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डग्गामार वाहन बनें हैवान, खतरे में जान

Farrukhabad Updated Fri, 12 Oct 2012 12:00 PM IST
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फर्रुखाबाद। जिले में डग्गामार वाहनों की पौ बारह है। डग्गामार वाहन न केवल मनमाने तरीके से सवारियां भरते हैं, बल्कि छोटे-छोटे बच्चों को वाहन की छत पर बैठा लेते हैं। ये वाहन शहर की विभिन्न सड़कों के साथ पुलिस मुख्यालय के सामने से प्रतिदिन फर्राटा भरते हैं। बावजूद इसके पुलिस आंखें बंद किए रहती है। डग्गामार वाहन प्राइवेट बस स्टैंड ही नहीं, रोडवेज बस अड्डे के सामने से भी सवारियां भरते हैं। इससे हर दिन रोडवेज को हजारों रुपए का चूना लग रहा है। यह हालत तब है, जब प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव की ओर से रोडवेज के सामने से प्राइवेट बसों और डग्गामार वाहनों के खड़े होने पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसके बाद भी अफसर आंखें बंद किए हुए हैं। इससे बस अड्डे के पास डग्गामार वाहनों का तांता लगा रहता हैं।
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शासन की ओर से रोडवेज बस अड्डे के आसपास से सवारियां भरने पर प्रतिबंध लगाया गया है। एक किलोमीटर सीमा तक प्राइवेट बस और डग्गामार वाहन के खड़े कर सवारियां भरने वालों वाहनों पर कार्रवाई करने के प्रमुख सचिव ने आदेश दिए। इसके बाद भी जिले के अफसर नहीं चेत रहे हैं। अफसरों की ढिलाई की वजह से रोडवेज बस अड्डे के पास प्रतिदिन प्राइवेट बसें और डग्गामार वाहनों से सवारियां भरी जा रही है। इसका खामियां रोडवेज बसों को झेलना पड़ता है। सवारियां ने होने के कारण रोडवेज बसें खाली दौड़ रही हैं। एक सप्ताह पूर्व सहायक परिवहन अधिकारी, रोडवेज विभाग के अफसर ने पुलिस बल के साथ डग्गामार वाहन को पकड़ने के लिए लाल दरबाजे पर छापामार अभियान चलाया था। अभियान के दौरान डग्गामार वाहन को अफसर नहीं पकड़ पाए। पुलिस ने बाइकों की चेकिंग अभियान चलाकर कागजों में कमी मिलने पर बाइकों का चालान कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली।

डग्गामार वाहन और प्राइवेट बसों से रोडवेज विभाग को हर माह 21 लाख का चूना लग रहा है। प्रतिदिन विभाग को लगभग 70 लाख रुपए का नुकसान सहना पड़ रहा हैं। रोडवेज बसों की सवारियां डग्गामार वाहन और प्राइवेट बस ले जाते है। उनको खाला जाना पड़ता हैं। इस कारण प्रतिदिन विभाग के राजस्व को लगभग 70 हजार रुपए का नुकसान सहना पड़ता हैं। इसकी भरपाई के लिए विभाग ने अभी तक कोई कड़ा कदम नहीं उठाया।
सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी चंद गाडियों का चालान कर खुश हैं। वे दावा करते हैं कि डग्गामारी के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। बताते हैं कि इस माह के 11 दिनों में 38 गाड़ियां पकड़ी गई हैं। इनसे 3.20 लाख रुपए जुर्माना वसूल किया गया। गुरुवार को एआरटीओ ने छापामारी कर आठ गाड़ियों को पकड़ने का दावा किया है।

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