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चाल के ऊपर भोथरी चाल, विपक्षी होवें हाल बेहाल

Farrukhabad Updated Mon, 18 Jun 2012 12:00 PM IST
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फर्रुखाबाद। खेती-किसानी और मौसम के पूर्वानुमान को लेकर घाघ और भड्डरी की प्रचलित कहावतें पूरे देश में जानी जाती हैं। कृषि और मौसम विज्ञानी भी इनका लोहा मानते हैं। चुनाव के पूर्वानुमान की भी कुछ चर्चित कहावतें हैं। पुराने चुनाव लडै़या इनसे बखूबी वाकिफ हैं। बुजुर्ग राधारमण, तिलक चंद्र, भुवनेश कहते हैं यह कहावतें चुनाव की रणनीति भी बताती हैं। चुनाव का हाल जानने को बुजुर्गवार कुछ कहावतें नौजवानों को सुना भी देते हैं। युवा अचकचाए से उन्हें सुनते हैं तो बुजुर्ग ही उन्हें अर्थ भी समझाते हैं। इस कहावतों से नई पीढ़ी नसीहत ले रही है और इसका जादू भी उन पर चढ़ रहा है। खटकपुरा, नई बस्ती, बजरिया और पल्ला में वोट मांगने वाले जत्थे इससे इत्तेफाक रखते दिखाई दे रहे हैं।
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ऊसर घूमो एक बार, फसली जोतो बार बार
यह कहावत चुनाव प्रचार के दौरान के लिए है। इस कहावत में न मिलने वाले व सशंकित वोटरों से एक बार ही वोट की अपील करने की उम्मीदवारों को नसीहत है। इसके मुताबिक मिलने वाले व समर्थित वोटरों से बार बार मिलकर वोट मंागना चाहिए।
बूथ पर आपन पहिले पहले, जीत का सेहरा सबसे पहिले
यह कहावत बताती है कि मतदान के दिन बूथ पर सुबह से ही समर्थक वोटरों की लाइन लगा लेनी चाहिए। यह लाइन टूटने न पाए। इससे ज्यादा से ज्यादा वोट पड़ जाएंगे। दूसरे उम्मीदवारों के हौसलों में कमजोरी आएगी। बडी़ संख्या में वोट पड़ने से जीत पक्की होगी।
चाल के ऊपर मोथरी चाल, विपक्षी होवें हाल बेहाल
इसके अनुसार चुनाव में विपक्षी उम्मीदवारों के खेमे की रणनीति पर भी नजर रखनी चाहिए। उनकी रणनीति को काटने के लिए ऊपर से धीमा लेकिन अंदर से तेज गति से अभियान चलाया जाए। इससे दूसरे उम्मीदवार भ्रमित रहें। समय भी उनका खर्च होता रहेगा। चुनाव प्रचार भी धीमा हो जाएगा।
भरम भरोसा बहता पानी, रोक सकें तो बने कहानी
इस कहावत का लब्बोलुआव है कि चुनाव में भरोसेमंद टीम का अहम रोल होता है। इसे खास तवज्जो दी जाए। इसके साथ दूसरे उम्मीदवारों के भरोसे के लोगों को अपने खेमे में मिलाने की कोशिश भी होती रहे। जिसके पास भरोसे के जितने ज्यादा समर्थक होंगे, उसकी जीत उतनी ही करीब आ जाएगी।
कुनबा, कौमी जोड़ चढे़, मूसलाधार वोट गिरे
यह कहावत नए संदर्भों में है। इसके मुताबिक चुनाव में कुनबा साथ खड़ा हो जाए और बिरादरी भी संग देने लगे तो पक्ष में खूब वोट गिरते हैं। इससे जीत का आधार रख जाता है। उम्मीदवार जीत की ओर बढ़ जाता है।
वोटर निकले करें प्रचार, समझो होय गयो बेड़ापार
यह कहावत बताती है कि जब वोटर खुद निकल कर किसी उम्मीदवार का प्रचार करने लगें तो उसकी जीत को रोक पाना असंभव हो जाता है। यह प्रचार धीरे धीरे गति पकड़ता है। मतदान से पहले की रात तक समर्थन का बवंडर बन जाता है।
गुइयां चलें एक ही लीक, लीक बने मंजिल की लकीर
इस कहावत का मतलब साफ है। चुनाव में समर्थक और प्रचार टीम के एकजुट होकर तय लक्ष्य को ध्यान में रखकर काम करने से सफलता मिलने में आसानी हो जाती है। चुनाव मैनेजरों के बनाए नियमों की अनदेखी से मतदाताओं में दो तरह के संदेश जाने से विश्वास कमजोर हो सकता है। ऐसे में अपनी-अपनी लकीर पीटने के बजाय एक ही लीक पर चलना बेहतर साबित हो सकता है।
निकाय चुनाव में बिसरती जा रहीं कहावतें फिर से जीवंत होने लगी हैं। विधानसभा चुनाव में वोट मांगने वालों के पास बुजुर्गों की बात सुनने का समय ही नहीं था। परंतु निकाय चुनाव में उम्मीदवार दिन भर घर-घर दस्तक दे रहे हैं। इससे यह कहावतें फिर से जुबानों पर इतराने लगी हैं।

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