सावरकर का नाम देता है प्रेरणा

Farrukhabad Updated Wed, 30 May 2012 12:00 PM IST
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कायमगंज। विश्व बंधु परिषद द्वारा वीर सावरकर जयंती पर आयोजित गोष्ठी में कहा गया कि वीर सावरकर भारत के उन क्रांतिवीरों में थे जिन्होने अंडमान की सेलुलर जेल में कालापानी की भयानक यातनाएं झेलने के बाद भी स्वाभिमान बरकरार रखा।
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मंगलवार को नगर के मोहल्ला सदवाडा स्थित कृष्णा प्रेस परिसर में आयोजित गोष्ठी में संस्था के अध्यक्ष प्रो० रामबाबू मिश्र ने कहा कि वीर सावरकर का नाम राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा देता है। प्रो० घनश्याम अग्रिहोत्री ने कहा कि अपने अकाट्य तर्कों से वीर सावरकर ने सिद्व किया कि १८५७ की जनक्रांति भारत की आजादी के लिए प्रथम लड़ाई थी। शिक्षक शिवकुमार दुबे ने कहा कि वीर सावरकर गांधी जी के कट्टर पंथियों के प्रति बेजा झुकाव के खिलाफ थे। अधिवक्ता परम मिश्रा ने कहा कि वीर सावरकर ने हिन्दुत्व के सोए हुए स्वाभिमान को जगाया। गोष्ठी में हंसा मिश्रा राजवीर सिंह शाक्य , प्रधानाचार्य आरके दुबे, गोपाल अग्रिहोत्री, जेपी दुबे, वीएस तिवारी, हरीओम दुबे, सतीश चंद्र यादव, सत्यप्रकाश चतुर्वेदी ने भी विचार व्यक्त किए।
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