सौहार्द्र से मंदिर-मस्जिद विवाद के हल की मुहिम आगे बढ़ी

Faizabad Updated Sun, 09 Dec 2012 05:30 AM IST
अयोध्या। सौहार्द्र के जरिए मंदिर-मस्जिद विवाद के समाधान की अवकाश प्राप्त न्यायमूर्ति पलोक बसु की मुहिम और आगे बढ़ी है। हालांकि इस मुहिम को कतिपय हिंदू संगठनों के प्रतिरोध का सामना भी करना पड़ रहा है।
तुलसी स्मारक भवन में हिंदू संगठनों के प्रतिनिधियों को जवाब देते हुए बसु ने कहा कि उनका कोई फार्मूला नहीं है। यह अयोध्यावासियों को तय करना है कि मंदिर कहां बने और मस्जिद कहां। हालांकि उन्होंने बताया कि स्थानीय हिंदुओं और मुसलमानों ने समाधान का फार्मूला तैयार कर लिया है। इसके अनुसार हाईकोर्ट ने विवादित भूमि का जो हिस्सा मस्जिद के लिए सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को दिया है, वह मुसलमानों को दे दी जाए। इस भूमि पर वे मस्जिद न बनाकर मात्र पेड़-पौधे लगाएंगे और मस्जिद निर्माण के लिए उन्हें अधिग्रहीत् परिसर के दक्षिणी-पूर्वी कोने की भूमि देनी होगी, जबकि राम जन्म भूमि पर मंदिर का निर्माण किया जाएगा। श्री बसु ने बताया कि समझौते का यह फार्मूला सुप्रीम कोर्ट में रिप्रजेंटेटिव सूट के रूप में स्वीकृत हो सकता है और सीपीसी की धारा 89 के मुताबिक ऐसे फार्मूले को आधार बनाकर कोर्ट अपना निर्णय भी सुना सकता है। उन्होंने समझौते का फार्मूला तैयार करने की मुहिम के प्रति स्थानीय नागरिकों की दिलचस्पी के प्रति भी उत्साह व्यक्त किया। बताया कि पिछली दो बैठकों में दोनों समुदायों के क्रमश: 90 व 110 लोग शामिल हुए थे और वर्तमान बैठक में 60 लोग मौजूद रहे।
रिप्रजेंटेटिव सूट के लिहाज से यह संख्या भले कम हो पर इस मुहिम के वाहक हौसले से लैस नजर आए। बैठक में मौजूद निर्मोही अखाड़ा की ओर से न्यायालय में राम जन्म भूमि का पक्ष रखने वाले अधिवक्ता रणजीतलाल वर्मा ने 1984 की भोपाल गैस त्रासदी का उदाहरण दिया। इस मामले में स्थानीय लोगों की राय पर ही त्रासदी की जिम्मेदार कंपनी यूनियन कार्बाइड को न्यायालय ने बंद करने का आदेश दिया था। उन्होंने उम्मीद जताई कि इसी तरह मंदिर-मस्जिद विवाद के मामले में स्थानीय जनों की आकांक्षा व सुविधा को ध्यान में रखकर कोर्ट का रुख सामने आ सकता है। सद्भाव की मुहिम के प्रवक्ता अधिवक्ता ज्ञानप्रकाश श्रीवास्तव ने बताया कि समझौते के फार्मूले को तकरीबन अंतिम रूप दिया जा चुका है। छह जनवरी को प्रस्तावित अगली बैठक में इसके दो-एक बिंदुओं पर पुनर्विचार करते हुए इसे अंतिम रूप दे दिया जाएगा। तदोपरांत यह फार्मूला जनता के बीच होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि फार्मूला इतना स्वीकार्य होगा कि इसे हजारों की संख्या में आसानी से समर्थन हासिल हो सकेगा। बैठक की अध्यक्षता युवा प्रवचनकर्ता देवमुरारी बापू ने की। उन्होंने इस मुहिम का विरोध कर रही विहिप को आड़े हाथों लिया। कहा कि प्रस्तावित फार्मूले में कहीं भी बाबर के नाम का आग्रह नहीं है पर विहिप बाबर के नाम का स्तंभ अथवा मस्जिद प्रचारित कर हिंदुओं को उत्तेजित करने की साजिश रच रही है। इससे पूर्व मुस्लिम समाज का प्रतिनिधित्व करते हुए सादिक अली(बाबू भाई) ने कहा कि हम भी चाहते हैं कि मंदिर बने पर ताली एक हाथ से नहीं बजती, ऐसे में मस्जिद के लिए जमीन दिया जाना जायज है। वरिष्ठ अधिवक्ता आफताब रजा रिज़वी ने कहा कि सद्भाव से बढ़कर कुछ भी नहीं है। इससे अच्छा कुछ भी नहीं हो सकता कि मंदिर बने और मुस्लिम भी खुश रहें। महंत नारायणाचारी ने कहा कि यदि दोनों पक्षों की सुलह से मसले का समाधान संभव है तो हम इसके लिए आगे हैं। बैठक में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नागा रामलखनदास, बालकृष्ण गोस्वामी, अध्ािवक्ता शोभा मित्रा आदि की प्रमुख रूप से मौजूदगी रही।

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