...लोहिया में न कराना पड़े आपरेशन

Farrukhabad Updated Thu, 08 May 2014 05:30 AM IST
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फर्रुखाबाद। डा. राममनोहर लोहिया अस्पताल में आपरेशन कराने वाले सावधान हो जाएं। यहां आपरेशन कराने का मतलब है संक्रमण साथ ले जाना। आपरेशन के दौरान प्रयुक्त होने वाले कपड़ों को संक्रमणमुक्त रखने की कवायद फेल है। आपरेशन थियेटर के कपड़े धूल धक्कड़ के बीच सुखाए जा रहे हैं। इतना ही नहीं संक्रमित कपड़ों को अन्य कपड़ों के साथ ही धोया जा रहा है। इन कपड़ों से आपरेशन के बाद संक्रमण बढ़ने का खतरा रहता है।
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आपरेशन थियेटर में प्रयुक्त होने वाले कपड़ों को अलग से वाशिंग मशीन में धोने और सुखाने का निर्देश है। ताकि आपरेशन के दौरान मरीज को संक्रमण न होने पाए, लेकिन लोहिया अस्पताल में इसका जरा भी ख्याल नहीं रखा जाता है। यहां आपरेशन थियेटर के कपड़ों को उसी हौज में धुला जा रहा है, जिसमें बेड शीट व वार्ड के अन्य कपड़े धुले जाते हैं। इतना ही नहीं इन्हें सुखाने के लिए खुले आसमान के नीचे घास पर फैला दिया जाता है। ऐसी स्थिति में इन कपड़ों पर धूल भी जम जाती है। बाद में यही कपड़े आपरेशन थियेटर में प्रयोग किए जाते हैं।
खराब पड़ी है वाशिंग मशीन
मरीजों को संक्रमण से बचाने के लिए शासन की ओर से वर्ष 30 मार्च 2007 को वाशिंग मशीन आई थी। इसे 4,87,585 लाख में खरीदा गया था। यह मशीन नबंवर 2010 तक सही रही। दिसंबर में खराब हो गई। तब से आपशेन थियेटर के कपड़ों से लेकर अस्पताल की चादरों तक को एक साथ हौज में धोया जाने लगा है। इन्हें खुले में सुखाया जाता है। फिर यही कपड़े मरीजों के लिए प्रयोग किए जाते हैं।

नहीं हो रहा मानकों का पालन
जानकारों की मानें तो अस्पताल में मरीजों को संक्रमण से बचाने के लिए हादसों में घायल होकर आने वाले मरीजों के कपड़ों को अलग धोने का नियम है। इसके साथ ही एचआईवी, हेपेटाइटिस बी, और रैबीज के मरीजों के प्रयुक्त कपड़ों की अलग-अलग धुलाई होने चाहिए। लेकिन लोहिया अस्पताल में इन मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। सभी कपड़े एक साथ धुले जाते हैं।

धुलाई के लिए सिर्फ एक कर्मचारी
लोहिया में इन दिनों कपड़ों की धुलाई के लिए सिर्फ एक कर्मचारी है। वह प्रतिदिन 25-30 चादरों व अन्य कपड़ों को धोता है। पहले यहां दो वाशरमैन थे, लेकिन चार साल पहले एक सेवानिवृत्त हो गया।
जरा सी लापरवाही घातक
फिजीशियन डा. केएम द्विवेदी के मुताबिक अस्पताल के कपड़ों की धुलाई में जरा सी लापरवाही मरीज की जान जोखिम में डाल सकती है। कपड़ों को अलग-अलग धोने से संक्रमण का खतरा कम हो जाता है। कपड़ों को वाशिंग मशीन में धोने के बाद आटोक्लेब मशीन में कुछ समय रखने का नियम है। इसके बाद ही कपड़े को मरीज को दिया जा सकता है। सबसे ज्यादा रैबीज के मरीजों के कपड़ों में सावधानी रखने की जरूरत होती है। आपरेशन थियेटर के कपड़ों को अलग रखा जाना चाहिए।

क्या कहते हैं जिम्मेदार
लोहिया अस्पताल के सीएमएस डाक्टर एके मिश्रा का कहा है कि वाशिंग मशीन खराब है। इस वजह से दिक्कतें हैं। फिर भी सभी कपड़े अलग-अलग धोने के निर्देश है। हालांकि हाथ से धुलाई में किसी प्रकार से मरीज को कोई नुकसान नहीं है। यदि एक साथ धुला जा रहा है तो गलत है। वाशरमैन को निर्देश दिया जाएगा कि अलग-अलग धुलाई करे। अस्पताल की वाशिंग मशीन के भुगतान का भी कुछ मामला है। जिस कंपनी से इसको खरीदा गया था वह चली गई। गारंटी के लिए 10 प्रतिशत रुपया रोका गया था। इसको सही करने के लिए मिस्त्री को बुलाया था, लेकिन कोई भी मिस्त्री गारंटी नहीं दे रहा है।
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