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इस काल भैरव जयंती पर कालभैरव मंदिर (दिल्ली) में पूजा और प्रसाद अर्पण से बनेगी बिगड़ी बात : 19-नवंबर-2019
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इस काल भैरव जयंती पर कालभैरव मंदिर (दिल्ली) में पूजा और प्रसाद अर्पण से बनेगी बिगड़ी बात : 19-नवंबर-2019

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पीएफ घोटालाः आज से दो दिन काम नहीं करेंगे बिजली अभियंता और कर्मचारी

भविष्य निधि घोटाले के विरोध में सोमवार से बिजली अभियंता व कर्मचारी दो दिवसीय कार्य बहिष्कार करेंगे। पूरे प्रदेश भर में अभियंता व कर्मचारी 18 व 19 नवंबर को उपस्थिति दर्ज कराएंगे, लेकिन काम नहीं करेंगे।

18 नवंबर 2019

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फैजाबाद

सोमवार, 18 नवंबर 2019

अयोध्या आ रहे सलमान नदवी को पुलिस ने वापस लौटाया

अयोध्या। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर सलमान नदवी को शनिवार को प्रशासन ने अयोध्या जाने से रोका दिया।
उन्हें रौनाही टोल प्लाजा से लौटा दिया गया। सलमान नदवी तय कार्यक्रम के अनुसार मुस्लिम पक्षकारों और निर्मोही अखाड़े समेत कई संत-महंतों से मिलने वाले थे।
साथ ही प्रशासन से मिलकर मस्जिद के लिए तलाशी जा रही संभावित भूमि पर भी विचार विमर्श करने वाले थे लेकिन रौनाही टोल प्लाजा के पास पुलिस प्रशासन ने उन्हें रोक लिया।
टोल प्लाजा के ऑफिस में ही सलमान नदवी और उनके साथ आए हुए लोगों ने प्रशासन के साथ एक बैठक भी की। इसमें यह तय हुआ कि सबसे जरूरी काम अयोध्या में शांति और सौहार्द बनाए रखना है।
अगर नदवी जी अयोध्या जाते हैं तो आने वाले दिनों में कई ऐसे लोग या संगठन अपनी राजनीतिक और धार्मिक गतिविधियां चलाने अयोध्या आ सकते हैं।
इन सब बातों पर विचार विमर्श के बाद सलमान नदवी ने यह तय किया कि वह आने वाले कुछ समय बाद वापस अयोध्या आएंगे और लोगों में शांति और सौहार्द के लिए काम करेंगे। इससे पूर्व रौनाही सीमा पर बबलू खान ने मुस्लिम भाइयों के साथ मिलकर उनका स्वागत किया।
सलमान नदवी ने कहा उनका अयोध्या आने का मकसद था, सद्भावना, भाईचारा और सुप्रीम कोर्ट का जो फैसला है उसका एहतराम। उस फैसले को किस तरह से आगे बढ़ाया जाएगा इसकी फिक्र। इसमें वहां के साधुओं से मिलना था मुसलमानों से भी मिलना था। जो फैसला हुआ है वह अच्छा फैसला हुआ है। अब इस फैसले के मुताबिक अमल होना चाहिए। टोल प्लाजा के पास रास्ते में ही अयोध्या मामले के मुस्लिम पक्षकार हाजी महबूब ने भी सलमान नदवी से मुलाकात की।
श्री श्री के दूत पहुंचे अयोध्या, पक्षकारों से की मुलाकात
अयोध्या। श्री श्री रविशंकर के दूत गौतम विज शनिवार को अयोध्या पहुंचे और पक्षकारों से मुलाकात की। उन्होंने मुस्लिम पक्षकार हाजी महबूब व निर्मोही अखाड़े के महंत दिनेंद्र दास से भेंट की।
गौतम विज ने हाजी महबूब के आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की। इसके बाद देर शाम निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेंद्र दास से भी मिलकर उनका आशीर्वाद लिया।
गौतम विज ने अमर उजाला से कहा कि हम अमन का पैगाम देने अयोध्या आए हुए थे। गुरुजी 2003 से इस मामले से जुड़े रहे हैं। हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं। अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला सुनाया है उसका हृदय से स्वागत है। हमारा लक्ष्य है कि कोर्ट का जो फैसला आया है उसका अब पालन किया जाना चाहिए। इस मामले में अब कोई नया विवाद खड़ा करने की जरूरत नहीं है।
मुलाकात के बाद हाजी महबूब ने कहा कि श्री श्री के दूत गौतम विज से मुलाकात सद्भाव पूर्ण रही। अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया है वह हम सभी को मान्य है। मस्जिद की जमीन सहित अन्य मुद्दों पर हमारी गौतम विज व रौनाही प्लाजा के पास सलमान नदवी से बात हुई है। हम यह इंतजार कर रहे हैं कि सरकार हमें मस्जिद के लिए पांच एकड़ जमीन कहां देती है उसके बाद कोई निर्णय लिया जाएगा। लेकिन सबसे पहले देश में अमन, चैन एवं सौहार्द कायम रहे यही हमारा लक्ष्य है।
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अब भव्य राममंदिर निर्माण की आस मेें उत्साहित अयोध्या

