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चार कर्मियों को छह साल से वेतन नहीं

Farrukhabad Updated Fri, 20 Jul 2012 12:00 PM IST
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फर्रुखाबाद। नगरपालिका परिषद में वर्ष 2006 में नियुक्त चार कर्मचारियों के वेतन भुगतान का मामला सुलझ नहीं पा रहा है। छह साल पुराने इस प्रकरण में सूबे के मंत्री ने भी प्रमुख सचिव को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा है। मामला तूल पकड़ते देख कर अधिशासी अधिकारी ने विशेष सचिव से दिशा निर्देश मांगे है। कर्मचारियों को वेतन देने पर किसी को ऐतराज नहीं है और न ही कानूनी अड़चन है।
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सदर नगरपालिका में 21 सितंबर 2006 को पाइप फिटर के पद पर रामदेव व्यास, नीरज वर्मा तथा पंप चालक पद पर अमित रस्तोगी और प्रियंक शुक्ला की नियुक्ति की गई थी। उस समय चयन कमेटी को लेकर सवाल उठाए गए थे। इस प्रकरण की जांच तत्कालीन अपर जिलाधिकारी को सौपी गई थी। उन्होंने 30 अक्टूबर 2009 को अपनी जांच रिपोर्ट में नियुक्तियों को वैध नहीं कहा था। इसके साथ ही कहा कि पालिका के अधिशासी अधिकारी इसे अपने स्तर से निपटाएं। परंतु इस फाइल को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इस पर रामदेव व्यास और अमित रस्तोगी ने हाईकोर्ट की शरण ली। साथ ही शासन का दरवाजा खटखटाया। इस मामले में सूबे के उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री राजकिशोर सिंह ने प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर रामदेव व्यास के मामले में आवश्यक कार्रवाई करने को कहा।

शासन के रिपोर्ट तलब करने से पालिका में खलबली मच गई। अधिशासी अधिकारी आरडी बाजपेई ने विशेष सचिव को भेजे पत्र में कहा है कि तत्कालीन ईओ ने पालिका अधिनियम के तहत ही रिक्त पदों पर नियुक्ति की थी। तत्कालीन अपर जिलाधिकारी ने अज्ञानतावश नियुक्तियों को वैध नहीं ठहराया। इस मामले के निस्तारण को तत्कालीन ईओ ने कमेटी गठित की थी। इसकी जांच स्वास्थ्य अधिकारी आरसी सुंदरम, सहायक अभियंता अमित शर्मा तथा कर अधीक्षक राजकिशोर कमल को सौंपी थी। कमेटी ने 21 जनवरी 2010 को रिपोर्ट देते हुए कहा कि रामदेव तथा अमित रस्तोगी का मामला हाईकोर्ट में लंबित है इसलिए कोई निर्णय लेना उचित नहीं है। नीरज वर्मा और प्रियंक शुक्ला के मामले में पालिका निर्णय लेने में स्वतंत्र है। नियुक्ति से लेकर अब तक चारों कर्मचारियों से लगातार कार्य लिया जा रहा है। ऐसी हालत में हाईकोर्ट ने पहले काम के बदले बैग एंड वेजज देने का निर्णय दिया है। पालिका कर्मचारी सुबोध कुमार गुप्ता का मामला इसका उदाहरण है। अधिशासी अधिकारी ने सचिव को बताया कि चारों कर्मचारियों से लगातार काम लिया जा रहा है। इसलिए उनके वेतन भुगतान में पालिका को कोई आपत्ति नहीं है। कोर्ट में वाद दायर करने वाले कर्मचारियों ने हलफनामा देकर कहा है कि उन्हें न्यायालय का जो भी निर्णय होगा स्वीकार होगा। ईओ ने कर्मचारियों के वेतन भुगतान को दिशा निर्देश मांगे हैं।

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