तली झाड़ सफाई के नाम पर खानापूरी

Farrukhabad Updated Thu, 08 May 2014 05:30 AM IST
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फर्रुखाबाद। नगर निकायों में बारिश से पहले बड़े नालों की सफाई कराई जाती है, ताकि बारिश के दिन में मोहल्लों को जलभराव से बचाया जा सके, लेकिन जिले के नगर निकाय इसको लेकर गंभीर नहीं हैं। सदर पालिका प्रशासन ने सफाई शुरू करा दी है, लेकिन विभिन्न मोहल्ले के लोगों का कहना है कि सफाई के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है वहीं कई नगर पंचायतों में अभी नालों की सफाई की योजना ही नहीं बनी है। जिले में फर्रुखाबाद सदर एवं कायमगंज नगर पालिका परिषद हैं, जबकि कमालगंज, शमसाबाद, मोहम्मदाबाद, कंपिल नगर पंचायतें हैं। पेश है बारिश के मद्देनजर नगर निकाय प्रशासन की ओर से नालों की सफाई की तैयारी की पड़ताल करती रिपोर्ट:
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अधूरे उपकरणों से नालों की हो रही सफाई
फर्रुखाबाद। नगर पालिका प्रशासन ने नालों की सफाई शुरू कर दी है, लेकिन आधे-अधूरे संसाधनों की वजह से नालों की सफाई के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। सुस्त रफ्तार से चल रही सफाई में अभी तक 10 प्रतिशत हिस्से में ही सिल्ट निकाली जा सकी है। अगर यही हाल रहा तो जून माह तक तली-झाड़ सफाई के आसार नहीं हैं।
फतेहगढ़ व फर्रुखाबाद युग्म नगरों में छोटे-बड़े 19 नाले हैं, जिनकी लंबाई 21 किलोमीटर बताई जाती है। इन्हीं नालों के माध्यम से शहर के सभी मोहल्लों से निकलने वाले गंदे पानी की निकासी होती है। शासन व प्रशासन का आदेश है कि जून से पहले नालों की तली-झाड़ सफाई हो जाना चाहिए। लेकिन पालिका प्रशासन ने इस तरफ ध्यान देने की जरूरत नहीं समझी। लेटलतीफी के चलते बीते साल शहरवासियों को बरसात में जलभराव की समस्या से जूझना पड़ा था, जिससे लोगों को काफी नुकसान उठाना पड़ा था। इस बार भी नाला सफाई अभियान काफी विलंब से शुरू हुआ है। हालत यह है कि पलरिया, गंगानगर और कर्बला मार्ग के नालों की अब तक 10 प्रतिशत सफाई कराई जा सकी है, जबकि मानसून सत्र में एक माह बचा है। अधिशासी अधिकारी प्रमोद श्रीवास्तव ने गढ़ी अशरफ खां और भीकमपुरा तराई आदि में चल रहे नाला सफाई अभियान का निरीक्षण किया। उन्होंने सफाई के साथ सिल्ट निस्तारण के भी निर्देश दिए। सफाई निरीक्षक आशुतोष वर्मा और जगदीशचंद्र ने कहा कि प्रयास यही है कि मानसून सत्र यानी 16 जून से पहले सभी नालों की सफाई का कार्य निपट जाए।

अधूरे साजो-सामान से अड़चन
शहर पालिका के नालों की सफाई के लिए 20 कर्मचारी लगे हैं। इनका कहना है कि सफाई के लिए पंजे, गैंती, तसला, सीढ़ी, टार्च, लांगबूट और रस्सी पालिका प्रशासन को उपलब्ध कराना चाहिए, लेकिन इनमें से आधा-अधूरा सामान ही उपलब्ध है। इसके चलते सफाई कार्य में अड़चन आ रही हैं।

छोटे-बड़े नालों पर एक नजर
फर्रुखाबाद शहर के पक्कापुल, गुदड़ी, तलैया फजल इमाम से गंगानगर कालोनी, कछियाना, जटवारा जदीद, तलैया फजल इमाम से डिग्गीताल, रेलवेे लाइन से गढ़ी अशरफ, बहादुरगंज, पल्ला गल्ला मंडी, नाला स्मित सुमाल, आईटीआई चौराहा, घेर शामू खां, आवास-विकास से मसेनी, भोलेपुर, नगला नैन, हाथीखाना, बरगदियाघाट, भूसामंडी, पुलमंडी से ग्वालटोली होते हुए पीडी महिला कालेज तक।

जलभराव की दृष्टि से हाई रिस्क जोन के मोहल्ले
जलभराव की दृष्टि से पालिका की ओर से कुछ मोहल्लों को हाई रिस्क जोन की श्रेणी में रखा गया है। ये मोहल्ले हैं हाता इस्लाम खां, हाता महमूद खां, गढ़ी मुशर्रफ, बीबीगंज, गुदड़ी, पल्ला बाजार, तलैया फजल इमाम, खटकपुरा, मऊदरवाजा, गल्ला मंडी आदि। फतेहगढ़ के कई मोहल्ले भी होते हैं प्रभावित। इन मोहल्लों में सफाई के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है।
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