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किसानों को सौगात

Farrukhabad Updated Wed, 26 Dec 2012 05:30 AM IST
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फर्रुखाबाद। राज्य सरकार ने किसानों को बड़ी राहत दी है। अब माइक्रो इरीगेशन योजना में किसानों को सिर्फ 10 फीसदी हिस्सेदारी देनी होगी। बाकी 90 फीसदी खर्चा राज्य और केंद्र सरकार मिल कर उठाएगी। पहले इस योजना में किसानों को 40 फीसदी खर्चा उठाना पड़ता था। यह व्यवस्था जनवरी 2013 से लागू होगी।
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उपज में लगातार मिल रहे घाटे और मौसम की मार से प्रदेश के किसान बेहाल हैं। ऐसे में राज्य सरकार ने उन्हें बागवानी मिशन के तहत बड़ी राहत दी है। राज्य सरकार ने नेशनल मिशन आन माइक्रो इरीगेशन योजना (एनएमएमआई) में किसानों की हिस्सेदारी में 30 फीसदी की कटौती की है। इससे किसानों को काफी राहत मिलेगी। अभी तक एनएमएमआई के तहत बागवानी करने वाले लघु एवं सीमांत किसानों को सूक्ष्म सिंचाई कार्यों में 40 फीसदी पैसा लगाना पड़ता था। 10 फीसदी राज्य सरकार और 50 फीसदी केंद्र सरकार वहन करती थी। इसी तरह सामान्य किसानों को इस योजना में 50 फीसदी खर्च उठाना पड़ता था। राज्य सरकार 10 फीसदी और केंद्र सरकार 40 फीसदी देती थी। राज्य सरकार ने इसमें व्यापक स्तर पर बदलाव किए। अब इस योजना के तहत बागवानी विकास से संबंधित प्रोजेक्ट में लघु और सीमांत किसान को सिर्फ 10 फीसदी खर्च उठाना पड़ेगा। बाकी 40 फीसदी राज्य सरकार और 50 फीसदी खर्चा केंद्र सरकार उठाएगी। इसी तरह सामान्य किसान को 25 फीसदी खर्चा उठाना पड़ेगा। राज्य सरकार 35 फीसदी और केंद्र सरकार 40 फीसदी खर्चा उठाएगी। सरकार का मानना है कि इससे किसानों को बागवानी में कम से कम पूंजी लगानी पड़ेगी और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।
राज्य सरकार की ओर से प्रोजेक्ट में राज्यांश बढ़ाए जाने के संबंध में सचिव (उत्तर प्रदेश शासन ) डा. रजनीश दुबे की ओर से पत्र जारी किया गया है। यह पत्र उत्तर प्रदेश खाद्य एवं प्रसंस्करण निदेशक के मार्फत जिलाधिकारी को भेजा गया है। पत्र में निर्देश दिया गया है कि राज्य सरकार की ओर से निर्धारित अंशदान के अनुरूप ही लाभार्थी किसानों से उनकी हिस्सेदारी ली जाएगी। राज्य सरकार की ओर से बढ़ा हुआ अंशदान 12वीं पंचवर्षीय योजना की अवधि में लागू होगा। यानी किसानों को यह तोहफा जनवरी 2013 से मिलेगा। माना जा रहा है कि राज्य सरकार की ओर से दी गई इस राहत से किसानों को बड़ी राहत मिलेगी। खासकर लघु एवं सीमांत किसान बागवानी की ओर आकर्षित होंगे।

एनएमएमआई में कैसे मिलता है लाभ
इस योजना के तहत सूक्ष्म सिंचाई के लिये उन्नत प्रौद्योगिकी के उपकरणों के प्रयोग पर बल दिया जाता है। यदि किसान अर्ध स्थायी स्प्रिंकलर प्रणाली, फर्टिगेशन प्रणाली, रेती का फिल्टर, विभिन्न प्रकार के वॉल्व आदि अपनाता है और प्रोजेक्ट बनाता है तो उस पर होने वाले खर्चे में अनुदान की व्यवस्था है। सिंंचाई की इस नई प्रणाली का उपयोग करने पर किसानों को राज्य और केंद्र सरकार की ओर से छूट दी जाती है। इस अनुदान का लेखा-जोखा जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय रखता है।

कहां से लें सुविधा
जो भी किसान इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं, वे जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय से संपर्क पर आवेदन कर सकते हैं। वहां से बताई गई विधि के अनुरूप परियोजना लगाकर सरकारी अनुदान का फायदा उठाया जा सकता है और सिंचाई की लागत को कम किया जा सकता है।

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