कमालगंज में 44 दुकानें और चार घर ढहाए

Farrukhabad Updated Sun, 15 Jul 2012 12:00 PM IST
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कमालगंज (फर्रुखाबाद)। लोक निर्माण विभाग की भूमि पर अतिक्रमण कर बनाई गई 44 दुकानों तथा चार मकानों को एसडीएम सदर की देखरेख में जेसीबी मशीन से ध्वस्त कर दिया गया, जबकि कई को चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। छह दुकानों को अदालती स्थगन आदेश होने के कारण छोड़ दिया गया।
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नगर के रेलवे तिराहे से शनिवार को अतिक्रमण हटाओ अभियान शुरू किया गया, जो जनता कालेज तक सड़क के दोनों ओर चला। तोड़फोड़ का विरोध करने पर दो महिलाओं को महिला पुलिस ने हिरासत में ले लिया। पवन कुमार श्रीवास्तव ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करके अतिक्रमण हटाने की मांग की थी। याचिका की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन को अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था। लगभग दो माह पहले अतिक्रमण हटाने के लिये सरकारी अमला मौके पर पहुंच गया था। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू होती इसके पूर्व ही उप जिलाधिकारी को फोन आया, जिसे सुनने के बाद कार्रवाई रोक दी गई। बाद में अतिक्रमण को चिह्नित करके निशान देही कर दी गई थी।
अतिक्रमण को हटाने के लिये शुक्रवार को नगर पंचायत की ओर से मुनादी करा दी गई थी लेकिन किसी ने तवज्जो नहीं दी। शनिवार को लगभग 10 बजे एसडीएम सदर भगवानदीन वर्मा, तहसीलदार सदर पीएन सिंह, लोकनिर्माण विभाग के कार्यकारी अधिशाषी अभियंता भैरों सिंह, एई आरके वर्मा, नरायण सिंह, पुलिस उपाधीक्षक डीएस गर्वयाल, थानाध्यक्ष सुनील तिवारी, जहानगंज के थानाध्यक्ष संजीव राठौर, महिला थाने की प्रभारी सुभद्रा वर्मा, नगर पंचायत के अधिशाषी अधिकारी सर्वेश कुमार दल बल के साथ अतिक्रमण हटाने पहुंच गये।
रेलवे तिराहे के निकट बनी एक दुकान को गिराने के बाद अजय अग्रवाल की दो दुकानों को अदालत का स्थगन आदेश दिखाये जाने के कारण छोड दिया गया। इसी प्रकार स्थगन आदेश के चलते जलालुद्दीन, इकरारुद्दीन, तथा नन्हीं देवी की दुकानों को छोड़ दिया गया। लेकिन मुन्नालाल राजपूत के मकान तथा दुकान पर स्थगन आदेश होने के बाद भी तोड़ दिया गया। इस कार्रवाई का विरोध करने पर मुन्नालाल की पत्नी कोकिला देवी तथा उसकी पुत्री मंजू को महिला पुलिस ने हिरासत में ले लिया। मुन्नालाल स्थगन आदेश देख लेने की अपील करते रहे लेकिन उसका न तो आदेश देखा गया और न ही उसकी बात सुनी गई। वहीं हनुमान मंदिर को दोनों ओर बनी पक्की दुकानों को ध्वस्त कर दिया गया। इन दुकानों को टूटने के साथ ही लोगों ने स्वत: अपनी दुकानों का सामान हटाना शुरू कर दिया। बाद में जेसीबी मशीन ने दुकानों तथा अन्य अवैध निर्माणों का घ्वस्त कर दिया। इस दौरान कुछ भवनों के छज्जों को गिराकर भवन मालिकों को चेतावनी देकर छोड़ दिया गया।
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