अशफाक उल्‍लाह की शहादत याद कर नम हुईं आंखें

Faizabad Updated Thu, 20 Dec 2012 05:30 AM IST
फैजाबाद। शहीद दिवस पर जेल परिसर में अशफाक उल्ला के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए बुधवार को मेला लगा और विचार गोष्ठी हुई। सन् 1927 में इसी तारीख को अंग्रेजों ने भारत मां के लाड़ले सपूत को इसी स्थान पर फांसी के फंदे पर लटकाया था। वक्ताओं का दर्द शहीदों के प्रति खूब छलका। कहा गया, शहीदों का अरमान था, उनकी कुर्बानी के बाद देश आजाद होगा। भारत में खुशहाली आयेगी। लोगों ने शहीदों के अरमानों को पूरा करने के बजाय चकनाचूर ही किया है। आज हम उन्हें श्रद्धांजलि देने के काबिल नहीं हैं। मुख्य अतिथि प्रख्यात कवि व भाषा संस्थान के अध्यक्ष गोपालदास नीरज ने गजलों और गीतों के माध्यम से अपनी वेदना व्यक्त की। कहा, ‘जब राम-रहीम एक हैं, सारा संसार एक है तो हिन्दू-मुसलमान का झगड़ा क्यों है? इसलिए कि आदमी खुद को पहचान नहीं रहा है। हम सो गये हैं। शब्द का अर्थ जानते नहीं’, कहते हैं-‘आदमी हूं आदमी से प्यार करता हूं।’ ऐसा झूठ क्यों बोल रहे हैं, इसे सोचना होगा। देश की दुर्दशा पर कहा- ‘हाय ये कैसा मौसम आया, पक्षी गाना भूल गये, बुलबुल भूली गजल, पपीहे प्रेम तराना भूल गये। जाने हवा चली ये कैसी, कैक्टस उगे गुलाबों में, आग लगाना याद रहा, आग बुझाना भूल गये।’ युवाओं को सचेत करते हुए कहा- ‘वक्त के हाथ में पत्थर भी है और फूल भी, आस फूलों की है तो चोट भी खाते रहिए।’ साकेत महाविद्यालय के प्राचार्य वीएन अरोरा की अध्यक्षता, शायर सलाम जाफरी और देशदीपक मिश्र के संयुक्त संचालन में हुए कार्यक्रम की शुरुआत सर्वधर्म प्रार्थना, शहीद अशफाक को पुलिस की सलामी तथा डीएम अजय कुमार शुक्ल द्वारा माल्यार्पण से हुई। सजपा के प्रदेश अध्यक्ष अशोक श्रीवास्तव ने कहा, देश एक बार फिर फिरंगियों के हाथों सौंपे जाने की ओर बढ़ रहा है। नगर विधायक तेजनारायण पांडेय पवन ने अशफाक उल्ला खां परिसर को सुधारने के साथ सुंदर बनाने का वायदा किया। मंत्री अवधेश प्रसाद ने मंत्रिमंडल के माध्यम ऐसी व्यवस्था कराने का वायदा किया, जिससे हमेशा जेल में होने वाले आयोजन को धन मिलता रहे। सुधाकर अदीब ने कहा- देशरत्न की छाया में ‘माटी रतन’ सम्मान पाना बहुत बड़ा सौभाग्य है। इकबाल मुस्तफा बोले, जो मां से प्रेम करता है, वही मादरे वतन पर शहीद होता है। ऐसे लोग मरते नहीं। गोष्ठी को वरिष्ठ पत्रकार शीतला सिंह ने भी संबोधित किया। अशफाक उल्ला खां मेमोरियल शहीद शोध संस्थान के प्रबंध निदेशक सूर्यकांत पांडेय ने कहा, सरकारें ऐसे लोगों के नाम पर पुरस्कार दे रही हैं, जिन्होंने देश को बांटने का काम किया है। जमुना सिंह, अधिवक्ता आफताब रजा रिजवी आदि ने भी विचार रखे। इस दौरान संस्थान की पत्रिका माटी रतन का विमोचन भी किया गया।

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