बंद है भट्ठाें पर ईंट पथाई का काम

Farrukhabad Updated Mon, 26 Nov 2012 12:00 PM IST
बंद है भट्ठाें पर ईंट पथाई का काम
20 हजार मजदूराें के हाथ का काम छिनेगा
आंदोलन के रास्ते पर चलेंगे भट्ठा मालिक
राज मिस्त्रियों के रोजगार पर भी संकट
फर्रुखाबाद। मिट्टी खनन के लिए स्वच्छता प्रमाण पत्र की अनिवार्यता से भट्ठों पर ईंट की पथाई शुरू नहीं हो पा रही है। भट्ठा मालिक मुश्किल में हैं। अब वे आंदोलन के मूड में आने लगे हैं। इनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहीं भी ईंट भट्ठों पर प्रमाण पत्र का प्रतिबंध लगाने का जिक्र नहीं है। प्रशासन की कड़ाई से दूसरे प्रांतों से आने वाले मजदूरों की वापसी की संभावनाएं बनने लगी हैं। इनकी तादाद 20 हजार के लगभग है। राज मिस्त्रियों के रोजगार पर संकट खड़ा हो गया है।
ईंट भट्ठा मालिकों को पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से खनन के लिए स्वच्छता प्रमाण पत्र हासिल करना जरूरी कर दिया गया है। इससे पथाई का काम शुरू नहीं हो पा रहा है। बिहार, उत्तराखंड व झारखंड से आने वाले मजदूर भट्ठा मालिकों के रहमोकरम पर हैं। एक भट्ठे पर करीब 200 के आसपास मजदूर डेरा डाले हैं। सप्ताह भर में इनके कुनबे पर 40 से 50 हजार रुपए खर्च हो रहे हैं। काम बंद होने से इतनी रकम वहन करना मालिकाें को भारी पड़ रहा है। अभी तक इन्हें रास्ता निकल आने की उम्मीद थी। लड़ाई लंबी देख ये मजदूरों की वापसी कराने पर सोचने लगे हैं। 120 भट्टों के करीब 20 हजार मजदूरों को खाली हाथ घर लौटना पड़ जाएगा। ईंट की चिनाई करने वालों के रोजगार को भी झटका लगेगा। जिले में 1000 से ज्यादा राजमिस्त्री हैं। भट्ठा बंद होने से इनका काम भी ठप हो जाएगा।
जिला ईंट निर्माता संघ ने आंदोलन का मन बनाया है। मंगलवार को डीएम को ज्ञापन दिया जाएगा। इसके बाद आगे की रणनीति बनेगी। 4 दिसंबर को प्रदेश समिति की लखनऊ में बैठक होने वाली है। वहां से मिलने वाले निर्देशों के मुताबिक लड़ाई गर्म की जाएगी। संघ के जिलाध्यक्ष सुरेश सक्सेना का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहीं भी पथाई के लिए खनन को प्रमाण पत्र लेेने का जिक्र नहीं है। आदेश को वापस लेना चाहिए।
भट्ठा मालिकों के और भी हैं दर्द
बालू खनन का जिले में ठेका नहीं है। ईंट पथाई के लिए सांचे में बालू की परत बनाई जाती है। बालू की किल्लत से ये पहले से ही परेशान हैं। कोयला यूपीएसआईडीसी की मार्फत मिलता है। मालिकों का कहना है, इसमें दलाली राज कायम है। छह हजार रुपए का कोयला 10 हजार में मिल पाता है। अब स्वच्छता प्रमाणपत्र लागू कर दिया गया।
प्रमाण पत्र लेने की शर्तें
पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से स्वच्छता प्रमाण पत्र लेने की शर्तों से इन्हें नहीं लगता कि कारोबार आगे चल पाएगा। शर्तों में एचटी लाइन, रेलवे लाइन, रोड, पुरातत्व महत्व की इमारताें, स्कूल, अस्पताल, आबादी इलाकाें से करीब डेढ़ किलोमीटर दूरी पर भट्ठा चलाना होगा। कोषाध्यक्ष नारायन अग्रवाल का कहना है कि इन हालातों में कारोबार ठप करना पड़ जाएगा।

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