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चोरी खुलने के बाद भी नहीं जमा हुआ टैक्स

Faizabad Updated Wed, 13 Feb 2013 05:30 AM IST
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फैजाबाद। वाणिज्य कर फैजाबाद जोन के बलरामपुर जिले में तैनात एसआईबी अफसर अपनी मनमानी करने पर तुले हैं। आलम यह है कि बलरामपुर चीनी मिल्स ग्रुप के दो डिवीजनों में करोड़ों के प्रवेश कर की चोरी उजागर हो जाने के बाद भी अधिकारी किसी कार्रवाई से गुरेज कर रहे हैं। इतना ही नहीं चालू वित्तीय वर्ष में उक्त दोनों डिवीजनों ने अब तक कितनी नॉन लेवी चीनी की प्रांतीय बिक्री की है, इसकी भी जानकारी विभाग को हासिल नहीं हो पाई है।
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मालूम हो कि जोन के बलरामपुर जिले में पंजीकृत बलरामपुर चीनी मिल्स ग्रुप लिमिटेड के दो डिवीजनों कुंभी (लखीमपुर) व गुलरिया (बहराइच) ने चीनी प्रोत्साहन नीति-2004 के दायरे से बाहर होने के बावजूद नॉन लेवी चीनी की प्रांतीय बिक्री पर बीते चार वित्तीय वर्ष (2009-10, 10-11, 11-12 व 12-13) से कोई प्रवेश कर वाणिज्य कर विभाग में नहीं जमा कराया। अलबत्ता, तीन वित्तीय वर्षों (2009-10, 10-11 व 11-12) में इन डिवीजनों ने प्रदेश के व्यापारियों को लगभग 840 करोड़ की चीनी बेची है। जिसमें से विभाग को दो प्रतिशत की दर से 16.80 करोड़ रुपये का प्रवेश कर मिलता। मौजूदा वित्तीय वर्ष में हुई बिक्री की सूचना अभी विभाग को नहीं मिली है, पर अभी तक की बिक्री करीब सौ करोड़ के आसपास आंकी जा रही है। नियमानुसार चीनी प्रोत्साहन नीति-2004 का लाभ न लेने वाली चीनी मिलों को नॉन लेवी चीनी की प्रांतीय बिक्री पर दो प्रतिशत की दर से विभाग को प्रवेश कर चुकाना होता है। वैसे, प्रवेश कर अधिनियम-2007 की धारा-12(1), 12 (3) व 12 (5) के अनुसार निर्माता को नॉन लेवी चीनी की बिक्री पर क्रेता से दो प्रतिशत की दर से प्रवेश कर काटकर विभाग में जमा कराना होता है। उक्त दोनों डिवीजनों ने ऐसा नहीं किया। नतीजतन, अब प्रवेश कर समेत ब्याज व जुर्माना भी जमा कराना होगा। चार वित्तीय वर्षों से प्रवेश कर जमा न होने के बावजूद बलरामपुर संभाग के विशेष अनुसंधान शाखा अफसरों ने दोनों डिवीजनों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की, जबकि इसके लिए फैजाबाद जोन के एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-एक यूपी सिंह नेे कई बार मौखिक व लिखित दिशा-निर्देश भी दिए। दिलचस्प तो यह रहा कि किसी कार्रवाई के बजाय ज्वाइंट कमिश्नर एसआईबी पंकज कुमार बलरामपुर चीनी मिल्स ग्रुप के अन्य सात डिवीजनों के साथ कुंभी व गुलरिया के भी चीनी प्रोत्साहन नीति-2004 के दायरे में होने की झूठी सूचना देते रहे। जबकि ये दोनों डिवीजन नीति समाप्त हो जाने के बाद वर्ष 06-07 मेें स्थापित हुए थे। उधर सूत्रों का कहना है कि बलरामपुर के ज्वाइंट कमिश्नर एसआईबी पंकज कुमार ने तीन वित्तीय वर्षों में उक्त दोनों डिवीजनों ने प्रदेश के किस व्यापारी को कितनी नॉन लेवी चीनी बेची है, इसका सिलसिलेवार ब्योरा ई-मेल के जरिए जरूर उपलब्ध कराया, लेकिन कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं। इस संबंध में जोन प्रभारी अपर आयुक्त प्रथम उमेश प्रताप सिंह कहते हैं कि अब कार्रवाई मुख्यालय से एडिशनल कमिश्नर (विधि) से होनी है। इसलिए उन्हें कुछ मालूम नहीं है।

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