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आलू से तौबा: साल दर साल कर्ज

Farrukhabad Updated Sat, 13 Oct 2012 12:00 PM IST
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फर्रुखाबाद। एशिया में सबसे ज्यादा आलू पैदा करने वाले जिले के कि सान अब आलू से तौबा कर रहे हैं। साल दर साल कर्ज में डूबना इसका कारण है। यहांकरीब 70 फ ीसदी किसान आलू पैदा करते हैं, लेकिन हालात यह हैं कि जिले के 62 हजार किसान कर्जदार हो चुके हैं। इस बार भी स्थिति ठीक नहीं दिख रही है। हुक्मरानों की भी उदासीनता से कर्ज में डूबे तमाम किसान आलू की खेती से किनारा कर रहे हैं। बीते साल करीब ढाई लाख मीट्रिक टन कम पैदावार हुई थी। वर्ष 2008 से उपज का वाजिब भाव नहीं मिल रहा है। लागत बढ़ने और उपज की कम कीमत मिलने से किसान खस्ताहाल हो रहे हैं। महंगाई से इस साल करीब 2 हजार रुपए प्रति बीघा का खर्च बढ़ा है। किसान 5 हजार से एक लाख तक के कर्जदार हो गए हैं। इनमें से 47 फीसदी बैंक क्रेडिट कार्ड से लोन लिए बैठे हैं। 20 फीसदी ने आढ़तियों से कर्ज उठा रखा है। बाकी सहकारी समितियों के कर्ज से दबे हैं।
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भंडारित आलू का नहीं मिला दाम
शीतगृहों में भंडारित आलू का 1200 से 1500 रुपए प्रति कुंतल का दाम मिलने का अनुमान का लेकिन बाजार मेें 600 रुपए कुंतल से ज्यादा नहीं मिल रहा है। बीज लेने वाले भी आगे नहीं आ रहे हैं। ‘अमर उजाला’ ने करीब 100 किसानों से बात की। इनमें से 39 फ ीसदी ने बताया कि भविष्य में आलू की फ सल से तौबा कर लेंगे। कुछ किसानों ने हल्दी, मेंथा सहित अन्य औषधीय पौधों की खेती शुरू कर दिया है तो कुछ बागवानी की तरफ मुड़ रहे हैं। तमाम किसान सही विकल्प की तलाश में हैं। किसानों ने आलू आधारित उद्योग लगवाने, सरकारी खरीद व हर सप्ताह रैक लगवाने की जरूरत बताई। कि सानों का कहना था कि यह इंतजाम ही तबाही को रोक सकते हैं।

केस -1
डिजुइया गांव के नवाब सिंह बडे़ काश्तकार हैं। परिवार में 100 बीघा खेती है। उनका कहना है कि 2008 से लगातार घाटा होरहा है। मक्का, मूंगफली, सरसों की कमाई आलू में लगा देते हैं। बैंक का 50 हजार अभी भी कर्ज है। जेवरात भी रेहन रखने पडे़। सही विकल्प मिल गया तो आगे से इस फ सल से किनारा कर लेंगे।

केस 2
चांदपुर गांव के रामसिंह का कहना है कि इस साल 7 हजार रुपया बीघा नुकसान उठाना पड़ रहा है। पिछली फसल में 30 हजार रुपए कर्ज लिया था। यह चुक नहीं पाया। नई फसल के लिए इतना ही फिर से कर्ज लेना पड़ेगा। यह क हते हैं कि आलू आधारित उद्योग न लगा तो फसल करना छोड़ देंगे।


फैक्ट फाइल
समितियों की संख्या 70
नियमित सदस्य 35000
कर्जदार किसान 19205
बकाए की रकम 15 करोड़ 26 लाख 22 हजार

इनका कहना है
जिला सहायक निबंधक सहकारी समितियां नारद यादव का कहना है कि वसूली की कार्रवाई की जा रही है। इसी तरह फर्रुखाबाद शाखा के वरिष्ठ प्रबंधक भूपेंद्र कुमार का कहना है कि वसूली में किसी तरह की कोताही नहीं बरती जाएगी।


जिला सहकारी बैंक .............
कुल बकाएदार किसान-13640
कुल बकाया-21 करोड़ 88 लाख रुपया

