गायब 13 सदस्य पलट सकते हैं बाजी

Farrukhabad Updated Tue, 26 Jun 2012 12:00 PM IST
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फर्रुखाबाद। सत्ता पक्ष के जोर के चलते बढ़पुर ब्लाक प्रमुख अखिलेश कटियार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भले ही पास हो गया हो लेकिन इस बात की पूरी संभावना जताई जा रही है कि भविष्य में होने वाले प्रमुख पद के चुनाव में बाजी एक बार फिर पलट सकती है। सोमवार को इसी आशंका ने सपा नेताओं को भी उस समय बेचैन कर दिया जब लाख खतिरदारी करने और अपनी ही लग्जरी गाड़ियों से अविश्वास प्रस्ताव के लिए ब्लाक तक ले जाने के बावजूद नौ क्षेत्र पंचायत सदस्यों को वे प्रभावित नहीं कर सके।
मालूम हो कि बढ़पुर ब्लाक प्रमुख अखिलेश कटियार के कई समर्थक क्षेत्र पंचायत सदस्य काफी दिनों से गायब थे। परिजनों का आरोप था कि सदस्यों को एक सपा नेता ने बंधक बना रखा है। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के पास कई बार गुहार लगाने के बावजूद उन सदस्यों की रिहाई नहीं कराई जा सकी थी। सूत्र बताते हैं कि इसके अलावा भी कई अन्य सदस्य सपा नेताओं के शिकंजे में थे। ऐसा इसलिए भी माना जा सकता है क्योंकि 22 दिसंबर 2010 को हुए ब्लाक प्रमुख के चुनाव में बसपा प्रत्याशी अखिलेश कटियार के पक्ष में 35 और विपक्ष में 27 वोट ही पड़े थे। जबकि सोमवार को अविश्वास प्रस्ताव के समय सपा नेताओं के साथ 47 क्षेत्र पंचायत सदस्य बढ़पुर ब्लाक पहुंचे। अविश्वास प्रस्ताव में 13 सदस्य शामिल ही नहीं हुए और दो सदस्यों के वोट अवैध हो गए। इनमें एक ने हां या नहीं के किसी भी विकल्प पर मोहर नहीं लगाई जबकि एक सदस्य ने दोनों पर मोहर लगा दी। कयास लगाया जा रहा है कि गायब रहे 13 सदस्य ही भविष्य में होने वाले चुनाव में बाजी को पलट सकते हैं। अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद मौजूदा सदस्यों में इन 11 सदस्यों को अखिलेश कटियार के भाई महेंद्र ने अपने खेमे का बताया। इस बात पर खुशी भी जाहिर की कि कम से कम सपाई इन सदस्यों को प्रभावित नहीं कर सके।
अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद ब्लाक से बाहर निकले सपा के कई क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने जब यह बताया कि नौ सदस्यों ने वादाखिलाफी कर दी तो मौजूद सपा नेताओं के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं। साफ जाहिर हुआ कि कहीं न कहीं अगले चुनाव में वे सदस्य भी बाजी पलट सकते हैं।
फिलहाल पार्टी कार्यालय में पहुंचे जिलाध्यक्ष राजकुमार सिंह राठौर, मंत्री नरेंद्र सिंह के पुत्र सचिन यादव, दृगपाल सिंह उर्फ बाबी, हाल के दिनों में सपा खेमे में उतरे अहमद अंसारी कई अन्य नेता व वरिष्ठ कार्यकर्ता इसी बात पर मंथन करते रहे कि नौ सदस्य आखिर अपने वादे से क्यों पलट गए। भविष्य में होने वाले ब्लाक प्रमुख चुनाव में कई सदस्य बगावत कर बसपा को समर्थन दे सकते हैं इस बात की सुगबुगाहट सपा खेमे में शुरू हो गई है। लेकिन कोई खुलकर इस बात को नहीं कह पा रहा है।

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