योजनाओं को जमीन की दरकार

Farrukhabad Updated Tue, 22 Oct 2013 05:40 AM IST
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फर्रुखाबाद। जिले में विकास की योजनाएं दम तोड़ रही हैं। ये योजनाएं आम आदमी, किसानों, छात्राें, बेरोजगारों और कारोबारियों से जुडी़ हैं। वजह साफ है। इन योजनाओं के लिए जिला प्रशासन जमीन मुहैया नहीं करा पा रहा है। जमीन मिल जाती तो योजनाएं भी जमीन पर उतर आतीं। कई हाथों को काम मिल जाता तो बेकारी और बेरोजगारी में भी कमी आती। ऐसा हो नहीं पाया है।
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मेगा फूड पार्क
मेगा फूड पार्क के लिए 50 से 100 एकड़ जमीन की जरूरत है। यहां खाद्य प्रसंस्करण की तकरीबन 50 इकाइयाें की स्थापना होनी थी। इससे करीब पांच हजार बेरोजगारों को काम मिल जाता। खाद्य पदार्थों की बिक्री के लिए देसी और विदेशी बाजार के रास्ते खुल सकते थे। खाद्य पदार्थों का मूल्य संवर्धन भी होता। मेगा फूड पार्क के लिए सितंबर 2012 में राज्य सरकार के सचिव राजन शुक्ला ने योजना की बाबत जिला प्रशासन से प्रस्ताव मांगा था। यह प्रस्ताव अभी तक बनकर तैयार नहीं हो पाया है। इससे योजना ठंडी पड़ गई है।

सालिड वेस्ट मैनेजमेंट योजना
योजना के तहत प्रोसेसिंग प्लांट व लैंडफिल साइट का विकास किया जाना था। जून 2012 में उत्तर प्रदेश शासन के विशेष सचिव श्रीप्रकाश सिंह ने जिला प्रशासन कोे चिट्ठी भेजकर जमीन का प्रस्ताव मांगा था। योजना के लिए 10 एकड़ जमीन की जरूरत थी। शहर पालिका में 37 वार्ड हैं। आबादी 2 लाख 78 हजार के करीब है। 400 ग्राम प्रति व्यक्ति के हिसाब से रोजाना 125 कुंतल कूड़ा-कचरा निकलता है। इसे सड़कों के किनारे डंप किया जाता है। योजना परवान चढ़ती तो शहरियों को गंदगी से निजात मिल जाती। पालिका जमीन नहीं तलाश पाई है। अब योजना की फाइल का पता लगाना भी मुश्किल है।

माडर्न फिश बाजार
जिले में माडर्न फि श बाजार बनना था। योजना के लिए 4 एकड़ जमीन की दरकार है। यह प्रोजेक्ट 4 करोड़ रुपये का है। 6 माह से जमीन की तलाश है। मंडी समिति ने जगह देने का मत्स्य विकास अभिकरण को भरोसा दिलाया था। बाद में हाथ खड़े कर दिए गए। फि श मार्केट बन जाने से मछली विक्रेताआें को फायदा मिलना था। यहां मछली से जुड़े फास्ट फूड भी मुहैया होते। तकरीबन एक हजार लोगाें की बेरोजगारी दूर हो जाती। जगह न मिलने से यह योजना भी दम तोड़ गई है।

टेक्सटाइल पार्क
टेक्सटाइल पार्क के लिए 200 एकड़ जमीन की दरकार है। 2008 से पार्कके लिए जमीन की मांग की जा रही है। गोसरपुर में जमीन है लेकिन किसान जमीन देने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं। पार्क में वस्त्र छपाई उद्योग की यूनिटें एक ही जगह स्थापित होनी हैं। यहां बिजली, पानी, स्वास्थ्य, क्रेच, आवास, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के साथ ही सारी सुविधाएं रहेंगी। योजना 110 करोड़ रुपये की है। इसमें 40 फीसदी रकम भारत सरकार, 9 फीसदी प्रदेश सरकार देगी। कारोबारियों को 51 फीसदी धन लगाना पडे़गा। 280 कारोबारी तैयार भी हैं। पार्क शुरू हो जाए तो कारोबारियाें का सालाना टर्न ओवर 500 से 5000 करोड़ रुपये का हो सकता है। लगभग 10 हजार बेरोजगारों को काम मिल सकता है।

माडर्न स्कूल
माडर्न स्कूल के लिए 7.5 एकड़ जमीन की दरकार है। 8 माह से डीआईओएस जमीन के लिए चिट्ठियां लिख रहे हैं। कायमगंज और नवाबगंज में जमीन दी भी गई तो वह मानकाें के अनुरूप नहीं मिली। जमीन विकास खंड मुख्यालय से 8 किलोमीटर के दायरे में चाहिए है। अब डीआईओएस भगवत पटेल ने सदर एसडीएम राकेश पटेल को चिट्ठी भेजी है। यहां भी जगह न मिली तो योजना वापस हो सकती है। स्कूल शुरू हो जाता तो देहात के बच्चाें को पढ़ाई लिखाई की बेहतर सुविधा मिल जाती।
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