भाजपा की प्रतिष्ठा का सवाल है अध्यक्ष की सीट

Farrukhabad Updated Fri, 15 Jun 2012 12:00 PM IST
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फर्रुखाबाद। पिछले कई चुनावों से हाशिए पर जाती रही भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय नेताओं ने इस बार के निकाय चुनाव को अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है। यही कारण है कि सदर विधानसभा सीट का चुनाव मात्र 147 वोटों से हारने वाली पार्टी के नेता उस सदमे से उबरने के लिए निकाय चुनाव में अध्यक्ष पद की प्रत्याशी माला पारिया के लिए एकजुट दिखाई दे रहे हैं।
फर्रुखाबाद की सदर विधानसभा सीट पर भाजपा के सभी वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी के बाद पिछला विधानसभा चुनाव मात्र 147 वोटों से हारने पर भाजपा नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को गहरा सदमा पहुंचा था। इस विधानसभा चुनाव में हार की वजह कुछ नेताओं का भितरघात किसी से छिपी नहीं रही। कार्यकर्ता इस सदमे से उबर भी नहीं पाए थे कि स्थानीय निकाय चुनाव की घोषणा हो गई। इस कारण यह चुनाव बिखरी भाजपा के लिए एक चुनौती के समान है। नगर पालिका फर्रुखाबाद के अध्यक्ष पद पर कब्जा जमाने के लिए इस चुनाव में महत्वपूर्ण रणनीति के तहत भाजपा के बार एसोसिएशन के लगातार तीन बार महासचिव रहे संजीव पारिया की पत्नी माला पारिया को चुनाव मैदान में उतारा है। संजीव पारिया प्रत्येक वर्ग में खास पहचान रखते हैं। भाजपा की इस चाल ने जहां विरोधी प्रत्याशियों को नई रणनीति बनाने पर मजबूर कर दिया। वहीं कई गुटों में बिखरी भाजपा एकजुट नजर आने लगी है। लंबे समय बाद भाजपा की एकजुटता पार्टी कार्यकर्ताओं को नई ऊर्जा दे रही है। प्रदेश की राजनीति में खासा दखल रखने वाले तथा सदर सीट से विधानसभा चुनाव लड़े मेजर सुनीलदत्त द्विवेदी, किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सुशील शाक्य, पूर्व सांसद मुन्नूबाबू, प्रदेश मंत्री रजनी सरीन, युवा मोर्चा के प्रदेश मंत्री प्रांशुदत्त द्विवेदी के साथ-साथ कायमगंज को पूर्व चेयरमैन एवं भाजपा नेता मिथलेश अग्रवाल के साथ पूरा जिला संगठन एवं अन्य नेता इस बार एक साथ रणनीति बनाकर चुनावी समर में भाजपा प्रत्याशी को जिताने के लिए एकजुट नजर आ रहे हैं। प्रदेश की रणनीति करने वाले तथा विधानसभा एवं लोकसभा का चुनाव लड़ने वाले नेता एक-एक वार्ड की जिम्मेदारी संभाले हुए हैं। स्थानीय नेताओं कि यह समझ में आ गया है कि इस चुनाव में भाजपा यदि जीत लेती है तो यहां से भाजपा को नई गति मिलेगी। वहीं यह चुनाव भाजपा नेताओं की कड़ी राजनीतिक परीक्षा भी है। इसमें मिली हार भाजपा नेताओं के राजनीतिक भविष्य का प्रश्न है। यह चुनाव भितरघात से कितना दूर रह पाता है। इसका पता तो चुनाव बाद ही चल सकेगा किंतु पार्टी के प्रत्याशी माला पारिया एवं संजीव पारिया के लिए भी भाजपा की इस समय दिख रही एकजुटता बड़ी ताकत है।

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