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सहेजे जाएंगें विवादित ढांचे के नीचे खोदाई में मिले अवशेष

Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 04 Mar 2020 10:42 PM IST
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राम कथा संग्राहलय में सुरक्षित रखे गये खोदाई में मिले अवशेष
राम कथा संग्राहलय में सुरक्षित रखे गये खोदाई में मिले अवशेष - फोटो : FAIZABAD
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अयोध्या। छह दिसंबर 1992 की घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की ओर से कराई गई खोदाई के सभी अवशेषों को एएसआई के विशेषज्ञों के संरक्षण में अधिगृहीत परिसर में ही रखवाया गया है।
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जबकि राम चबूतरा निर्माण के दौरान की गई खोदाई में मिले अवशेषों को रामकथा संग्रहालय में संरक्षित किया गया है। अब चूंकि राममंदिर निर्माण शुरू होने जा रहा है ऐसे में खोदाई में मिले इन अवशेषों का भविष्य क्या होगा इस पर भी मंथन शुरू हो गया है। खोदाई में मिले अवशेषों को भी संरक्षित किए जाने की तैयारी है, रामजन्मभूमि परिसर में इनकी प्रदर्शनी भी लगाई जा सकती है।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की ओर से जीपीआर सर्वेक्षण टोजो विकास इंटरनेशनल कंपनी ने किया। फरवरी 2003 की रिपोर्ट में कहा गया कि वहां जमीन के अंदर कुछ इमारतों के 184 भग्नावशेष हैं।
इस रिपोर्ट पर मुकदमे के पक्षकारों की राय सुनने के बाद अदालत ने मार्च 2003 में सिविल प्रोसीजर कोड के तहत भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को आदेश दिया कि वह संबंधित विवादित परिसर (केवल उस स्थान को छोड़कर जहां दिसंबर 1992 में विवादित मस्जिद ध्वस्त होने के बाद से तंबू के अंदर भगवान राम की मूर्ति रखी है) की खोदाई करके खोजबीन करें। यह खोदाई दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों, वकीलों की मौजूदगी में हुई। एएसआई की टीम में भी दोनों समुदायों के 14 पुरातत्व विशेषज्ञ शामिल थे। खोदाई की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी होती रही।
जिले में तैनात दो जज प्रेक्षक के तौर पर उपस्थित रहे। खोदाई 12 मार्च से 7 अगस्त तक हुई थी। एएसआई की यह विस्तृत रिपोर्ट और फोटोग्राफ मुकदमे के सभी पक्षों के पास उपलब्ध थे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि खोदाई में 13वीं शताब्दी ईसा पूर्व तक के अवशेष मिले हैं। जो खंडहर खोदाई में मिले उनमें इतिहास के कुषाण और शुंग काल से लेकर गुप्त काल और प्रारंभिक मध्य युग तक के अवशेष हैं।
इन सभी पुरावशेषों को रामकथा संग्रहालय में संग्रहीत कराया गया है। वहीं विवादित ढांचे के नीचे खोदाई में मिले अवशेष मानस भवन में सुरक्षित रखे हैं। विहिप के प्रांतीय प्रवक्ता शरद शर्मा के अनुसार जुलाई 1992 में राम चबूतरे दौरान हुई खोदाई व समतलीकरण के दौरान व बाबरी ध्वंस के दौरान कई ऐसे अवशेष मिले जो मंदिर के हैं, इन्हें जरूर सहेजा जाएगा। वे कहते हैं कि खुदाई में ऐसे प्रस्तर खंड मिले हैं जो 17वीं शताब्दी के नागर शैली में निर्मित मंदिरों जैसे हैं।
रामकथा संग्रहालय में संरक्षित हैं ये अवशेष
-रामकथा संग्रहालय के आर्ट गैलरी तीन व दो में रामजन्मभूमि के अवशेषों को संरक्षित रखा गया है वे सभी अवशेष किसी प्राचीन मंदिर के ही है। संग्रहालय में रामजन्मभूमि से संबंधित संरक्षित वस्तुओं में शिशु धारिणी माता, कुबेर प्रतिमा, उमा-महेश्वर की खंडित प्रतिमा, वेलनाकार वस्तु, वरद मुद्रा में दाया हाथ, वेलन, विष्णु पट्ट का भागव, प्याला, नंदी की मूर्ति व मिट्टी के पात्र हैं। जबकि आर्ट गैलरी नंबर तीन में खोदाई के दौरान मिले बड़े-बड़े प्रस्तर खंड व शिखर के नीचे लगने वाला आमालक आदि प्रमुख रूप से शामिल हैं।
खोदाई में मिले सभी अवशेष हमारे लिए धरोहर हैं, इनको किस रूप में सहेजा जाएगा इस पर मंथन किया जा रहा है। अभी पहली प्राथमिकता राममंदिर निर्माण है। राममंदिर परिसर में इन अवशेषों को दर्शनीय रूप में सहेजने की योजना बनाई जाएगी।
चंपत राय, महासचिव, श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट

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