मठ-मंदिरों में लगा श्रद्धालुओं का तांता

Faizabad Updated Fri, 23 Nov 2012 12:00 PM IST
अयोध्या। 24 घंटे तक 14 कोसी परिक्रमा पर भ्रमण करने के बाद जन सैलाब गुरुवार को अपराह्न रामनगरी में जगह-जगह ठौर लेता दिखा। लंबी पद यात्रा के बाद हुई थकान श्रद्धालुओं में साफ-साफ दिखी। अधिकांश श्रद्धालु गुनगुनी धूप में बैठकर अपनी थकान उतारते दिखे तो कुछ जत्थे ऐसे भी रहे, जिन्होंने परिक्रमा का संकल्प पूरा कर घर वापसी की राह ली। इस क्रम में कुछ पल के लिए यदि रामनगरी दबाव मुक्त नजर आई तो श्रद्धालुओं के नए जत्थों की दस्तक भी दर्ज हुई। उनका मकसद पंचकोसी परिक्रमा कर पुण्य अर्जित करना है। इस बीच रामनगरी की ओर आने वाले विभिन्न मार्गों से लेकर सरयू तट, राम की पैड़ी सहित नगरी के तकरीबन सभी 10 हजार मंदिरों के प्रांगण श्रद्धालुओं की रौनक से गुलजार रहे। भोर में परिक्रमा पूर्ण करने वालों सहित आम स्नानार्थियों ने पावन सलिला सरयू में डुबकी लगाकर पुण्य लाभ कमाया तो प्रमुख मंदिरों में भी लोग आस्था में डूबे रहे। सायं तक जहां चौदह कोसी परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं का रेला अपनी थकान उतारकर तरो-ताजा हो चुका था, वहीं शुक्रवार से पंचकोसी परिक्रमा व 27 तारीख को पूर्णमासी स्नान पर्व के मद्देनजर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आमद मेले में चार चांद लगाने वाली रही। हनुमानगढ़ी, कनक भवन, रामजन्मभूमि आदि मंदिरों में श्रद्धावनत होने वालों की भारी भीड़ जुटी।
इस दौरान आस्था के साथ बाजार की रौनक भी निरूपित हुई। प्रसाद, पूजन सामग्री, धार्मिक पुस्तकें, तात्कालिक जरूरतों के साथ यादगार जिंदा रखने के लिए बर्तन, कंबल जैसी सामग्रियों की खरीदारी चलती रही। हनुमानगढ़ी पर प्रसाद विक्रेता श्यामबाबू के अनुसार गत दिनों फैजाबाद में हुए सांप्रदायिक उपद्रव के बाद आशंका थी कि परिक्रमा मेला मंदा होगा, पर यह आशंका निर्मूल साबित हो रही है। आस्था के महा पर्व में कारोबार भी सदा की तरह कम चटख नहीं है। बजरंगबली की प्रधानतम पीठ हनुमानगढ़ी के अर्चक रमेशदास कहते हैं कि अयोध्या के रखवाले हनुमान जी हैं। यहां की परंपरा के पालन में हर बाधा बौनी साबित होती है। मेले को लेकर निश्चिंतता के साथ उत्साह का आलम उन पड़ावों से बयां होता है, जहां शुक्रवार से शनिवार अपराह्न तक पंचकोसी परिक्रमा करने वालों का कारवां गुजरेगा। इन पड़ावों पर भांति-भांति की दुकानों की कनात तनने लगी है। चाट की दुकान करने वाले राजेंद्र कसौंधन बताते हैं कि कार्तिक सहित चैत, सावन, रामविवाह और प्रयाग कुंभ के दौरान लगने वाले मेले से इतना जुगाड़ हो जाता है कि साल भर की रोटी-दाल और अन्य जरूरतें पूरी हो जाती हैं। सरयू बाग संस्कृत महाविद्यालय के अवकाश प्राप्त प्राचार्य डॉ. रामकृष्ण शास्त्री के अनुसार यहां लगने वाले मेले जीवन को संपूर्णता में परिभाषित करते हैं, यह परलोक के साथ इहलोक मंगल के भी निमित्त हैं।

इनसेट
पंचकोसी परिक्रमा आज अपराह्न 11:56 बजे से
अयोध्या। देवोत्थानी एकादशी के मुहूर्त पर होने वाली रामनगरी की पंचकोसी परिक्रमा शुक्रवार को अपराह्न 11:56 बजे कार्तिक शुक्ल एकादशी की तिथि लगने के साथ शुरू होगी। यह मुहूर्त शनिवार को अपराह्न 12:27 बजे तक रहेगा। संतों का कहना है कि आराध्य के धाम की परिक्रमा समर्पण व्यक्त करने के साथ गहन अर्थों से युक्त है। इसके अनुसार परिक्रमा के उपरांत जीव जन्म-मरण के चक्कर से मुक्त होकर मोक्ष रूपी परम पद को प्राप्त करता है।

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