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सहायक चकबंदी अधिकारी पर केस

Faizabad Updated Tue, 26 Mar 2013 05:30 AM IST
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फैजाबाद। चकबंदी अहलकारों की मिलीभगत से फर्जी अमलदरामद कराकर जमीन हड़प ली गई। मामले की जांच के बाद एसडीएम बीकापुर व मुख्य राजस्व अधिकारी ने एफआईआर दर्ज करने की संस्तुति की लेकिन सफेदपोशों के दबाव में केस नहीं हुआ। एफआईआर दर्ज नहीं हुई। अब अदालत ने बीकापुर के सहायक चकबंदी अधिकारी समेत छह लोगों के नाम एफआईआर दर्ज करने का आदेश नगर कोतवाल को दिया है। मामले की विवेचना की जद में एसओसी न्यायालय व अन्य चकबंदी अहलकारों भी हैं। इनको भी आरोपी बनाया गया है। मामला बीकापुर तहसील के गांव मिझौली किशुनदासपुर में पौने तीन बीघे भूमि का है।
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अधिवक्ता गौतम पांडेय ने बताया कि अदालत में मामले की अर्जी इसी गांव के प्रधान राम कलप गौड़ ने दी थी। अर्जी में कहा था कि गांव की ग्राम समाज की संपत्ति को सुल्तानपुर जिले के राम स्वरूप को वर्ष 1975 में पट्टे पर दिया गया था। रामस्वरूप की 11 दिसंबर 2002 में मौत हो गई। यह जमीन अभी भी उसी के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज है।
गांव के राम अचल वर्मा ने तत्कालीन सहायक चकबंदी अधिकारी के साथ साजिश रचकर जीवित रामस्वरूप कोे मृत दिखा फर्जी दस्तावेज तैयार कर लिए। जिसका दाखिल खारिज का आदेश अपने चचेरे साले जगराम निवासी रुदौलिया खुशहालगंज थाना महराजगंज के नाम 16 अक्तूूबर 1991 को करा लिया।
गांव की कलावती ने इस बात की गवाही दी कि जगराम, राम स्वरूप का भांजा है। जबकि जगराम वर्मा और राम स्वरूप पाल बताए गए हैं। तत्कालीन सहायक चकबंदी अधिकारी ने यह आख्या दी कि रामस्वरूप नि:संतान है। उनके आदेश के खिलाफ अपील एसओसी की अदालत में हुई जहां सुनवाई के बाद अदालत ने सहायक चकबंदी अधिकारी का आदेश निरस्त कर दिया। इस आदेश को निरस्त करने के लिए जगराम ने बाजदायर की अर्जी दी। यह अर्जी उसकी गैरहाजिरी में खारिज कर दी गई।
इसके बाद एक और जालसाजी की गई सुल्तानपुर जिले के सुरेंद्र प्रकाश सिंह को रामस्वरूप का मुख्तार खास बनाकर पेश किया गया और कहा गया कि रामस्वरूप अपील नहीं लड़ना चाहते उससे निरस्त कर दिया जाए।
इसके बाद अपील निरस्त करने का आदेश हुआ और जगराम ने अपने नाम दाखिल खारिज का आदेश करवा लिया। शिकायत पर इसकी जांच रजिस्ट्रार कानूनगो, एसडीएम बीकापुर, व मुख्य राजस्व अधिकारी ने की और रिपोर्ट दर्ज करवान की संस्तुति भी की लेकिन अभी तक रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। इसके बाद प्रधान ने सीजेएम की अदालत में प्रार्थना दिया। जिस पर यह आदेश हुआ।
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