तुलसी, मेंथा को किसान दे रहे तरजीह

लखनऊ/ब्यूरो Updated Tue, 11 Dec 2012 04:56 PM IST
farmers are giving preference to basil, mint in up
तमाम घरों में तुलसी धार्मिक महत्व के नाते आंगन की शोभा बढ़ाती और पूजी जाती है। मगर मनरेगा में औषधीय खेती जुड़ने के बाद अब यही तुलसी खेती करने वाले किसानों की कमाई का जरिया बनने लगी है। सूबे के आधा दर्जन जिलों में किसान इसकी समूह-समूह में खेती करने लगे हैं और तीन महीने की खेती से प्रति एकड़ 55 हजार तक की कमाई कर रहे हैं।

दरअसल प्रदेश सरकार के बायो एनर्जी मिशन सेल की ओर से औषधीय और सुगंधित फसलों की खेती के लिए एक स्कीम तैयार की गई थी। इसमें तुलसी के साथ मेंथा, सर्पगंधा, अश्वगंधा, सतावर, गिलोय, पिप्पली जैसे 20 औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती का नुस्खा शामिल है। मनरेगा की मदद से शुरू इस स्कीम से किसान को न सिर्फ पूंजी बल्कि तकनीक भी उपलब्ध कराई जाती है।

फसल तैयार होने के बाद बाजार में उसको बिकवाने का सारा जिम्मा भी मिशन उठाता है। बताते हैं कि शुरुआत में उत्पाद की बिक्री की चिंता के कारण इस स्कीम को ज्यादा तवज्जो नहीं मिली, लेकिन अब इस ओर झुकाव बढ़ा है। मिशन की ओर से सत्र 2012-13 के संबंध में जारी ताजा रिपोर्ट नई तस्वीर पेश करती है।

रिपोर्ट के अनुसार किसानों ने औषधीय खेती में तुलसी और मेंथा को सर्वाधिक महत्व दिया है। रायबरेली के हरचंदपुर, महराजगंज और बछरावां, उन्नाव के हिलौली, फर्रुखाबाद के नवाबगंज, झांसी के मोठ और जालौन के नदीगांव ब्लाकों में तुलसी या मेंथा की खेती तेजी से बढ़ी है। अधिकारी बताते हैं कि किसानों को अब इससे होने वाला फायदा समझ में आ रहा है। तुलसी 65 से 70 दिन में ही तैयार हो जाती है। मेंथा की दो से तीन फसल साल में ली जा सकती है।

तुलसी की खेती का अर्थशास्त्र (एक एकड़ पर)

भूमि की तैयारी पर                      1800
खाद                                   2200
नर्सरी तैयार करने में                     1600
पौध रोपड़, निराई-गुड़ाई, सिंचाई            3800
आसवन (तेल निकालना) व अन्य व्यय      2500
खेती पर कुल खर्च                       11900

- उत्पादन 50-60 किलोग्राम प्रति एकड़। कीमत 500 से 800 रुपये प्रति किलोग्राम। तुलसी की खेती से औसत आय - 30000 रुपये
- मनरेगा के अंतर्गत 112 मानव दिवस का श्रम (100 मानव दिवस का काम मालिक का, बाकी परिवार या अन्य का)-14000 रुपये
- शुद्ध आय : 55900 रुपये

‘‘तुलसी की खेती बोनस फसल के रूप में ली जाती है। जहां तुलसी के स्थान पर कोई अन्य महत्वपूर्ण फसल ली जा सकती हो वहां तुलसी की खेती उपयुक्त नहीं मानी जाती। जब दो फसलों के बीच दो-ढाई महीने का समय हो और खेत खाली हो तो इसकी खेती कर अतिरिक्त आय प्राप्त की सकती है। औषधीय खेती को प्रोत्साहित करने के लिए मिशन खेती का पूरा खर्च उठाता है और उत्पाद की बिक्री के लिए किसान और बाजार के बीच समन्वय का काम करता है। अब इस सफलता को मॉडल के तौर पर पेशकर सूबे के दूसरे जिलों में विस्तार देने की योजना है।’’

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