किसी के एजेंडे में नहीं है समस्याओं का समाधान

Farrukhabad Updated Tue, 05 Jun 2012 12:00 PM IST
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फर्रुखाबाद। चुनाव में अध्यक्ष पद की कुर्सी पर कब्जा जमाने के लिए कमर तमाम दावेदारों ने कस ली है। पांच सालों के बाद प्रत्याशी जनता से अपने पक्ष में मतदान कराने के लिए तरह-तरह से अपील तो कर रहे हैं लेकिन जनता को समस्याओं से मुक्ति दिलाने का उनके पास कोई एजेंडा नहीं है। किसी भी प्रत्याशी ने अब तक जनता की समस्याओं के निराकरण के लिए कोई घोषणा पत्र जारी नहीं किया है।
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पिछले कई चुनावों से जनता के वोटों से पालिकाध्यक्ष पद पर काबिज हो चुके जनता के नुमाइंदों ने चुनाव के बाद जनता के बीच जाना तक उचित नहीं समझा। शहर की भोलीभाली जनता को समस्याओं में जीने के लिए उनके हाल पर छोड़ दिया गया। लेकिन अगला चुनाव आते ही जनता का वोट पाने के लिए तरह-तरह के वादों की झड़ी लगा देते हैं। पांच वर्षों तक उनको स्वयं याद नहीं रहता कि उन्होंने जनता से क्या वादे किए थे, जिसके कारण जनता ने चुनकर अध्यक्ष पद की कुर्सी तक पहुंचाया था।
समय चक्र के साथ सबकुछ बदल जाता है। किंतु यदि नहीं बदलता है तो जनता की समस्याओं की सूची और झूठे वादों की झड़ी लगाकर जनता के वोट हासिल कर सत्ता तक का सफर तय करने वाले नेताओं का नक्कारापन। इस चुनाव में भी अध्यक्ष पद की कुर्सी हथियाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाए जाने लगे हैं। जनता से झूठे वादों का दौर चालू हो चुका है। लेकिन विचारणीय प्रश्न यह है कि जनता की इतनी चिंता करने वाले नेता जनता की समस्याओं के समाधान के लिए जो वादे कर रहे हैं। उन वादों को लिखित रूप में घोषणा पत्र के साथ जनता के बीच जाने से क्यों कतरा रहे हैं। शायद उन्हें डर है कि घोषणा पत्र में कही गई बातें पूरी न होने पर जनता के सवालों का जवाब देना मुश्किल होगा।
लगातार दो बार पालिकाध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज रह चुकीं दमयंती सिंह वर्तमान विधायक की पत्नी हैं तथा गत पांच वर्ष से अध्यक्ष पद पर कब्जा जमाए रहे तथा विधान परिषद सदस्य मनोज अग्रवाल की पत्नी वत्सला अग्रवाल चुनाव मैदान में हैं लेकिन इनमें से किसी प्रत्याशी ने जनता के कार्यों के लिए कोई एजेंडा घोषित नहीं किया है। कांग्रेस प्रत्याशी के साथ अन्य किसी ने भी इस बारे में नहीं सोचा। भारतीय जनता पार्टी की प्रत्याशी माला पारिया की चुनावी बैठक में यह बात अवश्य आई कि पार्टी सभी वार्डों की समस्याओं को चिन्हित कर घोषणापत्र जारी करेंगी। लेकिन बाकी प्रत्याशियों ने इतना कहने की भी हिम्मत नहीं जुटा पाई। इन सबके बावजूद जनता अब प्रत्याशियों से उनका लिखित रुप से अध्यक्ष बनने पर पांच वर्ष का एजेंडा जानना चाहती है। जनता का स्पष्ट मत है कि एक बार घोषणा पत्र जारी करने के बाद उससे हटना किसी के लिए आसान नहीं होगा।

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