क्रय केंद्रों पर लुटने को मजबूर अन्नदाता

Farrukhabad Updated Thu, 31 May 2012 12:00 PM IST
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फर्रुखाबाद। शासन का चाबुक पड़ते ही क्रय केंद्रों पर किसानों से गेहूं खरीद तो शुरू हो गई है लेकिन अनियमितताएं बरकरार हैं। तौल में लेट लतीफी के साथ टालमटोल भी की जा रही है। कोलकाता से आए बोरे का वजन मानक से काफी कम है तो उसी की आड़ में किसानों को प्रति कुंटल साढ़े तीन सौ ग्राम गेहूं का चूना सरेआम लगाया जा रहा है। वहीं ठेकेदारों से साठगांठ कर केंद्रों पर तैनात कर्मचारी भी प्रभारियों की शह पर किसानों से प्रति कुंटल 25 से 50 रुपए की वसूली कर रहे हैं। पैसे खुलेआम लिए जा रहे हैं। उच्चाधिकारियों को इस तिकड़म की भनक नहीं लगने पा रही है और अन्नदाता परेशानी से बचने के लिए लुटने को तैयार है।
जिले के अधिकांश गेहूं क्रय केंद्रों पर अन्नदाताओं को ठगने का सिलसिला हाल के दिनों से नहीं बल्कि खरीद शुरू होने के बाद से ही चल रहा है। अनियमितताएं तभी से जारी हैं। कभी बारदाना न होने की आड़ में किसानों को बिचौलियों की तरफ धकेला गया तो कभी पल्लेदार न होने का बहाना बनाते हुए किसानों को मजबूर किया गया। तौल में गड़बड़ी इलेक्ट्रानिक कांटे के द्वारा तकनीकी रूप से की जा रही है। कोलकाता से बोरे की जो नई खेप आई है उसमें एक बोरे का मानक वजन 675 ग्राम होना चाहिए, इसी मानक पर एफसीआई गेहूं को अपने गोदाम में सुपुर्दगी में लेती है जबकि वास्तव में एक बोरे का वजन 500 ग्राम ही है। जिले में बीते दिनों औचक निरीक्षण पर आए राज्यमंत्री शिवप्रताप सिंह यादव ने भी सातनपुर मंडी में मानक से हो हुए इस खेल को देखा और स्वीकार किया था। जबकि भोला भाला किसान अब भी इस गड़बड़ी से वाकिफ नहीं है। तौल में बोरे का वजन कम होने से किसान को प्रत्येक कुंटल पर साढ़े तीन सौ ग्राम गेहूं अधिक देना पड़ रहा है। इसके अलावा किसानों से केंद्रों पर 1285 रुपए समर्थन मूल्य पर गेहूं लेने की आड़ में 25-50 रुपए प्रति कुंटल सुविधा शुल्क लिया जा रहा है। पल्लेदारी के नाम पर भी खुलेआम किसानों से पैसे लिए जा रहे हैं। जबकि केंद्रों पर गेहूं खरीद में लेट लतीफी और दो से तीन दिन तक रुकने से बचने के लिए किसानो को सुविधा शुल्क दे देना ही सरल उपाए सूझ रहा है। सातनपुर मंडी में गेहूं बेचकर लौटे राजेपुर क्षेत्र के एक किसान ने नाम न छपने की शर्त पर बताया कि दो दिन से रुका था और गेहूं खरीदने में क्रय केंद्र पर उससे टाल मटोल किया जा रहा है। एक दलाल के माध्यम से क्रय केंद्र पर समझौता हुआ और पचास रुपए कुंटल के हिसाब से सुविधा शुल्क देकर अपना गेहूं बेचा है। उसे दलाल ने यह बताया था कि समर्थन मूल्य और खुले बाजार में गेहूं बिक्री के बीच करीब दो सौ रुपए प्रति कुंटल का अंतर है इसलिए पचास रुपए कुंटल का अलग से खर्च देना ही उचित रास्ता मिला। इसके अलावा पांच रुपए बोरी के हिसाब से पल्लेदारी शुल्क भी उसे भुगतान करना पड़ा। दूसरी ओर केंद्रों पर होने वाली अनियमितताओं पर निगरानी के लिए तैनात किए गए केंद्र प्रभारी अक्सर केंद्रों से गायब रहते हैं। निगरानी न होने की दशा में कर्मचारी और पल्लेदार किसानों को सरेआम ठग रहे हैं।

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