सरयू के समानांतर वाद्य, गीत और नृत्य की त्रिवेणी

Faizabad Updated Tue, 18 Dec 2012 05:30 AM IST
अयोध्या। रामकथा पार्क में सरयू के समानांतर वाद्य, गीत और नृत्य की त्रिवेणी भी प्रवाहित हुई। मौका, 31वें रामायण मेला की प्रथम सांस्कृतिक संध्या का था।
पहली प्रस्तुति लखनऊ स्थित राष्ट्रीय कथक संस्थान के कलाकारों की रही। शुरुआत नृत्य झनकार से हुई। कलाकारों ने नृत्य को अनुष्ठान के रूप में पल्लवित करते हुए गणेश परन के साथ प्रस्तुति का क्रम आगे बढ़ाया। इस प्रस्तुति में लोक और शास्त्रीय नृत्य की अनेक विधाएं संयोजित कर कलाकारों ने कौशल के नए-नए आयामों से परिचित कराया। तदुपरांत पारंपरिक बंदिश घूंघट में नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को विभोर किया। इन प्रस्तुतियों में आकांक्षा, संध्या, मनीषा, आकृति, स्मृति, दर्शिता की प्रमुख भूमिका रही। नृत्य परिकल्पना सरिता श्रीवास्तव की रही व निर्देशन राजेंद्र गंगानी ने किया।
कार्यक्रम की दूसरी प्रस्तुति राजस्थान से आये जगदीश पंचोरिया व उनके साथियों के नाम रही। शुरुआत भवई नृत्य से हुई। अकाल के दौरान सिर पर खाली घड़ा रखकर चलते लोगों की संतप्त किंतु आशावादी मनोदशा को मनोहारी प्रस्तुति के साथ प्रस्तुत होते देखना शानदार रहा। कील, नंगी तलवार व आग पर नृत्य करते हुए जगदीश ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। आगे राजस्थान का पारंपरिक घूमर नृत्य प्रस्तुत करते हुए कलाकारों ने राजस्थान की छटा बिखेरी। राजस्थानी कलाकारों की अंतिम प्रस्तुति सपेरों का नृत्य कालबेलिया रही।
मुंबई से आये गायक प्रेमप्रकाश दुबे ने भजन के साथ कार्यक्रम को नया आयाम दिया। मंगल भवन अमंगल हारी, सरयू तट पर बसी अयोध्या यहां के राजा राम, चलो सखि देखी राम बने दूल्हा जैसे बोल पर भजन प्रस्तुत करते हुए दुबे ने जमकर समां बांधा।
समापन से पूर्व रजिस्ट्रीकरण अधिकारी डॉ. एपी गौड़ ने आभार ज्ञापित किया। इससे पूर्व अपर जिलाधिकारी सिटी अरविंद चौरसिया ने प्रथम सांस्कृतिक संध्या का उद्घाटन किया।

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