सैकड़ों मौत के जिम्मेदार का न रहना ही ठीक

Faizabad Updated Thu, 22 Nov 2012 12:00 PM IST
अयोध्या। मुंबई हमले के आरोपी अजमल कसाब को फांसी दिए जाने पर समाज के वरिष्ठ जनोें ने संतोष जताया है। चिंतक और महर्षि अरविंद की परंपरा के साधक जय सिंह चौहान के अनुसार मौत किसी की भी हो दुख देती है, पर ऐसी जिंदगी का न रहना ही ठीक है, जो सैकड़ों मौत का जिम्मेदार हो। कसाब की आत्मा को शांति मिले और उसका रूहानी सफर खून खराबे व आतंक से इतर खुदा के हवाले हो। सेवानिवृत्त मृदा परीक्षण अधिकारी व पर्यावरण प्रेमी ज्ञानचंद्र द्विवेदी कहते हैं, मानवता अपनी जगह है पर राष्ट्र की अस्मिता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। कसाब का कृत्य राष्ट्र की अस्मिता को झकझोर देने वाला रहा, आज उसका हश्र उन लोगों की आंख खोल देने वाला होगा, जो भारत मां की अस्मत से खिलवाड़ करने का स्वप्न देखते हैं। सेवा निवृत्त खाद्य आपूर्ति निरीक्षक राजेंद्रनारायण तिवारी ने कहा कि कसाब की फांसी का व्यापक अर्थ है। आइंदा के लिए दुनिया में यह संदेश गया है कि भारत का चित्त भले मुलायम हो पर सुरक्षा और संप्रभुता के मामले में वह दृढ़ है। सेवा निवृत्त बैंक अधिकारी सुरेंद्रनारायण अग्रवाल के अनुसार क्षमा और उदारता सद्गुण है पर इसकी सीमा है, आतंक और अनाचार को पस्त करना भी क्षमा और उदारता से कम बड़ा मूल्य नहीं है। संगीतज्ञ देवप्रसाद पांडेय के अनुसार कसाब अनेक जिंदगियों का ही नहीं जीवन मूल्यों का भी संहारक था, उसको खत्म करना जीवन मूल्यों की प्रतिष्ठा ही है। कम्प्यूटर इंजीनियर राजेश वर्मा के अनुसार कसाब को फांसी भारत के खिलाफ साजिश में लगे दुश्मनों के लिए नजीर बनेगी।

संतों ने किया स्वागत
रामकोट स्थित पीठ चौबुर्जी मंदिर में बैठक कर कसाब को फांसी दिए जाने का स्वागत किया गया। बैठक की अध्यक्षता करते हुए विहिप के महानगर अध्यक्ष महंत बृजमोहनदास ने कहा कि कसाब का कृत्य जघन्य था कि यदि फांसी से बड़ी कोई सजा होती, तो उसे वह दी जानी थी। बैठक में प्रख्यात रामकथा मर्मज्ञ चिन्मयानंद बापू, महंत हरिभजनदास, राजगोपाल मंदिर के अधिकारी सर्वेश्वरदास आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे और कसाब की फांसी पर प्रसन्नता का इजहार किया।

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