न जीजीआईसी बना, न ही माडल स्कूल

Farrukhabad Updated Wed, 07 May 2014 05:30 AM IST
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फर्रुखाबाद। माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत जिले में राजकीय बालिका इंटर कालेज, दो माडल स्कूल व एक राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। खास बात यह कि निर्माण में 526.33 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। कार्यदायी संस्था और विभागीय अधिकारियों की अनदेखी के कारण नए शैक्षिक सत्र में नए स्कूल में पढ़ने का सपना अधूरा रहेगा। अमर उजाला ने इन चारों विद्यालयों की स्थिति की पड़ताल की तो कहीं नवनिर्मित भवन की छत अधूरी है तो कहीं आधे से अधिक निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है। पेश है पड़ताल करती रिपोर्ट:
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केस एक
राजकीय बालिका इंटर कालेज
1.62 करोड़ रुपये खर्च, निर्माण अधूरा
राजेपुर। राजकीय बालिका इंटर कालेज राजेपुर के निर्माण को चार साल से कन्नी और वसूली खटक रही है। 1.62 करोड़ रुपये खर्च के बाद भी कालेज का निर्माण पूरा नहीं हुआ। बसपा शासनकाल में राजेपुर कस्बे में जीजीआईसी स्वीकृत हुआ था। इसकी आधारशिला तत्कालीन माध्यमिक शिक्षामंत्री रंगनाथ मिश्रा ने 19 मार्च 2010 को रखी थी। शासन से 1,71,96000 रुपये मंजूर हुए थे। यूपी प्रोजेक्ट कारपोरेशन को निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। माध्यमिक शिक्षा विभाग संस्था को 1,62,50000 रुपये का भुगतान कर चुका है। इसके बाद भी कालेज का निर्माण कार्य अधूरा है। तीन माह से निर्माण बंद है। ठेकेदार महेश सिंह राठौर ने बताया कि एक माह में निर्माण पूरा करा दिया जाएगा। जिला विद्यालय निरीक्षक भगवत पटेल ने बताया कि निर्माण पूरा करने को संस्था को पत्र भेजा गया है। विभागीय सूत्र बताते हैं कालेज में शिक्षकों की तैनाती की गई थी। लेकिन निर्माण कार्य अधूरा होने के कारण शिक्षक व कर्मचारियों को दूसरे स्कूल में भेज दिया गया था। यह स्थिति तब है जब माध्यमिक शिक्षा के तत्कालीन मंत्री रंगनाथ मिश्रा ने घोषणा की थी कि यहां एक साल में पढ़ाई शुरू हो जाएगी।

केस दो
माडल स्कूल रोशनाबाद
फर्रुखाबाद। माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत शमशाबाद क्षेत्र के रोशनाबाद में वर्ष 2011-12 में माडल स्कूल निर्माण की शासन से स्वीकृति मिली थी। इसके लिए शासन से 3.02 लाख रुपये विभाग को मिले थे। कार्यदायी संस्था पैक्सफेड को 1.67 करोड़ निर्माण कराने को दिए गए। इसका निर्माण मार्च 2012 तक पूरा होना था। माडल स्कूल निर्माण की चाल कछुआ गति होेने के कारण दो साल बाद भी निर्माण पूरा नहीं हो सका। कार्यदायी संस्था ने अभी तक 50 प्रतिशत ही कार्य कराया है। विभागीय अधिकारी निरीक्षण करते और कार्यदायी संस्था को निर्माण शीघ्र पूरा करने के निर्देश देते, लेकिन कार्य में तेजी नजर नहीं आ रही है।

केस तीन
माडल स्कूल कनकापुर
फर्रुखाबाद। ग्रामीण क्षेत्र के नौनिहालों को गुणवत्ता पूर्व शिक्षा दिए जाने को कनकापुर में माडल स्कूल खोलने को शासन से वर्ष 2012-13 में स्वीकृति मिली थी। इसका 3.02 करोड़ रुपये से निर्माण होना है। शासन से 1,50,75000 रुपये कार्यदायी संस्था यूपी प्रोजेक्ट कारपोरेशन को भुगतान की गई। इसका निर्माण मार्च 2014 तक पूरा होना था। लेकिन साल समापन तक कार्यदायी संस्था 55 प्रतिशत माडल स्कूल का निर्माण पूरा कर सकी। ग्रामीण क्षेत्रों के नौनिहालों को जुलाई माह से माडल स्कूल में पढ़ने का सपना साकार होना मुश्किल है।

केस चार
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, विहार पखना
फर्रुखाबाद। माध्यमिक शिक्षा महा अभियान के तहत मेरापुर क्षेत्र में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय विहार पखना के निर्माण को शासन से 28 मई 2013 को 51.98 लाख रुपये माध्यमिक शिक्षा महा अभियान के तहत मिले थे। इसके निर्माण को सीएनडीएस को 46.05 लाख रुपये भुगतान किया गया।90 प्रतिशत धन खर्च होेने के बाद भी 70 प्रतिशत निर्माण हो सका। इसको पूरा करने में कार्यदायी संस्था अनदेखी बरत रहीं है।

वर्जन
स्कूलों के निर्माण की स्थिति का निरीक्षण कराकर शासन को रिपोर्ट भेजी जा रही है। कार्यदायी संस्था को शीघ्र निर्माण पूरा कराने के निर्देश है। इस संबंध में पत्र भेजा है।
-- भगवत पटेल, डीआईओएस
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