ऑफिस में वीसी नहीं, कर्मचारी घूमते रहे बाहर

न्यूज डेस्क, अमर उजाला अयोध्या Updated Tue, 19 Mar 2019 12:14 AM IST
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ये अयोध्या-फैजाबाद विकास प्राधिकरण का कमरा है। 10 बजकर 30 मिनट तक कुर्सी खाली पड़ी है।
ये अयोध्या-फैजाबाद विकास प्राधिकरण का कमरा है। 10 बजकर 30 मिनट तक कुर्सी खाली पड़ी है। - फोटो : अमर उजाला

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सरकार की लाख कवायदों के बाद भी दफ्तरों को बुरा हाल है। अधिकारी व कर्मचारी समय से कार्यालय नहीं पहुंच रहे हैं। इसका असर विकास योजनाओं व जनता के वादों पर पड़ रहा हैं। ‘अमर उजाला की टीम’ ने सोमवार सुबह 10 बजे अयोध्या-फैजाबाद विकास प्राधिकरण का रियलिटी चेक किया है। इसमें अधिकारी व कर्मचारियों के कमरे खाली रहे। अधिकारियों के न होने के कारण कर्मचारी बाहर खड़े होकर आपस में बातें कर रहे थे।
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जैसे की फोटो खींचना शुरू हुआ। कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। पहले तो कई कर्मचारियों ने लपक कर क्यों फोटो खींच रहे हो का सवाल खड़ा किया। बाद में रियलिटी चेक की बात सामने आने पर अपने-अपने कमरों की ओर तेजी से भागे। हालत यह रही रियलिटी चेक के दौरान ऑफिस में एक भी अधिकारी नहीं था। वैसे भी प्राधिकरण में अधिकारियों का टोटा है।
सचिव व मुख्य अभियंता की कुर्सी अभी भी खाली है। समस्त कार्य वीसी और सहायक अभियंता की देखरेख में हो रहा है। इसके बाद भी अधिकारी समय से ऑफिस नहीं आ रहे हैं। प्राधिकरण में बड़ी संख्या में वाद लंबित पड़े हैं। पटलों पर कार्य न होने के कारण बार-बार लोगों को प्राधिकरण का चक्कर लगाना पड़ रहा है।
अयोध्या-फैजाबाद विकास प्राधिकरण ने अपने कर्मचारियों को नियत समय से कार्यालय आने के लिए बायोमीट्रिक मशीन लगा रखी है। इसका मकसद है कि कर्मचारी व अधिकारी ऑफिस सही समय पर पहुंचकर अंत तक कार्य को निपटाएं लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है। सुबह के 10 बजकर 23 मिनट तक तमाम कर्मचारी व अधिकारी ऑफिस ही नहीं पहुंचे थे।

यह सहायक अभियंता का कमरा है। समय 10 बजकर 24 मिनट तक सहायक अभियंता कमरे में नहीं बैठ पाए हैं हालांकि इनके ऊपर पूरे अयोध्या व फैजाबाद के विकास कार्यों का जिम्मा है। मुख्य अभियंता की अनुपस्थिति में सारे कार्य यही देख रहे हैं लेकिन 10 बजकर 30 मिनट के बाद तक भी यह ऑफिस नहीं आ सके थे।

यह कमरा अयोध्या-फैजाबाद विकास प्राधिकरण के वित्त अधिकारी का है। मार्च का महीना चल रहा है। समस्त सरकारी विभागों में वित्त अधिकारी पर बोझ बढ़ा हुआ है कि किस प्रकार विभागीय खर्चे को पूर्ण कर वित्तीय वर्ष की क्लोजिंग करनी है। लेकिन ऐसा विकास प्राधिकरण में नहीं देखा गया। वित्त अधिकारी की कुर्सी सुबह के 10 बजकर 24 मिनट तक खाली रही।

समय 10 बजकर 25 मिनट, यह कमरा जूनियर इंजीनियरों का है। बाहर लगे बोर्ड पर जेपी नरायण व विभूति पुंडीर लिखा है। इन जूनियर इंजीनियरों पर विकास प्राधिकरण का पूरा दारोमदार है, लेकिन जूनियर इंजीनियर जब समय से ऑफिस पहुंचे तब ही काम शुरू हो पाएगा। प्राधिकरण के कई कर्मचारियों ने बताया कि दोनों जूनियर इंजीनियर अभी तक ऑफिस नहीं आए हैं।

यह कमरा प्राधिकरण के जेई कक्ष की कार्यशाला के रूप में प्रयोग होता है। सुबह के 10 बजकर 26 मिनट पर पूरा कमरा खाली था। पूछताछ पर पता चला कि एक दो जेई आए हुए हैं, कहीं बाहर निकले हैं। बाकी अन्य जेई अभी तक नहीं आए हैं। बता दें कि प्राधिकरण की कॉलोनियों की हालत बहुत बदतर है। बड़ी संख्या में शहर में बिना नक्शे के मकान बने हैं।

यह विकास प्राधिकरण का नियोजन विभाग है। प्राधिकरण का नियोजित विकास इसी विभाग के जिम्मे है। 10 बजकर 28 मिनट के बाद भी यहां दो कर्मचारियों के अलावा अन्य कर्मचारी नदारद थे। हालत यह है कि पांच महीने से शहर के मास्टर प्लान के लिए एजेंसी का टेंडर होना है लेकिन अभी तक टेंडर रिलीज नहीं हो सका है।

यह अयोध्या-फैजाबाद विकास प्राधिकरण का कमरा है। 10 बजकर 30 मिनट हो गए हैं। अभी तक कुर्सी खाली पड़ी है। जबकि इनके खुद के कमरे के बाहर जनता से मिलने का समय सुबह 10 से 12 तक लिखा हुआ है। ऐसे में अगर अधिकारी खुद ही मौके पर नहीं रहे तो जनता मिलेगी किससे, यह प्रदेश सरकार की किरकिरी कराने के लिए काफी है।

समय 10 बजकर 32 मिनट , यह विकास प्राधिकरण के ग्राउंड लेवल पर बना भूमि अर्जन व वाद विभाग है। प्राधिकरण के नव्य अयोध्या व प्रधानमंत्री आवास जैसी बड़ी योजना के बाद भी भूमि अर्जन विभाग में ताला लटका हुआ है। यही हाल वाद विभाग का भी है। बड़ी संख्या में शिकायतों का निस्तारण न होने के बाद भी विभाग में ताला लटका हुआ है।

अयोध्या-फैजाबाद विकास प्राधिकरण के वीसी ओम प्रकाश राय ने बताया कि बीती रात्रि अयोध्या-फैजाबाद विकास प्राधिकरण के दो लिपिक मुकेश दूबे व बृजेश एक शादी समारोह से लौट रहे थे। इनको एक स्कार्पियो ने टक्कर मार दी। यह दोनों कर्मचारी हॉस्पिटल में भर्ती थे, इन्हीं को देखने मैं और स्टाफ के अन्य कर्मचारी गए हुए थे। 11 बजे के आसपास सभी कर्मचारी वापस लौट आए।
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