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गंगादरवाजा ने निकालीं दो ही झांकियां

Farrukhabad Updated Sat, 13 Oct 2012 12:00 PM IST
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कायमगंज (फर्रुखाबाद)। सांझी महोत्सव के 12वें दिन गंगा दरवाजा कमेटी ने फिर मात्र दो झांकियाें का प्रदर्शन कर दर्शकों को निराश किया। देर रात तक सांझियों के इंतजार में बैठे लोग दो झांकियां देख मायूस लौटे।
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पितृपक्ष के दौरान नगर में होने वाली दो सौ साल पुरानी सांझी परंपरा दम तोड़ती नजर आ रही है। महोत्सव के 12 वें दिन भी बिना कमेटी के गठन के गंगादरवाजा की ओर से भारत माता और राधा-कृष्ण की मात्र दो झांकियां निकाली गई। देर रात तक सड़कों पर जमे दर्शक दो झांकियों के बाद इंतजार करते रहे किंतु जब उन्हें पता चला कि अब कोई झांकी नहीं आएगी तो वे मायूस हो लौट गए। झांकियों के साथ चल रहे गंगादरवाजा के युवकों ने कहा कि बिना कमेटी के जितनी सामर्थ्य है उतनी निकालकर परंपरा निभा रहे हैं। कहा कि यदि आखिरी दिनों में सहयोग न मिला तो वे भी कब तक परंपरा का अकेले निर्वाह करते रहेंगे।

बतादें कि यह परंपरा पूरे प्रदेश में सिर्फ यहीं है। कु छ वर्षों पहले तक लोग इसका बेसब्री से इंतजार किया करते थे और पूरे पंद्रह दिन किसी आवश्यक काम से भी शहर से बाहर नहीं जाते थे। इसमें नगर के हिंदू ही नहीं मुसलमान भी भागीदारी करते थे। नगर के मोहल्ला चिलौली निवासी निहाल खां द्वारा निकाली जाने वाली 5 फूलों से राजा को तौलना, केले के पत्तों पर देवियों को बैठाना, फांसी के फंदे पर झूलते शहीद भगत सिंह की सांझी को आज भी लोग याद करते हैं। वहीं नुनहाई मोहल्ला निवासी नन्हें खां का कांच का मंदिर दर्शकों को आज भी याद है। आज का समय कंप्यूटरीकृत और इलेक्ट्रानिक होते होते सांझियों में चमकदमक का दौर शुरू हो गया। अब लोग कला छोड़कर बिजली वालों पर निर्भर हो गए हैं। बिजली वालों को ठेका दे दिया जाता है वे अपनी मर्जी से रंग बिरंगी झालरों व लाइटों से सजी जुगाड़ गाड़ियों पर झांकियां ले आते हैं और कमेटी का काम सिर्फ उन पर बच्चे सजाकर बैठाना भर रह जाता है। रोज रोज वही देवी देवताओं की झांकियाें को देखकर दर्शक भी बोर हो चले हैं। यही कारण है कि अब सांझियां सजाने वाले भी रुचि नहीं दिखाते हैं।



भय से हो रहा है परंपरा का निर्वाह
दोनों मोहल्लों की ओर से लंगडे बाबा व हंस गिरी बाबा द्वारा परंपरा शुरू की गई थी और आज भी मोहल्ले वालों में उनके प्रति पूरी आस्था है। गंगा दरवाजा के लोगों का तो यहां तक मानना है कि यदि किसी महा आयोजन में बरसात होने लगती है तो लोग उसे हंस गिरी बाबा का कोप समझकर उनकी समाधि पर जाकर चिलम व प्रसाद चढ़ाते हैं और कुछ ही देर में बारिश बंद हो जाती है। कई बार इसे आजमाया जा चुका है। यही कारण है कि सांझी परंपरा में कमेटी के गठन के बावजूद मोहल्ले के युवा परंपरा का निर्वाह अदृश्य शक्ति के भय से किए जा रहे हैं।

भगवान शिव की निकाली शोभायात्रा
शमसाबाद। रामलीला कमेटी की ओर से शुक्रवार को भगवान शिवजी की शोभायात्रा निकाली गई। रामलीला भवन गुमटी महादेव मंदिर से शुरू हुई शोभायात्रा कसबे के मुख्यमार्गों से होती हुई वापस रामलीला भवन पहुंची, जहां समापन हुआ। जगह-जगह शोभायात्रा का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। इस मौके पर अध्यक्ष मोहन रस्तोगी, सौरभ शाक्य, मोहन पांडेय, संजय पाठक, गंगादीन प्रजापति, अमित पांडेय, संजय गंगवार, रामकुमार गुप्ता, राजू गुप्ता आदि मौजूद रहे।

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