अयोध्या। सुप्रीम फैसले के बाद रामनगरी ने अपने मिजाज के अनुरूप एक बार फिर सौहार्द का संदेश दिया है। फैसला आने के एक सप्ताह बाद रामनगरी पूरी तरह शांत, संयमित एवं सद्भाव के माहौल में खुशमिजाज नजर आ रही है।
ऐतिहासिक फैसले से खुश लोग अब भव्य राममंदिर निर्माण की आस मेें उत्साहित हैं। लोगों की चाहत है कि अब शीघ्र ही राममंदिर का निर्माण होना चाहिए। फिलहाल सभी को अब केंद्र सरकार के अगले कदम का बेसब्री से इंतजार है।
रामनगरी में सद्भाव की बंशी बज रही है तो वहीं चौक-चैराहों पर सीताराम की धुन व भजनों का सुर यह दर्शाता है कि अयोध्या अमन का पैगाम दे रही है। यहां की बाजारों में भी चहल पहल है तो सद्भाव का भी रंग घुला हुआ है।
फैसला आने के बाद हिंदू-मुस्लिम एक साथ कारोबार कर रहे हैं, वैसे यह परिपाटी दशकों से चली आ रही है लेकिन इस क्षण में फिर से अयोध्या ने सद्भाव का संदेश दिया है।
शृंगारहाट में एक दुकान पर खड़े मिले सुल्तान अंसारी कहते हैं कि वर्षों का विवाद अब खत्म हो चुका है, बांस-बल्लियों की जो बैरीकेडिंग बनाई गई है इसे भी समाप्त कर देना चाहिए।
अयोध्या में कभी तनाव नहीं रहा। यहां तो हमेशा असीम शांति रही है। संत एमबी दास कहते हैं कि मौका मिला है तो रामलला के मंदिर को भव्यता देने में कोई कसर नहीं छोड़ी जानी चाहिए।
व्यापारी अशोक गुप्ता की दुकान हनुमानगढ़ी परिसर में स्थित है जो आए दिन बंदिशों की मार झेलती है। कहते हैं कि अब इस विवाद के बाद बंदिशों से छुटकारा मिलेगा, अयोध्या का नया स्वरूप दिखेगा।
इरफान खान अशर्फी भवन चौराहे पर हिंदू भाइयों के साथ चाय पी रहे होते हैं। पूछने पर कहते हैं कि अयोध्या का जो भी फैसला आया है वह सर्वमान्य है। हमें तो अयोध्या की तरक्की, विकास, रोजगार व सुख, समृद्धि, सद्भाव चाहिए बस। इस बीच कुछ बाहरी श्रद्धालु नजर आते हैं।
नालंदा के छोटेलाल, जबलपुर के देवनारायण, बिहार की सुनीता गुप्ता व शिवान के जयशंकर दुबे कहते हैं कि हमारी चाहत है कि अब शीघ्र भव्य राममंदिर का निर्माण शुरू हो जाए। अब देरी नहीं होनी चाहिए, दिव्यतम, भव्यतम मंदिर से अयोध्या का आध्यात्मिक गौरव शीर्ष पर पहुंच जाएगा।
मंदिरों में गूंज रही रामधुन, दर्शन-पूजन का उल्लास
रामनगरी के मठ-मंदिरों में रामधुन की गूंज हैं तो दर्शन-पूजन का उल्लास भी छलक रहा है। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु अयोध्या पहुंच रहे हैं और रामलला, हनुमानगढ़ी, कनकभवन से लेकर अन्य मंदिरों में दर्शन-पूजन कर रहे हैं। सरयू तट के पंडा ओमप्रकाश पांडेय कहते हैं कि फैसला आने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है। स्नान एवं दान के लिए बड़ी संख्या में बंदिशों में ढील दिए जाने के साथ ही श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो चुका है। हनुमानगढ़ी के पुजारी पार्षद रमेश दास कहते हैं अयोध्या में तो हमेशा सौहार्द का तराना गूंजता रहता है, स्थिति कोई भी रामनगरी अपने मिजाज से समझौता नहीं करती। कई बार इस मिजाज को प्रभावित करने का प्रयास हुआ लेकिन रामनगरी नहीं डिगी।
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महंत नृत्यगोपाल दास पर अभद्र टिप्पणी से संत समाज नाराज

