गुस्साए किसानों ने तोड़ा पुल लोकार्पण का पत्थर

Farrukhabad Updated Sun, 09 Feb 2014 05:43 AM IST
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कमालगंज(फर्रुखाबाद)। सड़क निर्माण के लिए अधिग्रहीत जमीन का मुआवजा न मिलने से गुस्साए किसानों ने शनिवार को पुल के लोकार्पण का शिलापट्ट तोड़ दिया है। साथ ही आंदोलन का ऐलान किया है। किसानों का साफ कहना है कि मुआवजा नहीं मिला तो उग्र प्रदर्शन करेंगे। गदनपुर तुर्रा गांव के पास काली नदी पर बना यह पुल फर्रुखाबाद व कन्नौज जिले को जोड़ता है।
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काली नदी पर वर्ष 2010 में पुल मंजूर हुआ था। करीब छह करोड़ रुपये लागत से अप्रैल 2013 में इसका निर्माण शुरू हुआ। सेतु निगम ने इस साल यह पुल पूरा करवाया है। पुल बनने के बाद सड़क निर्माण को गदनपुर तुर्रा गांव के तकरीबन 8 किसानों की 25 बीघेे जमीन अधिग्रहीत की गई थी। उस समय 68 हजार रुपये प्रति बीघे की दर से मुआवजा देना तय था। इस सड़क का निर्माण लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड ने करवाया है। सड़क का निर्माण पूरा हो गया लेकिन किसानों को मुआवजा अभी तक नहीं मिला।
पुल पूरा होने के बाद भी किसानों को उम्मीद थी कि उन्हें देरसबेर मुआवजा मिलेगा, लेकिन एक फरवरी को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नवाबगंज आगमन के बाद सेतु निगम ने रात में चुपके से लोकार्पण का शिलापट्ट लगा दिया। सुबह किसानों ने शिलापट्ट देखा तो खुद को ठगा सा महसूस किया। धीरे-धीरे यह बात इलाके के अन्य किसानों तक पहुंच गई। दो दिन पहले किसानों की बैठक में आशंका जताई गई कि अगर चुपके से लोकार्पण का शिलापट्ट लगा दिया गया है तो उनका मुआवजा अटक सकता है। क्योंकि किसानों ने चेतावनी दी थी कि मुआवजा मिलने के बाद ही पुल का लोकार्पण होने दिया जाएगा।
सेतु निगम की कारगुजारी पर संदेह
एक फरवरी को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने नवाबगंज में 1514.01 लाख रुपये की 27 परियोजनाआें का लोकार्पण किया था। इस सूची में इस पुल का लोकार्पण शामिल नहीं था। इसके बाद भी सेतु निगम ने रात में लोकार्पण का शिलापट्ट लगा दिया। सेतु निगम की इस कवायद से कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं।


जमीन छूटी तो छूट गया अपना देश
कमालगंज। सड़क निर्माण में इलाकाई किसानाें की 25 बीघे जमीन चली गई है। मुआवजे से इन्हें रोजी रोटी केे जुगाड़ की उम्मीद थी। यह आस पूरी न हुई तो दो जून की रोटी के लिए इन्हें परदेस भटकना पड़ रहा है।
गदनपुर तुर्रा की जल देवी के पास महज डेढ़ बीघे जमीन थी। इसे पुल को जाने वाली सड़क के लिए अधिग्रहीत कर लिया गया। जमीन गई तो जल देवी के बेटे राममोहन व ज्योति स्वरूप के पैर उखड़ गए। मुआवजा के लिए कुछ दिन इंतजार किया। निराश होने पर मुंबई चले गए। वहीं मजदूरी कर रहे हैं। उमेश चंद्र की तीन बीघे जमीन चली गई। इनका कहना है कि इस जमीन से जिंदगी कट रही थी। अधिग्रहण के समय मुआवजा देने का एलान किया गया था। हाकिमों की चौखट पर दस्तक देते देते थक गए हैं। गांव के अनूप कुमार की 6 बीघे जमीन चली गई। इनका कहना कि सियासी पार्टियों ने भी कोई मदद नहीं की। किसान रामरूप, मुन्नालाल, नरेश महेश, मुन्नालाल कहते हैं किसानों को मुआवजा न देकर धोखा किया गया है। किसानों के आंसुओं की कीमत चुकानी पड़ेगी।

इन किसानाें की गई जमीन
प्रभावित किसान जमीन
जल देवी 1.50 बीघा
उमेश चंद्र 3 बीघा
अनूप कुमार 6 बीघा
रामरूप 2.50 बीघा
मुन्नालाल 6 बीघा
नरेश कुमार 2 बीघा
महेश चंद्र 2 बीघा
लल्लन अग्निहोत्री 2 बीघा


मुआवजा मिलेगा-एक्सईएन
लोक निर्माण विभाग प्रंातीय खंड के एक्सईएन विपिन पचौरिया का कहना है कि मामला संज्ञान में है। शासन को मुआवजा की फाइल भेजी गई है। पैसा आते ही इसे किसानों क ो दे दिया जाएगा।
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