मानव-मानव एक समान, करें सत्य का पालन

Farrukhabad Updated Mon, 07 May 2012 12:00 PM IST
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कायमगंज। भारतीय बौद्व महासभा की ओर से भगवान बुद्ध की जयंती पर रविवार को शोभायात्रा नगर में धूमधाम से निकाली गई। शोभायात्रा के दौरान अनुयायी लोगों को भगवान बुद्ध के उपदेशों पर चलने संदेश दे रहे थे।
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मोहल्ला नोनियमगंज से बौद्व महासभा के जिलाध्यक्ष अजय पाल के नेतृत्व में भगवान बुद्व के 2556वें जन्म दिन पर एक शोभायात्रा नगर के बड़ा चौराहा, श्यामगेट, बजरिया, तहसील रोड, पुलगालिब, चिलांका, पटवनगली, पृथ्वीदरवाजा, ट्रासपोर्ट चौराहा से होकर निकली। इस दौरान भगवान बुद्व के संदेश को लोग पढ़ कर सुना रहे थे। जिलाध्यक्ष ने कहा कि मानव को सत्य का पालन करना चाहिए। कभी भी झूठ नहीं बोलना चाहिए। एक झूठ बोलने से कई झूठ बोलने पड़ जाते हैं। जो भी बोलो, सच्चा व मीठा बोला। दूसरों का सम्मान करो तो खुद सम्मान मिलेगा। शोभा यात्रा के दौरान जुआ व शराब को त्यागने एवं मानव-मानव एक समान के संदेश दिए गए। वही भगवान बुद्व का संदेश करूणा, मैत्री एवं बन्धुत्व का भी बखान किया गया। इस अवसर पर महासभा के कानपुर मंडल अध्यक्ष सीपी सिंह बुद्विष्ट, सोनेलाल बौद्ध, बादाम सिंह, नगेंद्र सिंह, मोतीलाल, श्रीपाल, राम राकेश, शैलेंद्र सिंह, रामलडै़त, रामदास, बुद्ध प्रकाश, डा. केपी सिंह, प्रमीता सिंह, अजयभारती, दुर्वेश कुमार आदि लोग मौजूद रहे।
भगवान बुद्व ने दया, करूणा, मैत्री के मोती चुने
कायमगंज। तथागत बुद्ध ने भारतीय धर्म और संस्कृति से दया, करूणा, अहिंसा और मैत्री के मोती चुन कर उन्हे संस्कृत भाषा के बजाय जनसाधारण की प्राकृत भाषा के माध्यम से वितरित किया। देखते ही देखते उनका मत देश की सीमाऐं तोड़कर एशिया के सुदूर अंचलों तक फैल गया।
रविवार को नगर के मोहल्ला सदबाड़ा स्थित कृष्णा प्रेस परिसर में विश्व बन्धु परिषद की ओर से आयोजित गोष्ठी में प्रो. रामबाबू मिश्र ने भगवान बुद्ध पर उक्त विचार रखे। लेखिका सरस्वती वर्मा ने कहा कि गीता के संदेश कि अपना उद्वार स्वंय करो को तथागत ने रोचक बनाकर अप्पो दीप आप भव, अपना दीपक स्वंय बनो कहा। श्रृद्वा मिश्रा ने कहा कि अपना अंतिम समय देखकर तथागत ने अपने प्रिय शिष्य आनंद से कहा था कि तुम मुझे मेरी मृत्य के बाद भगवान घोषित मत कर देना। नहीं तो लोग मुझे पूजा की वस्तु बनाकर मेरे उपदेशों को भूल जायेगे। हंसा मिश्रा एडवोकेट ने कहा कि लहूलुहान हो रही धरती को बचाने के लिए आज तथागत बुद्ध के दर्शन की सबसे अधिक जरूरत है। शिक्षक शिवकुमार दुबे, परम मिश्रा एड़वोकेट, राजीव शाक्य एड़वोकेट, शिवकुमार शाक्य, शामोस बाबू कठेरिया एडवोकेट आदि ने विचार रखे।
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