अयोध्या। परमहंस दास द्वारा श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास पर की गई अभद्र टिप्पणी की संत समाज ने निंदा करते हुए नाराजगी व्यक्त की है।
बैठक में संतों ने मांग की है कि परमहंस अपने कृत्यों के लिए महंत नृत्यगोपाल दास से क्षमा मांगें। शनिवार शाम दशरथमहल बड़ा स्थान में बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य की अध्यक्षता में बैठक आयोजित हुई।
इसमें परमहंस का ही मुद्दा छाया रहा। महंत देवेंद्रप्रसादाचार्य ने कहा कि तपस्वी छावनी संतों की साधनास्थली रही है, परमहंस ऐसे कृत्यों से मर्यादा धूमिल कर रहे हैं। निंदा करने से मनुष्य गर्त में जाता है जिसके उदाहरण कथित परमहंस हैं।
महंत देवेंद्रप्रसादाचार्य ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सारे विवादों की जड़ काट दी है। इतना सुंदर फैसला आया है कि झगड़े की गुंजाइश नहीं है।
केंद्र सरकार, राज्य सरकार व रामजन्मभूमि न्यास मिलकर ट्रस्ट बनाकर राममंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करेंगे। अब विवाद नहीं सौहार्द को आगे बढ़ाने की जरूरत है।
तपस्वी छावनी के महंत सर्वेश्वर दास जी ने बताया कि उन्होंने परमहंस दास को उत्तराधिकारी के पद से पदच्युत करते हुए मंदिर से निष्कासित कर दिया है। दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास ने कहा कि दुनिया का सबसे भव्य मंदिर बनने जा रहा है। हम सभी को शांत रहते हुए एक होकर रहना चाहिये।
किसी महापुरुष के विरुद्ध अभद्र टिप्पणी करना निंदनीय है। महंत करुणानिधान शरण ने कहा किसी इस तरह अभद्र टिप्पणी करने वाले का सार्वजनिक बहिष्कार हो। बैठक का संचालन महंत कन्हैयादास रामायणी ने किया। बैठक में महंत पवन दास शास्त्री, महंत अवधेश दास, महंत शशिकांत दास, महंत गिरीश दास आदि ने विचार व्यक्त किये। इस दौरान संत रामभूषण दास कृपालु, महंत सियाकिशोरी शरण, महंत अवध किशोर शरण, विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा सहित अन्य संत व धर्माचार्य मौजूद रहे।
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राममंदिर ट्रस्ट में 'मुखिया' बनने की लड़ाई तेज, अब निर्मोही अखाड़े के दावे से संतों में बढ़ी हलचल

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी राममंदिर निर्माण में रोड़े खत्म नहीं हो रहे हैं। केंद्र सरकार अभी राममंदिर निर्माण के लिए नए ट्रस्ट का स्वरूप तय करने में जुटी है। इस बीच शीर्ष संत-धर्माचार्यों में ट्रस्ट का मुखिया बनने और शामिल होने की लड़ाई सतह पर आ गई है। श्रीरामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास के बाद निर्मोही अखाड़ा ने भी ट्रस्ट में न सिर्फ शामिल होने बल्कि अध्यक्ष या सचिव पद की मांग करके हलचल मचा दी है।

रामनगरी के संत-महंत दुविधा में हैं कि दोनों प्रमुख आश्रमों में किसका पक्ष लें और किसका नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर को विराजमान रामलला के पक्ष में फैसला देते हुए केंद्र सरकार से मंदिर निर्माण के लिए अयोध्या एक्ट 1993 के तहत राममंदिर बनाने के लिए ट्रस्ट की योजना और शर्तें तय करने को कहा था। साथ ही मस्जिद के लिए सरकार से अयोध्या में ही प्रमुख जगह पर पांच एकड़ भूमि सुन्नी वक्फ बोर्ड को देने के निर्देश दिए थे।

दोनों मामलों में सरकार विचार कर रही है, जिला प्रशासन से तमाम दस्तावेज भेच चुका है, अभी भी कई रिपोर्ट मांगी जा रही है। हालांकि ट्रस्ट का स्वरूप क्या होगा? इसे लेकर न पक्षकारों के पास कोई जानकारी है, न जिला प्रशासन के पास। सूत्र सिर्फ इतना बताते हैं कि मामला गृहमंत्रालय के बजाय अब पीएमओ देख रहा है। फिर भी यहां राममंदिर निर्माण के लिए तीन ट्रस्ट श्रीरामजन्मभूमि न्यास, श्रीरामजन्मभूमि रामालय न्यास और श्रीरामजन्मभूमि मंदिर निर्माण न्यास में दावेदारी गरमाई हुई है।

निर्मोही अखाड़े ने रविवार को राममंदिर निर्माण के नए ट्रस्ट में सरकार से अध्यक्ष या सचिव बनने की मांग करके हलचल बढ़ा दी है। निर्मोही अखाड़े की ओर से सोमवार को प्रधानमंत्री कार्यालय को इस आशय का प्रतिवेदन भेजा जाएगा। जबकि श्रीरामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने कहा कि हमारी अध्यक्षता में राममंदिर बनेगा, जिसको शामिल होना होगा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कुछ लोग ट्रस्ट में आ जाएंगे।

