ग्रामीण न देख डीएम खफा, बोले किससे सुने समस्याएं

Farrukhabad Updated Sun, 06 May 2012 12:00 PM IST
कायमगंज। जिलाधिकारी ने शनिवार को ग्राम चिलौली में विकास कार्यों की समीक्षा के दौरान बीडीओ को फटकार लगाई और बोले कि यहां मै किससे समस्याएं सुनू यहां ग्रामीण तो हैं ही नही। साथ ही बीडीओ को प्रतिकूल प्रविष्टि दी। इसके अलावा अनुपस्थित होने पर सीडीपीओ व सुपरवाइजर का वेतन रोकने के निर्देश दिये। वहीं मनरेगा में रिकार्ड से असंतुष्ट दिखे और सचिव के खिलाफ जांच के आदेश दिए। सफाई कर्मी का एक दिन का वेतन काटने का भी आदेश दिया।
जिलाधिकारी मुथू कुमार स्वामी वी चिलौली के प्राथमिक विद्यालय में विकास कार्यों कीं समीक्षा करने पहुंचे। उनके तल्ख तेवर देख अधिकारी पसीना-पसीना हो गए। सबसे पहले उन्होने एसडीएम के बारे में पूछा। उन्हें बताया गया कि वह हाईकोर्ट गए हैं। उसके बाद सीडीपीओ, चिकित्सक के बारे में पूछा। सीडीपीओ की अनुपस्थिति पर वह नाराज हुए और उन्होने उनका वेतन रोकने के निर्देश दिए। सुपरवाइजर का भी वेतन रोकने को कहा। उन्होंने डीपीओ को इस संबंध में जांच के निर्देश भी दिए। तभी डीएम ने कहा कि इस गांव के ग्रामीण कहां हैं। तो वह बीडीओ की ओर मुखातिब हुए और बोले ग्रामीण कहां है।
प्रधान पति नन्नू गंगवार को बुलाया गया। इस पर उन्होने तर्क दिया कि साहब गांव वाले खेतों आदि पर काम करने गए हैं। इस पर डीएम संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम तयशुदा था। उन्होंने बीडीओ को फटकारा और बोले कि जब ग्रामीण नहीं हैं तो क्षेत्र की जनता की वह क्या समस्या सुनेंगे। इस पर उन्होंने बीडीओ को प्रतिकूल प्रवष्टि दी। इसके बाद उन्होने गांव के सफाईकर्मी के बारे में पूछा। प्रधान पति ने बताया कि वह आज नहीं आया है। इस पर डीएम नाराज हुए और उन्होंने सफाईकर्मी के एक दिन का वेतन काटने का निर्देश दिया। फिर बात मनरेगा के कार्यों पर आई तो सचिव विवेक कुमार को तलब किया गया। डीएम ने पूछा कि अभी क्या मनरेगा के तहत कोई कार्य हुआ है। इस पर सचिव बगले झांकने लगे। काफी कुरेदने के बाद पता चला कि मार्च और अप्रैल में कोई कार्य नहीं हुआ। उन्होंने अभिलेख मांगे तो वह अभिलेख नहीं दिखा पाए। इस पर जिलाधिकारी ने उसके खिलाफ जांच के आदेश दिए। टीए राकेश पाल से सैल्फ प्रोटेक्ट एवं कार्य योजना के बारे में जानकारी ली। इस पर डीएम संतुष्ट नहीं हुए। डीएम ने पूछा कि वेतन मिलता है। इस उन्होंने कहा कि साहब पांच महीने से नहीं मिला।
इस पर जिलाधिकारी ने कहा कि जब काम नहीं तो वेतन नहीं। उन्होंने स्कूल के शिक्षकों को बुलाया। प्रधानाध्यापक को बुलाकर उपस्थिति रजिस्टर, मिड डे मील रजिस्टर देखा। उसका बारीकी से निरीक्षण किया। ओवर राइटिंग पर प्रधानाध्यापक से नाराज हुए।
मिड डे मील में भोजन के सम्बन्ध में पूछा कि खाद्यान्न उपलब्ध होता है। प्रधान पति ने बताया कि राशन कम मिला। इस पर सवाल उठा जब राशन कम मिला तो हर दिन भोजन कैसे पका। राशन क्यों कम दिया गया। इसकी जांच तहसीलदार को दी गई। उन्होंने कहा कि यदि इसमें कोटेदार ने लापरवाही की है तो उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। यदि प्रधान व प्रधानाध्यापक ने लापरवाही की है तो उन पर कार्रवाई की जाएगी। जिलाधिकारी ने गांव के स्वास्थ संबंधी समस्याओं के बारे में जानकारी की। आशा बहू को बुलाया गया।
उन्होंने पूछा कि गांव में कितनी गर्भवती महिलाएं हैं। आशा बहू जवाब नहीं दे पाई। इस पर उन्होंने कुछ गर्भवतियों के नाम पूछे। लेकिन आशा बहू वह भी नहीं बता पाई। आंगनबाड़ी कार्यकत्री को पंजीरी वितरण न किए जाने पर फटकार लगाई। इसके अलावा उन्होने गांव की सुरक्षा व्यवस्था की भी जानकारी पुलिस से ली।

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