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हो सर्वत्र विजय...-की धुन पर विदाई व स्वागत

Farrukhabad Updated Tue, 15 May 2012 12:00 PM IST
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फर्रुखाबाद। राजपूत रेजीमेंट के विजय गीत हो सर्वत्र विजय के गुंजन के साथ कमांडेंट बिग्रेडियर एसके भनोट विदा हो गए। उन्होंने जाते जाते सैनिकों में रेजीमेंट के गौरव को ऊंचाइयां देने के लिए जोश भरा। वह दिल्ली सेंटर का चार्ज संभालेंगे। विदाई से पहले राजपूत मंदिर में माथा टेककर रेजीमेंट व देश के लिए उन्होंने दुआएं भी कीं। अब नए कमांडेट बिग्रेडियर पीके सिंह होंगे।
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एसके भनोट ने जून 2011 में रेजीमेंट का चार्ज लिया था। भावभीनी विदाई में रेजीमेंट की परंपराओं की परंपराओं को निभाया गया। विदाई से पहले एसके भनोट ने सुबह 7 बजे करिअप्पा कांपलेक्स में शहीद स्मारक पर पुप्प चक्र चढा़ कर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद क्वार्टर गार्ड में परेड का निरीक्षण किया। यहां उन्हें शस्त्र सलामी दी गई। परेड से खुश होकर परेड कमांडर नायक कृष्ण कुमार को मिठाई देकर सम्मानित किया। राजपूत रेजीमेंट सेंटर के खुले थियेटर में सैनिक सम्मेलन का आयोजन किया गया था। यहां निवर्तमान बिग्रेडियर एसके भनोट ने बिग्रेडियर पीके सिंह को कमांडेंट बैटन सौंपकर चार्ज दिया। पीके सिंह दिल्ली सेंटर से आए हैं।
सैनिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए एसके भनोट ने कहा कि राजपूत रेजीमेंट का गौरवशाली इतिहास रहा है। इसे आप सभी और ज्यादा ऊंचाइयां दें। उन्होंने सैनिकों में जोश भरते हुए कहा कि रेजीमेंट को बुलंदियों पर ले जाना सभी का कर्तव्य है।
युद्ध् सेवा मेडल, सेवा मेडल व विशिष्ट सेवा मेडल प्राप्त बिग्रेडियर पीके सिंह ने कहा कि संगठन व रेजीमेंट के लिए टीम भावना की जरूरत होती है। अपना मनोबल हमेशा ऊंचा रखें। सभी के सहयोग से बुलंदियां छुएं। अधिकारी व कर्मचारी को कोई दिक्कत हो तो बिना किसी झिझक के सामने रखें, निदान किया जाएगा। यहां सेना बैंड की धुन पर सैनिकों ने हो सर्वत्र विजय गीत गाया। इसके बाद दोनों बिग्रेडियर राजपूत मंदिर पहुंचे। यहां रेजीमेंट व मुल्क की बेहतरी के लिए माथा टेका गया। सुबह 11 बजे किला स्थित कार्यालय से विदाई शुरू हुई। सेना की खुली गाड़ी में एसके भनोट खड़े हुए।
ड्राइविंग सीट डिप्टी कमांडेंट एके सिंह ने संभाली। गाड़ी को दोनों ओर रस्सों से बांधकर जवानों ने इसे खींचा। इस बीच उन्हें मालाएं पहना कर विदाई दी जाती रही। उन्होंने राजपूत रेजीमेंट की जय के नारे लगवाए। जवानों ने उनकी भी जयजयकार की। किले के बाहर गाडी़ के आते ही एसके भनोट नीचे उतर आए। इसके बाद वह यहां से वह दिल्ली के लिए रवाना हो गए।
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