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अफजल की फांसी से सपना हुआ साकार

Farrukhabad Updated Sun, 10 Feb 2013 05:30 AM IST
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फर्रुखाबाद। संसद हमले के दोषी अफजल गुरु के फांसी से हमले के वक्त शहीद हुईं कांस्टेबल कमलेश कुमारी के मायके से लेकर ससुराल तक खुशी का माहौल है। परिजनों ने कहा उनका वर्षों का सपना साकार हो गया। देश के साथ गद्दारी करने वाले हर शख्स को फांसी मिलनी चाहिए। कमलेश कुमारी के माता-पिता अब पूर्णागिरी मंदिर जाकर दर्शन पूजन की तैयारी में जुटे हैं। नाना के साथ मौजूद कमलेश की बेटियों ने भरे गले से कहा कि कानून ने अपना काम किया है। अफजल के फांसी मिलने के बाद कानून के प्रति उनका विश्वास बढ़ा है।
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वर्ष 2001 में संसद पर हुए आतंकी हमले में शहीद हुई कमलेश कुमारी का मायका फर्रुखाबाद के नरायनपुर में है, जबकि उनकी ससुराल कन्नौज के छिबरामऊ के पास सिकंदरपुर में है। संसद हमले के दोषी अफजल के फांसी देने की खबर नरायनपुर में करीब 11:00 बजे पहुंची। नरायनपुर के लोग अपने काम धंधे में व्यस्त थे, जैसे ही उन्हें यह बात बताई गई कि अफजल गुरु को फांसी हो गई तो सभी की आंखें चमक उठीं। काम धंधा छोड़ लोग कमलेश कुमारी के पैतृक आवास पर जुट गए। यह खबर कमलेश कुमारी के मायके के लिए अप्रत्याशित जैसी थी। जैसे ही लोगों ने यह खबर सुनी, हर कोई कानून की दुहाई देने लगा। कमलेश कुमारी के पिता राजाराम ने कहा कि उनकी बूढ़ी आंखों में बस यही सपना अधूरा था। अफजल के फांसी मिलने के साथ ही उनके जीवन का सबसे बड़ा सपना पूरा हो गया है। अब वह पत्नी के साथ पूर्णागिरी मंदिर जाकर मत्था टेंकेंगे। भगवान का आभार जताएंगे। साथ ही यह भी मन्नत मांगेंगे कि देश से गद्दारी करने वाले हर शख्स को फांसी के फंदे तक पहुंचाया जाए। प्रभु इसके लिए कानूनविदों को ताकत दें ।

पीडी महिला डिग्री कालेज से बीएसस द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रही कमलेश कुमारी की बड़ी बेटी ज्योति के लिए यह खबर सरप्राइज जैसी है। वह कहती है कि अफजल के फांसी मिलने से कानून के प्रति उसकी आस्था बढ़ गई है। उसे विश्वास हो गया है कि देर से ही सही पर कानून अपना काम कर रहा है। वह हर आतंकी को अफजल जैसी ही सजा देने की ख्वाहिशमंद है। कमलेश कुमारी की छोटी बेटी श्वेता भी अफजल की फांसी की खबर से चहक उठी। कुछ देर बाद रुआंसी होकर बोली कि वह तो अपनी मां को ठीक से देख भी नहीं पाई। जिसने उससे मां को छीन लिया, उसे फांसी से कम की सजा मंजूर नहीं थी। कमलेश कुमारी के पति अवधेश कुमार कहते हैं कि पूरे देश को अफजल की फांसी का इंतजार था। अफजल गुरु के फांसी दिए जाने से यह साबित हो गया कि शहीदों की कुर्बानी निरर्थक नहीं गई।


कौन थी कमलेश कुमारी
फर्रुखाबाद के नरायनपुर गांव में रहने वाले राजाराम व रानी देवी की आठ संतानों में दूसरे नंबर की बेटी कमलेश कुमारी का जन्म 1976 में हुआ। वह 1994 में सीआरएफ में भर्ती हुईं। पहली तैनाती इलाहाबाद मिली। इसके बाद दिल्ली तबादला हो गया। 88 महिला बटालियन की सिपाही कमलेश कुमारी 13 दिसंबर 2001 को संसद पर आतंकी हमले में शहीद हो गई थीं। उनकी समाधि कन्नौज जिले के सिकंदरपुर गांव में बनी है।


मां ने हमेशा बेटा जैसा प्यार दिया
फर्रुखाबाद। कमलेश कुमारी जब शहीद हुई तो छोटी बेटी श्वेता गोद में थी। बड़ी बेटी को मां का प्यार याद है। अफजल गुरु के फांसी दिए जाने की खुशी में उसकी आंखों में मां की ममता की यादें ताजा हो जाती हैं। वह बताती है कि जैसे उसके नाना ने कभी बेटी-बेटे में भेद नहीं किया, उसी तरह से मां ने भी उसे भरपूर प्यार दिया। दुर्भाग्य से यह प्यार ज्यादा दिन तक मेरे साथ नहीं रह पाया। मां हमेशा कहती थी कि मेरी दो बेटियां हैं और दोनों किसी बेटे से कम नहीं हैं।

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