जाएं तो जाएं कहां

Farrukhabad Updated Wed, 11 Jul 2012 12:00 PM IST
फर्रुखाबाद। मंगलवार को डीएन कालेज में दो गुटों के बीच खूनी खेल के गवाह सीढ़े चकरपुर के राघवेंद्र क ा कहना था कि क्या करें, मजबूरी है, नहीं तो यहां कौन पढ़े। वह अपनी बहन के दाखिले के लिए कालेज आए थे।
कालेजों में होने वाले खूनी संघर्ष से पढ़ने वाले छात्र छात्राओं के लिए समस्या बन जाती है। उन्हें डर सताता रहता है। कालेज में दाखिले को आने वालों ने इसे स्वीकारा भी है। इनका कहना है कि कोई विक ल्प न होने से दाखिला लेना पड़ता है।
बीकाम प्रथम वर्ष में दाखिले के लिए आई शालिनी ने कहा कि कालेज मेें झगडा़ करने वालों को प्रतिबंधित का देना चाहिए। रुपम कहती हैं कि किसी दिन ऐसे झगडो़ं में निर्दोंषों पर भी बन सकती है। प्रवीन कहते हैं कि कालेज में रैंगिंग नहीं होती लेकिन रोज अक्सर होने वाली मारपीट खतरनाक है। शुभांशी कहती हैं कि जिला प्रशासन को इसके लिए कार्रवाई करनी चाहिए। विश्वजीत का कहना है कि कालेज में पढा़ई लिखाई का माहौल बनाए रखने के लिए सभी को पहल करनी चाहिए।

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