फर्रुखाबाद शाखा
किसान-5194
बकाया-7 करोड़ 31 लाख 74 हजार रुपया
कायमगंज शाखा
किसान 7254
बकाया 12 करोड़ 44 लाख 39 हजार रुपया
मोहम्माबाद शाखा
किसान 1192
बकाया 2 करोड़ 11 लाख 57 हजार रुपया


20 बैंकों से 110694 लाख ऋण
जिले में व्यवसायिक व सहकारी बैंकों की 109 शाखाएं हैं। इन्होंने कृषि ऋण का 67404 लाख व फसली ऋण का 43290 लाख रुपया किसानों को बांटा है। इसकी वसूली नहीं हो पा रही है। जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक ने बताया कि वसूली की दर बेहद धीमी है। बैंक अधिकारियों की मानें तो करीब 50 करोड़ रुपए के लगभग अभी भी बकाया हैं।

आलू का अर्थशास्त्र :तेजी पर दौड़ता है बाजार
जिले का बाजार आलू के उतार चढ़ाव पर निर्भर करता है। व्यापारी नेता अरुण प्रकाश तिवारी ददुआ का कहना है कि 30 फीसदी बाजार आलू पर टिका है। व्यापारी नेता रोहित गोयल भी इस आंकडे़ से इत्तफाक रखते हैं। व्यापारी नेता कुमारचंद्र वर्मा कहते हैं कि किसानों पर ही सारे कारोबार टिके हैं।

आंख फेरती रही सियासत
आलू की इस दुर्दशा के पीछे सियासतदानों की अनदेखी है। चुनाव में आलू मुद्दा बन जाता है। इसके बाद जनप्रतिनिधि खामोश हो जाते हैं। इस समय केंद्र मेें फर्रुखाबाद का प्रतिनिधित्व सांसद सलमान खुर्शीद कर रहे हैं। वह कानून मंत्री भी हैं। वह कई बार आलू उद्योग लगवाने के बारे में कह चुके हैं। हुआ कुछ नहीं। अमृतपुर से विधायक नरेंद्र सिंह यादव प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री हैं। बसपा सरकार में अनंत मिश्रा अंटू रसूखदार मंत्री रहे हैं। भाजपा सरकार में ब्रह्मदत्त द्विवेदी मंत्री रहे। उद्योग का प्रोजेक्ट परवान नहीं चढ़ पाया। दो साल पहले आलू एवं शाक भाजी विभाग ने चिप्स उद्योग का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा था। इसका जवाब ही नहीं आया। रुनी चुरसई गांव में आलू पाउडर उद्योग के लिए चयनित जगह पर कब्जे होने लगे हैं। आलू उद्योग के बिना आलू किसानों की किस्मत बदलना मुश्किल ही लग रहा है।


वर्ष घाटा प्रति बीघा
2012 3000 रुपए
2011 6000 रुपए
2010 3500 रुपए
2009 3000 रुपए
20008 2500 रुपए



डाटा शीट
पैदावार एरिया- 36 हजार हेक्टेयर
शीतगृह - 64

एक बीघा में लागत- करीब 7 हजार रुपए
क्रेडिट कार्ड - 37,237
कार्ड पर फसली ऋण- 23877 लाख रुपए
कुल बैंक - 20
शाखाएं - 109
न्यूनतम तापमान- 17 डिग्रीे सेंटीग्रेड
अधिकतम तापमान- 22 डिग्री सेंटीग्रेड
ताजा भाव बीज - 400 से 500 रुपए कुंतल
ताजा भाव सामान्य- 500 से 600 रुपए कुंतल
खुदरा भाव- 15 रुपया प्रति किलो
2011-12 में उत्पादन - साढे़ आठ लाख मीट्रिक टन
2010-2011 में उत्पादन- साढे़ 10 लाख मीट्रिक टन
नई फसल में लगेगी लागत- 8 हजार रुपए

रोग बनते हैं काल
कृषि विज्ञान केेंद्र के वैज्ञानिक डा. जगदीश किशोर बताते हैं कि आलू रोग पैदावार के लिए काल साबित होते हैं। अगैती झुलसा रोग भयानक होने पर 80 फ ीसदी पैदावार गिरा देता है। पिछैती झुलसा 40 फीसदी नुकसान पहुंचाता है। निमेटोड 42 से 50 फीसदी पैदावार गिरा देता है। मुजैक वायरस 25 फीसदी नुकसान पहुंचाता है। घोंघी रोग 22 से 33 प्रतिशत उपज में घाटा देता है।

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