राममंदिर सहमति से बने तो सबसे अच्छा : नाईक

फैजाबाद Updated Fri, 03 Nov 2017 10:54 PM IST
Ram temple becomes best with consent: Naik
अवध विश्वविद्यालय के 22वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते राज्यपाल राम नाईक। - फोटो : अमर उजाला
फैजाबाद। प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने कहा है कि राममंदिर मामले का अंतिम निर्णय सर्वोच्च न्यायालय करेगा। यदि सर्वोच्च न्यायालय के पहले दोनों पक्षों का कोई इकट्ठा मत हो जाता है तो बहुत बढ़िया है। फैसले से पहले कोई सहमति बन जाती है तो सबको अच्छा लगेगा। 

वे शुक्रवार को अपराह्न डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के  दीक्षांत समारोह में 89 मेधावियों को कुलाधिपति व कुलपति गोल्ड मेडल से नवाजने के बाद जाते वक्त थोड़ी देर के लिए मीडिया के मुखातिब हुए। राममंदिर मामले को बातचीत से सुलझाने के लिए चल रहे प्रयासों पर राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि मैं यह सब देख रहा हूं, देखना ही मेरा काम होता है।

मुझे ऐसा लगता है कि जिस प्रकार की गतिविधियां चल रही हैं, इसका अंतिम निर्णय तो सर्वोच्च न्यायालय करेगा, सर्वोच्च न्यायालय के पहले यदि दोनों पक्षों का कोई इकट्ठा मत हो जाता है तो बहुत बढ़िया है। लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का अनुपालन-पालन सबको करना चाहिए। मुझे ऐसा लगता है कि वही बात होगी। मगर उसके पहले कोई सहमति बन जाती है तो सबको अच्छा लगेगा। 

दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि अवध विश्वविद्यालय में कुल 2 लाख 30 हजार 578 विद्यार्थियों में 44 फीसदी 1 लाख 24 हजार 949 छात्राएं हैं, जबकि 46 फीसदी 1 लाख 30 हजार 659 छात्र पढ़ते हैं। इसमें गोल्ड मेडल पाने वालों में 31 छात्र हैं, जबकि 58 छात्राएं हैं। सरकार के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान’ का असर दिख रहा है।

गोल्ड मेडल पाने वाली लड़कियां 65 फीसदी हैं। कहा कि अब महिलाएं अबला नहीं रहीं, जब मैंने 1954 में बीकॉम उत्तीर्ण किया तो डेढ़ सौ लोगों में सिर्फ चार महिलाएं थीं। राज्यपाल ने मेधावियों को संदेश देते हुए कहा कि जीवन की पढ़ाई खत्म, अब लड़ाई शुरू होगी। शपथ लेना आसान है लेकिन उसका पालन बहुत मुश्किल होता है।

मां-बाप और गुरु ने आप के पंखों में जान डाल दी है अब आप को तय करना है कि कितनी ऊंची उड़ान भरने की ख्वाइश रखते हैं। विज्ञान की प्रगति के साथ अपना हमेशा संबंध बनाए रखिए, तभी जीवन में मनमाफिक तरक्की मिलेगी। कहा कि डिग्री मिलने के बाद अब देश व समाज के लिए कुछ करने का वक्त आया है। कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। राज्यपाल ने ‘चलते रहो-चलते रहो’ का गुरुमंत्र दिया। 

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