‘भला दूल्हा बने श्रीराम लखन सहिवाला बने’

Faizabad Updated Mon, 01 Dec 2014 05:30 AM IST
ख़बर सुनें
अयोध्या। सरयू तट स्थित रामकथा पार्क में चल रहे चार दिवसीय 33वें रामायण मेला की अंतिम शाम सांस्कृतिक कार्यक्रमों से गुलजार रही। प्रदेश के विभिन्न शहरों से आए कलाकारों ने रविवार को गीत-संगीत व नृत्य की बेहतरीन प्रस्तुति कर दर्शकों पर अमिट छाप छोड़ी।
संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित सांस्कृतिक संध्या का उद्घाटन मुख्य अतिथि पालिकाध्यक्ष राधेश्याम गुप्त ने गोस्वामी तुलसीदास जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित करके किया। कार्यक्रम का शुभारंभ बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की प्रो. शारदा वेलनकर ने शास्त्रीय संगीत पर आधारित ठुमरी ‘कौन गली गयो श्याम’ की प्रस्तुति से किया। पहाड़ी राग में प्रस्तुत दादरा ‘सुंदर नारी गठरिया धरब कैसे’ के गायन से जहां सुर, ताल व लय की अविरल धारा सरयू तट पर श्रद्धालुओं में प्रवाहित होती रही, वहीं दूसरी ओर ‘वन चले राम रघुराई’ एवं भैरवी राग में प्रस्तुत तुलसी कृत भजन ‘भजु मनराम चरन सुखदाई’ से भक्तिभव को आत्मसात करता रहा। पं. किशोर मिश्र, पं. सुखदेव मिश्र, यमुना दास तथा सह गायिका शरुतिरानी ने बेहतरीन संगत देकर समां और बांध दिया।
बस्ती की कलाकार रंजना अग्रहरि ने सीता की स्तुति गान ‘कथा हम गायी सिय रघुराई’, बधाई गीत ‘चला देखि आई राम के चरन कैसे’, ‘लागल अयोध्या में मेला छोड़ा घरवा का झमेला’ की प्रस्तुति की। राम विवाहोत्सव के अवसर की प्रधानता के अनुसार हल्दी गीत ‘अब करहु सकल व्यवहार हल्दिया मंगलमय हो’ बन्ना गीत ‘भला दूल्हा बने श्रीराम लखन सहिवाला बने’, जयमाल गीत ‘ सियावर आए दुल्हिन के द्वार’ व ‘अवध में बाजे बधइयां’ की प्रस्तुति सराहनीय रही। सहयोगी कलाकार बबलू, सुनील, रावसन, गोपाल, सुषमा व रजनी रहे।
मेले के अंतिम दिन मुख्य आकर्षण वाराणसी के आलोक पांडेय व उनके दल द्वारा प्रस्तुत जानकी मंगल शीर्षक नृत्य नाटिका रही। इसमें रामचरितमानस की चौपाइयों से उद्धृत फुलवारी, गौरी पूजन, धनुष यज्ञ एवं परशुराम संवाद की झांकी की सजीव व आकर्षक प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कौशिक राय, आदीश पांडेय, अमित गुप्त, सौरभ त्रिपाठी, सचिन गुप्त, दिव्या श्रीवास्तव, स्वाति आत्मनाथन, महिमा सिंह, एकता का अभिनय सराहनीय रहा। जिले के लोकगायक शीतला प्रसाद वर्मा व उनके दल द्वारा अवधी शैली में फरवाही लोकनृत्य प्रस्तुत किया गया। पारंपरिक पोशाक व वेशभूषा में कलाकारों ने कलाबाजी व करतबों के साथ विवाह की मनमोहक झांकी प्रस्तुत की। अवधी लोकगीत ‘राजा जनक की सुंदर बिटियवा से ब्याहन चले श्रीराम हो’ तथा ‘हमारी गली में दूल्हे बन के आना’ एवं ‘ओढ़ के चुनरिया सीता सोचै अपने मन मा हे बैरहिया बन के ना’ की प्रस्तुति में कलाकारों का उल्लास छलकता दिखाई दिया। अंतिम प्रस्तुति में बलिया के कलाकार गोपाल राय ने भोजपुरी रंग से सराबोर कर दिया। कार्यक्रम के अंत में संस्कृति विभाग की नोडल अधिकारी व उपनिदेशक डॉ. वीना विद्यार्थी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

Spotlight

Most Read

Lucknow

कैराना व नूरपुर उपचुनाव में भाजपा की मुश्किलें बढ़ाने आया एक और 'खिलाड़ी', सपा-रालोद का देगा साथ

कैराना और नूरपुर में हो रहे उपचुनाव में सपा-रालोद को भाजपा के खिलाफ एक और साथी मिल गया है। ऐसे में भाजपा की राह और मुश्किल हो सकती है।

23 मई 2018

Related Videos

VIDEO: टैंपो में बैठने को लेकर हुआ विवाद, दबंगों ने पुलिसकर्मी को धुना

एक तरफ आए दिन सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश पुलिस की व्यवस्था को बनाए रखने के मामले में तारीफें की जाती हैं तो दूसरी और तस्वीरें सामने आती हैं कि मामूली सी बात पर हुए विवाद में लोग पुलिसकर्मी को ही पीटने लगे।

3 अप्रैल 2018

अमर उजाला ऐप चुनें

सबसे तेज अनुभव के लिए

क्लिक करें Add to Home Screen