नया ट्रस्ट बनाने की कोई जरूरत नहीं है। इन दो बड़े मठों की लड़ाई में यहां का आम साधु-संत अब परेशान दिख रहा है।
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रामलला की फाइल फोटो। रामलला की फाइल फोटो।

घर का ताला तोड़ नकदी व जेवर चोरी

अयोध्या। शहर के कैंट कोतवाली क्षेत्र के नया पुरवा मोहल्ले में दिल्ली गए परिवार के घर का ताला तोड़कर चोरों ने नकदी व जेवर पर हाथ साफ कर दिया है। पुलिस ने राम अभिलाष ओझा की तहरीर पर केस दर्ज कर दिया है। अभी परिजन दिल्ली में ही हैं।
तहरीर में बताया गया है कि नया पुरवा निवासी गीता शुक्ला अपने पति के साथ 8 नवंबर को लड़के से मिलने दिल्ली गए हैं। दोनों लोगों ने जाने से पहले घर के सभी दरवाजों पर ताला लगा दिया था। सोमवार को जब सफाई करने पहुंची एक महिला ने ताला टूटा देखा तो दिल्ली में फोन लगाकर गीता शुक्ला को सूचना दी। इसके बाद उनके गीता शुक्ला के पिता राम अभिलाष ओझा ने पहुंचकर पुलिस को फोन किया।
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पड़ताल की है। बाहरी गेट पर ताला लगा हुआ था जबकि अंदर के दरवाजे पर ताला टूटा हुआ मिला है। राम अभिलाष शर्मा के अनुसार घर में रखे जेवर व 10 हजार रुपए नकद चोर उड़ा ले गए हैं। थानाध्यक्ष कैं ट आशुतोष मिश्रा ने बताया है कि केस दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच की जा रही है।
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राममंदिर ट्रस्ट में मुखिया बनने की लड़ाई तेज

