कामयाब हुई जुगत, लाखों का टैक्स खजाने में

Faizabad Updated Thu, 06 Dec 2012 05:30 AM IST
फैजाबाद। जोन के वाणिज्य कर अफसरों की जुगत आखिरकार कामयाब हो गई है। विभाग के खजाने से फिसला लाखों का टैक्स अब जमा होना शुरू हो गया है। दरअसल, नोटिस मिलने के बाद राइस मिलरों ने महकमे में टैक्स जमा कराना शुरू कर दिया है। अब तक विभाग को पांच जिलों यानी मंडलभर से करीब 61.60 लाख रुपये बतौर टैक्स मिल चुके हैं। जबकि जोन में शामिल देवीपाटन मंडल के जिलों में टैक्स जमा कराने की कवायद शुरू हो गई है।
बीते दिनों जोन प्रभारी एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-एक उमेश प्रताप सिंह को एफसीआई गोदाम में जमा होने वाले सरकारी चावल के भंडारित न होने और मिलरों द्वारा चोरी-छिपे इसे बेचे जाने की खबर मिली थी। इस पर जोन प्रभारी ने सभी जिलों में संबंधित अधिकारियों को निर्देश देकर यूपी स्टेट एग्रो, पीसीएफ, खाद्य विभाग की मार्केटिंग शाखा, यूपीएसएस व अन्य धान खरीदने वालीं एजेंसियों से राइस मिलर्स के पास बकाया पड़े सीएमआर (कस्टम मिल्ड राइस) व लेवी चावल की सूची मंगवाई। सूची मिलने के बाद जोन के सभी नौ जिलों में एसआईबी (विशेष अनुसंधान शाखा) अफसरों की टीम गठित कराई और टीम की कमान ज्वाइंट कमिश्नर एसआईबी को सौंपकर राइस मिलरों के यहां औचक छापेमारी कराई। इसमें एसआईबी अफसरों ने राइस मिलरों के स्टॉक का सत्यापन किया। इस दौरान सनसनीखेज तथ्य उभर कर सामने आए। राइस मिलरों के यहां जिस सरकारी चावल की मौजूदगी खाद्य विभाग ने सत्यापित की थी, वह चोरी-छिपे बेच दिया गया है और इसकी खबर न तो वाणिज्य कर को दी गई, न ही मंडी परिषद को। ऐसा लगभग सभी राइस मिलों के यहां पाया गया। अफसरों ने करीब 24 बड़ी राइस मिलों के यहां निरीक्षण किया था। स्टॉक सत्यापन के दौरान चोरी-छिपे बिक्री और विभाग को वाणिज्य कर न अदा किए जाने पर राइस मिलरों को नोटिस थमाकर टैक्स जमा कराने को कहा गया था। इसके बाद अब सभी जिलों में टैक्स जमा कराने की कवायद शुरू हो गई है। उधर कई मिलों की जांच भी चल रही है।

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