तमंचे से लेकर बम तक बनाने में माहिर है जैना का गिरोह

Farrukhabad Updated Tue, 19 Jun 2012 12:00 PM IST
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गिरोह के सीधे तार कानपुर व मुंबई से जुडे़
हत्या व असलहों के धंधे से जुड़े कई मुकद्मे दर्ज हैं
पुलिस पार्टी पर गिरोह पहले भी कर चुका है हमला
कंपिल। ग्राम सिरसा में छापामारी के दौरान पुलिस पर हमला बोलने वाला जयनंदन उर्फ जैना, उसका पिता दुर्विजय शर्मा व उसके गुर्गे तमंचों से लेकर बम तक बनाने में माहिर है। असलहा मण्डी के रूप में बदनाम हो चुके जनपद कांशीराम नगर के कस्वा भरगैन के माध्यम से इस गिरोह के सीधे तार कानपुर व मुम्बई से जुडे़ है। दुर्विजय व उसके पुत्रों के खिलाफ हत्या व असलहों के धंधे से जुडे कई मुकद्मे पुलिस रिकार्ड में दर्ज है। जैना व उसके साथी इससे पूर्व भी कई बार पुलिस पर हमला बोल चुके है।
कंपिल थाने की चौकी सिवारा क्षेत्र का ग्राम सिरसा पिछले कई वर्षो से अवैध असलहों की आपूर्ति का प्रमुख केन्द्र है। यहां का दुर्विजय शर्मा पूर्व में कटरी के छोटे-मोटे गिरोह को तमंचे व रायफलों की आपूर्ति करता था। करीब सात वर्ष पूर्व कटरी से कलुआ व अन्य गिरोह के सफाये के बाद दुर्विजय व उसके पुत्रों के तार कस्बा भरगैन के माध्यम से कानपुर व मुम्बई के असलहा कारोबारियों से जुड़ गये। जिससे उसकी आर्थिक स्थिति भी काफी मजबूत हो गयी। दुर्विजय व उसके आशिक मिजाज पुत्र जयनंदन उर्फ जैना की दबंगई के कई किस्से है। करीब चार वर्ष पूर्व जैना व उसके भाई बिन्ने आदि ने रंगबाजी को लेकर हुए विवाद में गांव के ही श्यामलाल व उदयसिंह पर जानलेवा हमला किया था। इस हमले में घायल दोनों लोगों की बाद में मौत हो गयी थी। दोनों पक्षों में इस मामले में समझौता हो जाने पर जैना व उसके साथी जेल जाने से बच गये। करीब तीन वर्ष पूर्व ग्राम तरी का नगला में असलहा छीनने को लेकर हुए विवाद में एक युवक की गोली मार कर हत्या कर दी गयी थी। दस माह पूर्व असलहे के धंधे में रकम बंटवारे को लेकर जैना आदि ने कलुआ गिरोह के सदस्य रहे पलीतपुरा निवासी सुल्तान यादव की गोलियो से भून कर हत्या कर दी। उसके अलावा चार वर्ष पूर्व दुर्विजय के अड्डे पर छापा मारने गयी पुलिस पर उसके गुर्गो ने फायर झोक दिया। करीब एक वर्ष पूर्व भी मामूली बात को लेकर सिवारा चौकी पुलिस से सरेआम अभद्रता कर दी। क्षेत्र में दुर्विजय व उसके पुत्रों की दबंगई का आलम यह था कि हत्या के मुकद्मे में वांछित होने के बावजूद भी जैना व उसका भाई बिन्ने आदि खुलेआम घर पर रह कर हथियारों का धंधा कर रहे थे इस दौरान चौकी पुलिस का कई बार आमना-सामना हुआ।
जैना व उसके साथियों की दबंगई का एहसास रविवार शाम पकड़ने पहुंचे सीओ कायमगंज व थाना पुलिस को भी हुआ। पुलिस द्वारा बिन्ना व उसके साथी धर्मपाल को देशी राइफल के साथ पकड़ते ही जैना और उसके पिता दुर्विजय ने साथियों के साथ पुलिस पर लाठी-डण्डों से हमला बोल दिया। पुलिस कार्यवाही शुरू हुई तो जवाब देने के लिए हमलावरों ने घरों के छप्परों से राइफलें तान दीं व पुलिस पार्टी पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। अफरातफरी का आलम यह था कि पुलिस जीपों को लेकर भागे चालक जैसे-तैसे जीपों को पलटने से बचा पाये। लोग अपने घरों में दुबक गये। कोेई गिरोह के खिलाफ मुंह खोलने को तैयार नहीं हुआ। पुलिस करीब चार घंटे तक हमलावरों की तलाश करती रही। लेकिन एक भी बदमाश पुलिस के हाथ नही लगा। इस घटना के बाद चौकी प्रभारी सुनहरी लाल, सीओ वाईपी सिंह से नजरे नहीं मिला पा रहे थे।

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