अयोध्या। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी राममंदिर निर्माण में रोड़े खत्म नहीं हो रहे हैं। केंद्र सरकार अभी राममंदिर निर्माण के लिए नए ट्रस्ट का स्वरूप तय करने में जुटी है। इस बीच शीर्ष संत-धर्माचार्यों में ट्रस्ट का मुखिया बनने और शामिल होने की लड़ाई सतह पर आ गई है।
श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास के बाद निर्मोही अखाड़ा ने भी ट्रस्ट में न सिर्फ शामिल होने बल्कि अध्यक्ष या सचिव पद की मांग करके हलचल मचा दी है। रामनगरी के संत-महंत दुविधा में हैं कि दोनों प्रमुख आश्रमों में किसका पक्ष लें और किसका नहीं।
सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर को विराजमान रामलला के पक्ष में फैसला देते हुए केंद्र सरकार से मंदिर निर्माण के लिए अयोध्या एक्ट 1993 के तहत राममंदिर बनाने के लिए ट्रस्ट की योजना और शर्तें तय करने को कहा था। साथ ही मस्जिद के लिए सरकार से अयोध्या में ही प्रमुख जगह पर पांच एकड़ भूमि सुन्नी वक्फ बोर्ड को देने के निर्देश दिए थे।
इन दोनों मामलों में सरकार विचार कर रही है, जिला प्रशासन से तमाम दस्तावेज भेच चुका है, अभी भी कई रिपोर्ट मांगी जा रही है। हालांकि ट्रस्ट का स्वरूप क्या होगा? इसे लेकर न पक्षकारों के पास कोई जानकारी है, न जिला प्रशासन के पास। सूत्र सिर्फ इतना बताते हैं कि मामला गृहमंत्रालय के बजाय अब पीएमओ देख रहा है। फिर भी यहां राममंदिर निर्माण के लिए तीन ट्रस्ट श्रीरामजन्मभूमि न्यास, श्रीरामजन्मभूमि रामालय न्यास और श्रीरामजन्मभूमि मंदिर निर्माण न्यास में दावेदारी गरमाई हुई है।
निर्मोही अखाड़े ने रविवार को राममंदिर निर्माण के नए ट्रस्ट में सरकार से अध्यक्ष या सचिव बनने की मांग करके हलचल बढ़ा दी है। निर्मोही अखाड़े की ओर से सोमवार को प्रधानमंत्री कार्यालय को इस आशय का प्रतिवेदन भेजा जाएगा।
जबकि श्रीरामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने कहा कि हमारी अध्यक्षता में राममंदिर बनेगा, जिसको शामिल होना होगा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कुछ लोग ट्रस्ट में आ जाएंगे। नया ट्रस्ट बनाने की कोई जरूरत नहीं है। इन दो बड़े मठों की लड़ाई में यहां का आम साधु-संत अब परेशान दिख रहा है।
श्रीराम जन्मभूमि रामालय न्यास के सचिव स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने रविवार को अमर उजाला से बातचीत में फिर दावा किया कि राममंदिर बनाने का दायित्व सरकार को उनके रामालय न्यास को देना पड़ेगा। कहा कि श्रीरामजन्मभूमि न्याय अयोध्या एक्ट 1993 से पहले का बना है, जिसकी वजह से पात्रता नहीं रखता, जबकि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण न्यास के अध्यक्ष महंत जन्मेजय शरण उनके साथ है और रामालय के कार्यकारिणी सदस्य भी हैं। अब रही बात निर्मोही अखाड़े के दावे की तो उनको सिर्फ ट्रस्ट में जगह देने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है। ट्रस्ट का दायित्व संभालने के लिए नहीं।
निर्मोही अखाड़े के वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत लाल वर्मा कहते हैं कि सुप्रीमकोर्ट के आदेश पर अब पीएमओ को ट्रस्ट की योजना बनानी है। इसमें रामानंदीय वैरागी संप्रदाय के 80 प्रतिशत सदस्य होने चाहिए। बाकी अपने-अपने क्षेत्र में विशिष्ट योगदान करने वाले सेवानिवृत्त अधिकारी व समाजसेवी हों। यह अनिवार्य हो कि वे वैष्णव हों, और मूर्तिपूजा करते हों।
रंजीत लाल वर्मा ने कहा कि ट्रस्ट की जनरल बाड़ी के अलावा प्रबंध कार्यकारिणी में निर्मोही अखाड़े का वर्चस्व होना चाहिए। इसका अध्यक्ष व सचिव समेत 7 या 11 की कार्यकारिणी में सभी पंचों को स्थान मिलना चाहिए। सारा हिसाब-किताब पारदर्शी होना चाहिए। वे कहते हैं कि सरकार को न ट्रस्ट में शामिल होने का अधिकार है न धन खर्च करने का। इसके लिए तिरुपति बालाजी ट्रस्ट का मॉडल अपनाया जा सकता है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपर शासकीय अधिवक्ता मदन मोहन पांडेय कहते हैं कि केंद्र सरकार राममंदिर ट्रस्ट की स्कीम बनाने में पारदर्शिता का पूरा ख्याल रखेगी। वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की तरह प्रशासकीय व्यवस्था देने के लिए सीईओ जैसा पद रख सकती है। पैसे का दुरुपयोग न हो, इसके लिए सख्त इंतजाम जरूर दिखेगा। ट्रस्ट में स्थानीय शीर्ष संतों से लेकर जनप्रतिनिधियों को जगह दी जा सकती है। सरकार वैष्णो देवी ही नहीं, तिरुपति बाला जी, बद्रीनाथ के साथ शैव संप्रदाय के सोमनाथ मंदिर व काशी विश्वनाथ ट्रस्ट का भी मॉडल देखकर श्रीराममंदिर ट्रस्ट का स्वरूप तय करेगी।
सिविल मामलों के वरिष्ठ अधिवक्ता व ट्रस्टों के जानकार गोपाल कृष्ण मिश्र कहते हैं कि ज्यादातर संभावना बद्रीनाथ मंदिर ट्रस्ट का मॉडल अपनाए जाने की है। इसमें स्थानीय जनप्रतिनिधि से लेकर संत-धर्माचार्य तक शामिल हैं। सरकार तो कहीं से शामिल नहीं हो सकती, ऐसा पहले के मामलों में सुप्रीम कोर्ट का ही निर्देश है। सरकार विस्तार से लेकर वित्तीय व्यवस्था साधु-संतों के हवाले न करके भले ही अपने हाथ में धर्मार्थ कार्य विभाग के जरिए रखेगी। उन्होंने कहा कि जल्द ही सरकार की स्कीम व शर्ते बनकर सामने आ जाएगी। सरकार की स्कीम में राममंदिर के नाम से चलने वाले ट्रस्टों की संपत्तियों को लेकर भी गाइड लाइन होगी।
ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण शर्मा कहते हैं कि ट्रस्ट का स्वरूप अंतरराष्ट्रीय होना चाहिए। देश-विदेश के शीर्ष धर्माचार्य शामिल होने चाहिए। अयोध्या अब नगर निगम ही नहीं, धाम की तरह विकसित होना चाहिए। राममंदिर इतना भव्य व विशाल बनना चाहिए कि इससे भारत की पहचान जुड़ सके। राम के नाम पर जितने भी ट्रस्ट बने हैं, सबको अपनी संपत्ति राममंदिर के लिए दे देनी चाहिए। ट्रस्ट के जिम्में सिर्फ मंदिर का कार्य न हो, बल्कि यहां के विकास में अहम भूमिका तय होनी चाहिए। स्कूलों-कॉलेजों के संचालन के साथ अस्पताल आदि भी बनना चाहिए।
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कई इलाकों से हटाए गए बैरियर, बढ़ी गश्त

