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बीस करोड़ बजट की नगर पालिका में विकास है मुद्दा

Farrukhabad Updated Thu, 07 Jun 2012 12:00 PM IST
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कायमगंज। लगभग २० करोड़ बजट की कायमगंज नगर पालिका अध्यक्ष पद की कुर्सी पर इस बार भी विकास ही मुद्दा बनता नजर आ रहा है। आदर्श नगरपालिका कही जाने वाली कुर्सी के लिए घमासान शुरू हो गया है। प्रत्याशी लोगो की चौखटों पर जाकर विजली,पानी, सफाई जैसे मुद्दे गिनाकर लोगो को अपना बनाने की कोशिश में लगे है। मलिन बस्तियों में विकास के मुद्दे को भी खूब भुनाया जा रहा है।इस बार पिछड़ा वर्ग महिला सीट हो जाने पर समीकरण भी बदले है और चेहरे भी।
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आदर्श कायमगंज नगरपालिका के लिए हर पांच साल मे लगभग बीस करोड रूपये का बजट आता है। यदि नगपालिका अध्यक्ष के पिछले इतिहास को देखा जाये तो सन १९५३ में नगरपालिका के पहले अध्यक्ष के रूप में शिवपाल सिंह चौहान ने कुर्सी संभाली। उसके बाद १९५७ से १९६२ तक श्यामचरन रस्तोगी, १९६२ से १९६४ तक नरेश चन्द्र रस्तोगी,१९६४ से १९७१ तक हरिश्चन्द्र अग्रवाल, १९७१ से १९७४ तक एक फिर शिवपाल सिंह चौहान नगर पालिका के अध्यक्ष बने। १९७४ से १९७५ तक एक साल के लिए राजकिशोर अग्रवाल और उनके बाद सात माह के लिए श्याममुरारी सक्सेना को नगरपालिका की कुर्सी मिली। १९७५ से १९८९ तक नगर पालिका का चुनाव न होने से सुपर सीट रही। १९८९ में हुए चुनाव में नरेश चन्द्र गुप्त बिजयी रहे और उसके बाद उन्होने १९९४ तक कुर्सी पर काबिज रहे। १९९४ से नगरपालिका परिषद के अध्यक्ष पद पर लगातार मिथलेश अग्रवाल का कब्जा रहा। पहली बार नगर पालिका अध्यक्ष पद की सीट पिछड़ा वर्ग महिला के लिए आरक्षित हो जाने से समीकरण बदले है और नये चेहरे सामने आ गये। पिछले नगरपालिका अध्यक्ष पद पर आसीन रहे लोगो ने विकास को ही सर्वाेपरि रखा। यहां की जनता भी विकास के नाम पर वोट देती रही। मिश्रित आवादी के नगर में जातिवाद कभी मुद्दा नहीं बन सका और लोगो ने विकास को देखते हुए ही अध्यक्षों को चुना। इस बार समीकरण बदले लेकिन मुद्े में विकास ही आगे है। लोग सुखशांति के साथ ईमानदार प्रत्याशी चाहते है और कहते है कि जो नगर में विकास का पहिया घूमा है वह न रूके। प्रत्याशी भी नामांकन के बाद से अपने-अपने घरों से निकल कर जगह-जगह सम्पर्क में जुट गये है। वह बिजली, पानी, सफाई के साथ-साथ मलिन वस्तियों का कायाकल्प के वादे कर रहे है।

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