कानून-व्यवस्था बनाए रखना बनी चुनौती

Faizabad Updated Sat, 27 Oct 2012 12:00 PM IST
फैजाबाद। अयोध्या के बड़े आंदोलनों में कानून व शांति व्यवस्था बनाए रखने का अनुभव भी इस बार जिला प्रशासन के काम नहीं आया। क्षण भर में माहौल बदला, शहर से देहात तक भीड़ सड़कों पर उतरी, बवाल, मारपीट और आगजनी के बीच अराजकता सड़क पर घंटों नाचती रही। अब कानून व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन और पुलिस के लिए चुनौती बन गई है। शहर का आवाम कर्फ्यू के साए में हैं। शांति व सुरक्षा की मशीनरी को अग्नि परीक्षा के दौर से गुजरना पड़ रहा है। शहर से देहात तक न तो पहली बार दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन हो रहा था और न ही इसके लिए श्रद्धालुओं की भीड़ निकली थी, लेकिन बुधवार से गुरुवार तक जो कुछ भी हुआ वैसा इस जिले में पहली बार जरूर माना जा रहा है। बुधवार को रात की कालिमा बढ़ने के साथ भय का वातावरण सृजित होना शुरू हुआ तो गुरुवार की सुबह भी अशांति की चपेट में आ गई। अफवाहों ने पलकें मूंदने के लिए वक्त नहीं छोड़ा, शहरियों की रात आंखों में बीत गई। परिणाम रहा कि दो लोगों को जान गंवानी पड़ी, वाहन क्षतिग्रस्त किए गए। अब क्षति का आकलन जुबान पर है। कुछ स्थानों पर वर्दीधारियों को कस्बे में जाने के लिए मशक्कत करनी पड़ी। खास बात यह है कि फैजाबाद दो दशक तक अयोध्या के बड़े आंदोलनों का स्थल रहा है। सड़क पर लाखों की भीड़ के बावजूद अराजकता का माहौल नहीं बनने पाया। इस दौरान कानून और शांति व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी इसी जिला प्रशासन की होती थी। अफसरों के साथ इसी शहर के लोगों ने शांति कायम रखी। कुछ एक अपवादों को छोड़ दिया जाए तो फै जाबाद शहर में ऐसा तब भी नहीं हुआ जब अयोध्या का आंदोलन चरम पर था। हालात तो तब भी नहीं बिगडे़, जब एक नहीं दो-दो बार आतंकी घटनाएं घटित हुईं। इस बार भी अफसरों के साथ मशीनरी वही थी, बावजूद इसके बवाल के पीछे एक अहम् कारण यहां की संवेदनशीलता के आकलन में चूक है। साल दर साल यहां के आयोजनों को लेकर पहले से मुतमईन हो जाना नुकसान दायक साबित हुआ तो शहर और आसपास इस प्रकृति की घटनाओं पर शिथिल कार्रवाई से ऊंचे हुए मनोबल ने भी घटना का मार्ग प्रशस्त किया। जिसका आभास खुफियातंत्र को भी नहीं हो पा रहा था। अफसर तो बातचीत में अनौपचारिक रूप से भी मजिस्ट्रेटी जांच से ही कारण के खुलासे की बात करते हैं, लेकिन राम अकबाल कहते हैं कि प्रथम दृष्टया तो शांति व कानून व्यवस्था के बारे में अति विश्वास इसका कारण कहा जा सकता है। सामाजिक कार्यकर्ता आलोक द्विवेदी कहते हैं कि शहर के लोगों को भी ऐसी उम्मीद नहीं थी। इसके पीछे आंकलन में चूक को ही कारण माना जाएगा। राजेश सिंह कहते हैं कि कारण तो कई हैं, लेकिन अयोध्या फैजाबाद के अतीत पर शासन-प्रशासन की ओर से ध्यान न दिया जाना अहम कारण रहा।

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