अयोध्या। रामनगरी में बाहरी प्रदेशों से भक्तों के आने का सिलसिला तेज होता जा रहा है। इस बीच बैरियर हटाकर कई इलाकों में राहत दी गई। हालांकि सुरक्षा के लिए एटीएस घाट से लेकर भीतरी इलाकों में गश्त करती नजर आ रही है। अभी रामकोट क्षेत्र बैरीकेडिंग लगी है।
वहीं चौक-चौराहों पर अब राममंदिर के लिए बनने वाला ट्रस्ट चर्चा के केंद्र में हैं। सभी को सरकार के अगले कदम का बेसब्री से इंतजार है। इंतजार हो भी क्यों न जितने जल्द ट्रस्ट बनाने का काम शुरू होगा, उतना ही शीघ्र रामलला की टेंट से रिहाई का मार्ग भी प्रशस्त होगा और लोगों की दिव्य-भव्य, सुरम्य, अलौकिक राममंदिर निर्माण की कामना पूरी होगी।
अयोध्या का जनजीवन सामान्य हो चुका है। अयोध्या के रग-रग में घुला सौहार्द का रंग दिन-प्रतिदिन और गाढ़ा होता नजर आ रहा है। मठ-मंदिरों में रामधुन तो मस्जिदों में अजान गूंज रही है। बाजारों में चहल-पहल है तो रामकोट को छोड़कर शहर में अन्य इलाकों में सुरक्षा प्रबंधों में ढील दी जा रही है।
तुलसी स्मारक भवन, राजसदन, तपस्वी छावनी के पास लगे बैरियर खोल दिए गए हैं। वहीं दूसरी तरफ देश के कोने-कोने से भक्तों का आवागमन भी अयोध्या में तेजी से बढ़ा है। मुंबई से पहुंचे वैष्णव परिवार ने सरयू स्नान कर रामलला व हनुमानगढ़ी सहित अन्य मंदिरों में दर्शन-पूजन किया। विजय चंद्रा ने कहा कि अब तो हम सभी को राममंदिर निर्माण का इंतजार है, अयोध्या में चारों तरफ शांति का अहसास होता है।
आरती चंद्रा बोलीं कि अयोध्या में आने के बाद जाने का ही मन नहीं करता। रामलला का दर्शन कर जीवन धन्य हुआ है। अभय गनेश ने कहा कि रामलला को बंदिशों में देखकर मन द्रवित हुआ तो इस बात का भी अब संतोष है कि शीघ्र ही रामलला भी बंदिशों से मुक्त होने वाले हैं।
इस बीच रामलला दर्शन मार्ग पर श्रद्घालुओं का जत्था रामधुन गुनगुनाते हुए गुजर रहा था, उन्हें दुनियादारी से कोई मतलब नहीं है। वे तो बस आराध्य की चौखट पर माथा टेकने को व्याकुल थे। गुजरात के सोमभाई, ओमभाई सोमपुरा, शोभाबेन बोलीं कि राममंदिर बनेगा तो अच्छा रहेगा, राममंदिर ऐसा बनना चाहिए कि वह अद्भुत हो, हम सभी को राममंदिर में भगवान राम के भव्य दर्शन का इंतजार है।
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पीएमओ से ट्रस्ट बनेगा, उस ट्रस्ट में हम भी शामिल होंगें : रणजीत लाल

सीएम योगी हों राममंदिर के नए ट्रस्ट के मुखिया : जसवीर सिंह

परमहंस दास ने वीडियो वायरल कर फिर की महंत नृत्यगोपाल दास पर अभद्र टिप्पणी

अयोध्या। परमहंस दास ने रविवार को भी एक वीडियो वायरल कर श्रीरामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष व मणिरामदास की छावनी के महंत नृत्यगोपाल दास पर अभद्र टिप्पणी की है। वायरल वीडियो में कहा कि महंत नृत्यगोपाल दास के दबाव में उनके गुरु तपस्वी छावनी के महंत सर्वेश्वर दास ने उन्हें निष्कासित किया है।
महंत नृत्यगोपाल दास का आचरण अमर्यादित है। वे हमारे पीछे पड़ गए हैं, मेरी हत्या के पीछे लगे हुए हैं, शासन-प्रशासन उनसे डरता है। कहा कि यदि वे संत हैं तो तपस्वी छावनी के साथ अन्याय नहीं करेंगे। इस बाबत मणिरामदास की छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास ने कहा कि वे इस मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहते हैं।
परमहंस दास का दिमाग खराब हो गया है, वह पागल हो चुका है। वह तपस्वी छावनी जो कि ज्ञान, वैराग्य एवं आचार्य पीठ है, उसकी गरिमा को धूमिल करने का काम कर रहा है। उसके गुरु महंत सर्वेश्वर दास जो कि एक अच्छे संत हैं। उन्होंने अयोध्या की व तपस्वी छावनी की गरिमा की रक्षा के लिए ही उसे निष्कासित किया है।
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अब फिर विवाद नहीं, दिव्य-भव्य राममंदिर चाहिए

