।

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