सामूहिक नकल पकड़े जाने पर कटेंगे 20 फीसदी नंबर

Faizabad Updated Tue, 26 Nov 2013 05:42 AM IST
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फैजाबाद। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय की परीक्षाओं में अब नकल पर काफी हद तक अंकुश लगेगा। ऐसा इसलिए कि विवि की परीक्षा व्यवस्था हाईटेक होने जा रही है। परीक्षा देने वाले छात्रों से न सिर्फ ऑनलाइन परीक्षा फॉर्म भरवाए जाएंगे, बल्कि सामूहिक नकल पकड़े जाने पर 20 फीसदी अंक भी कटेंगे। इतना ही नहीं परीक्षा से ‘बी’ उत्तर पुस्तिका का सिलसिला भी खत्म होगा और नकल की स्थिति में कॉलेजों पर सख्त कार्रवाई होगी। दरअसल, विवि ने ‘नासूर’ बन चुकी नकल पर नकेल कसने के लिए परीक्षा प्रणाली को ऑनलाइन करने का फैसला लिया है। यह चालू शैक्षिक सत्र 2013-14 से ही बदल दी जाएगी। कुलपति प्रो. पीसी त्रिवेदी की इस रणनीति पर परीक्षा समिति ने भी अपनी मुहर लगा दी है।
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सितंबर में अवध विवि की कमान संभालने के चंद दिनों बाद गोरखपुर विवि के कुलपति प्रो. पीसी त्रिवेदी ने नकल पर रोकथाम के लिए परीक्षा व्यवस्था को बदलने की रणनीति तैयार की थी। उन्होंने इस दिशा में विवि अधिकारियों व शिक्षकों से व्यापक मंत्रणा की। जिसके बाद परीक्षा प्रणाली को आधुनिकता का अमलीजामा पहनाने की तैयारियां शुरू हुईं। बीते माह हुई परीक्षा समिति की बैठक में भी इस पर मुहर लगा दी गई। विवि के परीक्षा नियंत्रक कैलाशनाथ सिंह बताते हैं कि समिति के निर्णय के बाद इस पर तेजी से कार्य शुरू हो गया है। उन्होंने बताया कि कुलपति के निर्देशानुसार इसी शैक्षिक सत्र 2014 से मुख्य परीक्षा के स्वरूप में आमूलचूल परिवर्तन हो जाएगा। इस माह के अंत तक ऑनलाइन परीक्षा आवेदन फॉर्म उपलब्ध करा दिए जाएंगे। मुख्य परीक्षा में प्रश्नोत्तर के लिए परीक्षार्थियों को मात्र ‘अ’ उत्तर पुस्तिका दी जाएगी, जो 32 पेज की होगी। अब परीक्षा में ‘बी’ उत्तर पुस्तिका नहीं मिलेगी। छात्रों को प्रश्नों के उत्तर निर्धारित संख्या में देने होंगे। प्रश्न पत्र में इसका उल्लेख होगा। प्रश्न पत्र का प्रारूप अध्ययन परिषद की ओर से तय होगा। इसका निर्धारण हो जाने के बाद यह विवि की वेबसाइट पर उपलब्ध हो जाएगा। छात्रों को दी जाने वाली उत्तर पुस्तिका का पहला पृष्ठ ‘ओएमआर’ पैटर्न पर आधारित होगा। जैसा प्रतियोगी परीक्षाओं में मिलता रहा है। इसमें भरे जाने वाले विवरण की जांच कंप्यूटर के जरिए ‘आप्टिकल मार्क रीडर’ सरीखी होगी। यही नहीं सामूहिक नकल पकड़े जाने पर परीक्षार्थी के प्राप्तांक में से 20 फीसदी अंक काटे जाएंगे और परीक्षा केंद्रों/कॉलेजों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के अलावा अर्थदंड भी लगाया जाएगा। प्रायोगिक परीक्षाएं, मुख्य परीक्षा के पहले संपन्न कराई जाएंगी। इसके लिए तीन वाह्य परीक्षकों के नाम महाविद्यालय को दिए जाएंगे। समय से प्रायोगिक परीक्षा नहीं कराने वाले कॉलेजों पर 20 हजार रुपये प्रति परीक्षा की दर से अर्थदंड लगेगा। परीक्षा नियंत्रक ने बताया कि परीक्षा व्यवस्था में बदलाव होने के उपरांत कॉलेज अनुमोदित सीटों से अधिक छात्रों का प्रवेश नहीं ले सकेंगे। यदि अधिक प्रवेश ले भी लेंगे, तो उन्हें परीक्षा आवेदन पत्र नहीं उपलब्ध होगा। इस स्थिति में कॉलेज व छात्र जिम्मेदार होंगे।
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