अयोध्या। निर्मोही अखाड़े के पंचों की एक बैठक रविवार को अयोध्या में अखाड़ा के सरपंच महंत राजारामचंद्राचार्य की अध्यक्षता में हुई। बैठक में निर्मोही अखाड़े ने रिव्यू याचिका न डालने का निर्णय लेते हुए सुप्रीम कोर्ट के अयोध्या मामले में दिए गए फैसले का स्वागत करते हुए निर्मोही अखाड़ा को भी अधिकार दिए जाने पर आभार जताया। वहीं दूसरी तरफ निर्मोही अखाड़ा द्वारा रिव्यू याचिका न डालने के निर्णय का अयोध्या के संत समाज सहित विहिप ने भी स्वागत किया है।
संतों ने कहा कि निर्मोही अखाड़ा ने यह निर्णय लेकर सौहार्द का नया संदेश दिया है। रामनगरी में अब विवाद नहीं बल्कि दिव्य-भव्य राममंदिर चाहिए। इतने वर्षों का विवाद अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अपने आप समाप्त हो चुका है। वहीं विहिप ने भी निर्मोही अखाड़ा की सराहना करते हुए कहा कि रामभक्तों के कार्य का विभाजन नहीं होना चाहिए, उनका निर्णय स्वागत योग्य है।
महंत कमलनयन दास ने कहा कि निर्मोही अखाड़े का कदम सराहनीय है। कोर्ट ने जो फैसला सुनाया है वह अति प्रशंसनीय है। अब ट्रस्ट निर्माण पर सभी की निगाहें टिकी हुईं हैं। ऐसे में किसी नए विवाद की कोई जरूरत नहीं है। हम सबको दिव्य-भव्य राममंदिर निर्माण के लिए सहभागी बनना चाहिए। निर्मोही अखाड़े ने अपनी भूमिका के साथ न्याय किया है।
संत समिति अयोध्या के अध्यक्ष महंत कन्हैयादास रामायणी ने कहा कि रिव्य याचिका न डालने का निर्णय कर निर्मोही अखाड़ा ने अच्छा काम किया है। एक बार फिर सौहार्द को बल मिला है। सुप्रीम कोर्ट ने जो निर्णय दिया है वह ऐतिहासिक है। राममंदिर के लिए यह उनका अद्वितीय सहयोग माना जाएगा, निर्मोही अखाड़ा का त्याग अविस्मरणीय रहेगा।
दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इतना अच्छा फैसला दिया है कि अब रिव्यू की कोई गुंजाइश नहीं नजर आती। फिलहाल निर्मोही अखाड़ा ने रिव्यू याचिका न डालने का निर्णय लेकर अच्छा काम किया है। क्योंकि अब सभी को दिव्य-भव्य राममंदिर निर्माण का इंतजार है, इतने वर्षों बाद हमारे रामलला अब शीघ्र ही टेंट से आजाद होंगे।
अधिकारी श्रीरामबल्लभाकुंज राजकुमार दास कहते हैं कि निर्मोही अखाड़ा के निर्णय का स्वागत होना चाहिए। क्योंकि अब अयोध्या को और अधिक विवाद की जरूरत नहीं है बल्कि विकास की जरूरत है। निर्मोही अखाड़ा ने राष्ट्रहित में काम किया है। अयोध्या में अब तरक्की व रोजगार की बात होनी चाहिए राममंदिर निर्माण से पहले उसका परिवेश भी तैयार करना होगा।
पुजारी सत्येंद्र दास कहते हैं कि निर्मोही अखाड़ा का निर्णय स्वागत योग्य है। रामलला की लड़ाई राममंदिर के लिए ही थी यह आज के निर्णय से अखाड़ा ने साबित कर दिया है, उनका कोई स्वार्थ नहीं है। सुप्रीम कोर्ट से रामलला को विजय मिल ही चुकी है। इतनों दिनों बाद अब यह विवाद समाप्त हो चुका है, इसलिए सभी को राममंदिर निर्माण में सहयोग करना चाहिए।
विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने कहा कि निर्मोही अखाड़ा ने अच्छा कदम उठाया है। रामभक्तों के कार्य का विभाजन नहीं होना चाहिए। हम उनके इस कदम का सम्मान करते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने फैसले में निर्मोही अखाड़ा को अधिकार दिया है, हम भी मानते हैं कि निर्मोही अखाड़ा पूजा अर्चना करता रहा है। अब सबकी कामना भव्य राममंदिर निर्माण की है।
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पाबंदियों के बीच सूख गई राम की पैड़ी

