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डाक्टरों की हड़ताल से मरीज रहे हलाकान, इमरजेंसी केस ही लिए

Farrukhabad Updated Tue, 26 Jun 2012 12:00 PM IST
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फर्रुखाबाद। क्लीनिकल स्टेबलिश बिल के खिलाफ नर्सिंग होम संचालक और प्राइवेट डाक्टरों ने मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को डाक्टरों ने मौन जुलूस निकाला। कलेक्ट्रेट में सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन दिया। नर्सिंग होम संचालकों ने हड़ताल भी रखी। यहां इमरजेंसी सेवाएं ही खुली रहीं। इससे मरीजों को तकलीफ भी उठानी पड़ी। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की 22 अप्रैल को मुंबई में हुई मीटिंग में क्लीनिकल स्टेबलिश बिल के खिलाफ आंदोलन का मसौदा बनाया गया था। यहीं 25 जून को हड़ताल, जुलूस व ज्ञापन देने के बारे में योजना बनी थी। सुबह तय कार्यक्रम केे मुताबिक डाक्टर सीतापुर नेत्र चिकित्सालय में प्राइवेट डाक्टर जमा हुए। शहर में 55 नर्सिंग होम हैं। इनमें संचालक डाक्टरों सहित 144 प्रैक्टिस करते हैं। यहीं से जुलूस शुरू हुआ। आंदोलनकारी डाक्टर कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां डीएम मुथुकुमारस्वामी बी के न मिलने पर सिटी मजिस्ट्रेट मनोज कुमार को आठ सूत्रीय ज्ञापन दिया गया। यह केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्री गुलामनवी आजाद व सूबे के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को संबोधित था।
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आईएमए अध्यक्ष डा. केएम द्विवेदी ने कहा कि नए बिल से नर्सिंग होम व प्राइवेट डाक्टरों केे साथ ज्यादती होगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार केे डाक्टरों का वेतन केंद्र सरकार के वेतनमान क्रम में होना चाहिए। जूनियर डाक्टरों को वेतन भी केंद्र सरकार के नियमों के तहत किया जाए।
सचिव नरेश शर्मा ने कहा कि मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया क ी जगह पर केंद्र सरकार नया बिल लाना चाहती है। इसमें चिकित्सा क्षेत्र से इतर लोगों को कमेटी में रखा जाएगा। यह नर्सिंग होम व प्राइवेट डाक्टरों की निगरानी करेंगी। यह गलत है। उन्होंने कहा कि पांच साल के वजाय तीन साल का कोर्स कराने के बाद डाक्टरों को चिकित्सा सेवा में उतारने क ा निर्णय भी ठीक नहीं है।
डा. उदयराज, डा.अरविंद कटियार, डा. अनुराग अग्रवाल, डा. विपुल अग्रवाल, डा. वीके गुप्ता, डा. वत्सल, डा. एसके अग्रवाल, डा. विशाल अग्रवाल, डा. प्रदीप माथुर ने कहा कि इन बिलों को रोका जाए। ऐसा न करने पर बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा। इस दौरान डा. ब्रजेश यादव,डा. सुबोध वर्मा,डा. विपिन मिश्रा, डा. सुरेश गुप्ता, डा.सूद, डा. जोएल आदि मौजूद रहे। प्राइवेट चिकित्सकों व निजी नर्सिंग होम संचालकों ने सोमवार को विरोध में हड़ताल भी रखी। यहां केवल इमरजेंसी सेवाएं ही दी गईं।
डाक्टरों की आपत्तियां
एनसीएचआरएम बिल में मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया क ो लाया जा रहा है। इसमें डाक्टरों के अलावा दूसरे लोग भी शामिल होंगे।
क्लीनिकल स्टेबलिशमेंट बिल में नर्सिंग होम में परिवर्तन करने होंगे। इलाज से पहले कानूनी खानापूर्त् से मरीज पर खर्च का अतिरिक्त बोझ पडे़गा।
बीआरएचसी के तहत सरकार तीन साल की ट्रेनिंग के बाद डाक्टर का दर्जा दे देगी। इसका विरोध किया गया।
चिकित्सकों ने गुजरात, पंजाब व हरियाणा सरकारों की तर्ज पर नर्सिंग होम प्रोटेक्शन एक्ट की मांग रखी है।

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