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अस्पताल में नदारद डॉक्टर, निजी डॉक्टरों पर आश्रित मरीज

Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 30 Sep 2020 11:09 PM IST
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भेलसर। सरकारी अस्पताल में चिकित्सक न मिलने के कारण घंटों इंतजार के बाद मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ता है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, खैरनपुर रुदौली में अधीक्षक सहित आधा दर्जन चिकित्सक व 40 संविदा एवं दो दर्जन कर्मचारी तैनात हैं।
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सीएचसी अंतर्गत ऐहार, शुजागंज व नगर की पीएचसी शामिल हैं। सीएचसी में ओपीडी में सुबह 8 से 2 बजे तक मरीजों को देखने का समय शासन द्वारा निर्धारित किया गया है। शासन द्वारा उपलब्ध कराई गई सुविधाओं की जमीनी हकीकत जानने के लिए अमर उजाला टीम बुधवार की सुबह 9 बजकर 10 मिनट पर पहुंची, जहां चिकित्सक सहित पैथोलॉजी कक्ष में ताला लटक रहा था।

कुछ चिकित्सक के कक्ष खुले मिले लेकिन वह नदारद रहे। दर्जनों मरीज चिकित्सकों के आने का इंतजार कर रहे थे। मरीजों का पंजीकरण किया जा रहा था। पूछने पर बताया गया कि चिकित्सक डॉ. फहीम रात्रि में इमरजेंसी ड्यूटी कर अभी गए हैं, महिला चिकित्सक डॉ अंजू जायसवाल प्रसूताओं का हाल पूछने के लिए कक्ष में गईं हैं। अधीक्षक जिला मुख्यालय पर जरूरी कार्य से गए हैं। डॉ. एचएल सरोज सर्जन दर्शन नगर कोविड अस्पताल में ड्यूटी पर हैं। अन्य चिकित्सक आने वाले ही हैं।
झलका मरीजों का दर्द, निजी अस्पतालों में इलाज कराना मजबूरी
अस्पताल में चिकित्सक का इंतजार कर रहे नरौली निवासी रामकुमार कहते हैं कि डेढ़ घंटे हो गए चिकित्सक अभी तक नहीं आए हैं, ऐसे में निजी चिकित्सक से इलाज कराना मजबूरी है। सैदपुर से आए मरीज हसन अहमद कहते हैं कि स्वास्थ्य व्यवस्था किसी से छुपी नहीं है। सब कुछ जानते हुए भी क्षेत्र के जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों का मौन रहना समझ से परे है।
बाबा बाजार से आए अतीश कुमार यादव ने बताते हैं कि पंजीकरण कराए हुए एक घंटा हो गया अभी तक कोई चिकित्सक नहीं आया है। अमराईगांव निवासी संजय कुमार कहते हैं कि इस कोरोना ने स्वास्थ्य सेवाएं ध्वस्त कर दी हैं। कोई चिकित्सक मरीज को देखना नहीं चाहता है। प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों को लूटा जा रहा है। ग्राम भेलसर निवासी इमरान अहंमद कहते हैं कि जनप्रतिनिधि भी व्यवस्था में सुधार के प्रति कोई जिम्मेदारी नहीं निभा रहे।
चिकित्सक अच्छी दवा देने के नाम पर मरीजों को बाहर की दवाएं लिखते हैं। ग्राम पस्तामाफी निवासी विकास कुमार सिंह कहते हैं कि सरकारी अस्पतालों में भले ही सरकार की तरफ से मुफ्त इलाज की सुविधा की गई हो, चिकित्सक व दवाओं को लेकर सरकार तो गंभीर है, लेकिन अस्पताल में तैनात चिकित्सकों की संवेदना मरीजों के प्रति न के बराबर रहती है।
माह में होती लगभग 200 डिलीवरी
सीएचसी खैरनपुर में प्रतिदिन 6 से 7 प्रसव पीड़ित महिलाओं की डिलीवरी कराई जाती है। यहां डिलीवरी के लिए तहसील क्षेत्र के विभिन्न गांवों से महिलाएं आती है। जरूरत पड़ने पर ऑपरेशन भी किया जाता है। यही कारण है कि यहां प्रसव पीड़ित महिलाएं भी अधिक आती हैं। कोरोना काल से पूर्व सीएचसी खैरनपुर में तहसील क्षेत्र के विभिन्न गांवों से 400 से 450 मरीज उपचार कराने के लिए प्रतिदिन आते थे। कोरोना काल में संख्या घटकर आधी हो गई है
कोरोना के कारण कुछ चिकित्सक घर चले जाते हैं इसलिए आने पर कुछ देर हो जाती है। कोरोना का कहर भी धीरे-धीरे कम हो रहा है। एक अक्तूबर गुरुवार से 10 से 4 बजे तक ओपीडी खुलेगी। अब व्यवस्था में भी सुधार हो जाएगी।
डॉ पीके गुप्ता, अधीक्षक, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, खैरनपुर रुदौली

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