अयोध्या। दीपोत्सव में आकर्षण का केंद्र रही राम की पैड़ी दीपावली समाप्त होने के बाद से ही अपने पुराने रूप में आ चुकी है। पैड़ी के जलप्रवाह की अविरलता थम गई है, कीचड़ जम चुका है। कार्तिक परिक्रमा मेला फिर अयोध्या विवाद में आए फैसले के बाद से ही पाबंदियों के चलते राम की पैड़ी सूख गई। अफसर भी दीपोत्सव के बाद से ही विकास कार्यों को लेकर लापरवाह बने हुए हैं। राम की पैड़ी के दूसरे फेज के काम के लिए गड्ढा खोदकर छोड़ दिया गया है, पंप हाउस में ताला लटका नजर आया।
दीपोत्सव में राम की पैड़ी को अविरल बनाने के लिए शासन-प्रशासन ने जहां पूरी ताकत झोंक दी थी वहीं दीपोत्सव समाप्त होने के बाद एक बार फिर राम की पैड़ी सूख गई, अविरल जल प्रवाह थम चुका है, अफसर लापरवाह बने हैं। अधूरे निर्माण कार्य का आइना दिखा रही है राम की पैड़ी। दीपोत्सव के वक्त छोड़ा गया पानी अब दूसरे छोर से वापस घूमकर नदी की ओर लौट चुका है पंप बंद हैं, पैड़ी सूख चुकी है, क्योंकि दूसरे फेज का काम थमा है और उसके अंतिम छोर को सुंदरीकरण का इंतजार है।
दीपोत्सव में राम की पैड़ी पर पंप हाउस की स्थापना कर पंपों की क्षमता बढ़ा दी गई थी। पंपों की क्षमता 40 क्यूसेक से बढ़कर 240 क्यूसेक कर दी गई थी। दीपोत्सव से पूर्व मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव गृह सहित अन्य आला अधिकारियों की मौजूदगी में राम की पैड़ी के अविरल जल प्रवाह की टेस्टिंग भी की गई थी। राम की पैड़ी में राम की पैड़ी अविरल रूप से प्रवाहित होती रही।
बच्चे पैड़ी के पानी में स्नान कर आनंद उठा रहे थे तो पैड़ी स्वच्छ व सुंदर नजर आ रही थी लेकिन इस बीच कार्तिक परिक्रमा मेला व अयोध्या मामले में फैसले आने के बाद से ही शुरू हुई पाबंदियों के चलते राम की पैड़ी के दूसरे फेज का काम बंद हो गया। दीपोत्सव के वक्त छोड़ा गया पानी अब दूसरे छोर से वापस घूमकर नदी की ओर लौट चुका है पंप बंद हैं, पैड़ी सूख चुकी है, फिर से पुरानी स्थिति में गंदा नाला के रूप में पैड़ी नजर आ रही है।
नगर विधायक वेद प्रकाश गुप्ता कहते हैं कि राम की पैड़ी का सुंदरीकरण व अविरल जल प्रवाह शासन की प्राथमिकताओं में हैं। राम की पैड़ी के सुंदरीकरण की कार्यों में अफसरों द्वारा जो लापरवाही बरती जा रही है उसकी शिकायत वे मुख्यमंत्री से भी करेंगे। उन्होंने कहा कि पैड़ी की स्थिति का निरीक्षण उनके द्वारा किया जाएगा इसके बाद मुख्यमंत्री का अवगत कराते हुए लापरवाही अफसरों पर कार्रवाई की मांग की जाएगी।
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कुएं में मिला लापता किशोर का शव

अयोध्या। रौनाही थाना अंतर्गत पिलखावां के मजरे जमुनिया बाग निवासी गुरुवार शाम से लापता किशोर का शव घर के पास ही आबादी के बीच कुएं से बरामद हुआ। मौके पर पहुंची रौनाही पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। किशोर के परिवारजनों ने हत्या की आशंका जताई है।
पिता सत्यनाम पाठक के ननिहाल में रहकर खेती-बाड़ी की देखरेख कर रहा किशोर धीरज (17) गुरुवार शाम लगभग साढ़े सात बजे किसी काम से घर से निकला था लेकिन देर तक नहीं लौटा। परिवारजनों ने काफी खोजबीन किया, लेकिन पता न चलने पर थाने में गुमशुदगी दर्ज करा दी। पुलिस ने मामला दर्ज तो किया लेकिन कोई खोजबीन नहीं की।
रविवार की सुबह किशोर का शव गांव में ही घर से कुछ दूर आबादी के बीच बने एक कुएं में मिला। शव मिलते ही गांव में कोहराम मच गया। अपने तीन भाइयों में सबसे छोटे धीरज के परिवारीजन गोंडा जनपद के बेलसर के निवासी हैं। प्रभारी निरीक्षक दीपेंद्र सिंह ने बताया कि किशोर के परिवारजनों ने हत्या की आशंका जताई है। किशोर के मोबाइल की तलाश सहित मामले की छानबीन की जा रही है। शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।
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