अयोध्या पालिका में सवा 3 करोड़ का घपला

Faizabad Updated Sun, 21 Oct 2012 12:00 PM IST
फैजाबाद। नगर पालिका अयोध्या में सवा तीन करोड़ रुपये की अनियमितता पकड़ी गई। इसके अंतर्गत विद्युत तथा जलकल उपकरणों की खरीद में धांधली, बैंक खातों की जमा धनराशि में गड़बड़ी अहम है। दूसरी ओर कर्मचारियों की पीएफ धनराशि गायब है। पीएफ खाते से दोहरे भुगतान की आशंका भी जताई गई है। साथ ही शासन/राज्य सरकार से अवमुक्त तकरीबन पौने दो करोड़ की राशि के उपभोग का पता ही नहीं है। इसके दुरुपयोग की भी आशंका है। यह घपला वर्ष 2011-12 की लेखा परीक्षा में उजागर हुआ। ऑडिट विभाग के सहायक निदेशक ने पालिका के अधिशासी अधिकारी को पत्र भेज इस प्रकरण से अवगत करा दिया है, साथ ही जवाब भी मांगा है।
पालिका को शासन/ राज्य सरकार से राजकीय अनुदान के रूप में एक करोड़ 73 लाख, 23 हजार 669 रुपये मिले। मजेदार बात यह है कि पालिका प्रशासन उपरोक्त धनराशि के खर्च का हिसाब-किताब तक ऑडिट कर्ताओं को नहीं दे सका। इस धनराशि के खर्च का एक भी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया। धनराशि के खर्च की स्थिति अज्ञात होने के कारण इसके दुरुपयोग की आशंका व्यक्त की गई है। विद्युत उपकरणों की खरीद में पालिका प्रशासन ने न्यूनतम टेंडर को ही खारिज कर दिया। खरीद चहेतों को सौंप दी। इस खरीद प्रक्रिया में नियम-कानून की धज्जियां उड़ाई गईं। इससे पालिका को तीन लाख 47 हजार 681 रुपये की चपत लगाई गई। सूत्रों के अनुसार पालिका अधिकारियों ने उपकरण की आपूर्ति पर संशय जाहिर करते हुए न्यूनतम रेट वाली निविदा के दावे को खत्म किया था। तेरहवें वित्त आयोग से प्राप्त अनुदान की धनराशि से जलकल उपकरण खरीदे गए। इसमें धांधली बरती गई। इसके अंतर्गत जिलाधिकारी द्वारा स्वीकृत सीमा से अधिक मात्रा में सामग्री की खरीद मनमाने तरीके से की गई। इसमें किए गए एक लाख 31 हजार 725 रुपये के भुगतान को अमान्य ठहराया गया। विद्युत उपकरणों की तर्ज पर जलकल उपकरणों की खरीद में भी न्यूनतम टेंडर को निरस्त करते हुए 25 हजार रुपये का चूना लगाया गया। पालिका की रोकड़ बही के अंतिम अवशेष एवं बैंक पासबुक के अंतिम अवशेष में 83 लाख 25 हजार का अंतर है। इस धनराशि का अता-पता नहीं है। इसका जवाब तक देना जांच के दौरान पालिका कर्मियों ने मुनासिब नहीं समझा। टीम ने उक्त धनराशि को अनियमितता की श्रेणी में बताते हुए गंभीर घपले की आशंका व्यक्त की। दूसरी ओर कर्मचारियों के वेतन से पीएफ के रूप में कटौती तो की गई लेकिन 23 लाख 17 हजार 309 रुपये खाते में जमा ही नहीं किए गए। पीएफ खाते से दिए गए ऋण भी लेजर पर अंकित नहीं किए गए। नतीजतन 13 लाख दो हजार रुपये के दोहरे भुगतान की आशंका है।
जांच कर्ताओं के मुताबिक जलमूूल्य का आरोपण राजाज्ञानुसार न किए जाने से भी पालिका को 29 लाख चार हजार रुपये का चूना लगा है। पालिका सूत्रों के अनुसार यह पत्र बीती 29 सितंबर को पालिका को प्राप्त हुआ। इसे लेकर हड़कंप है। स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग के जांच कर्ताओं ने जवाब की मांग की है। लेकिन पालिका प्रशासन ने अभी तक चुप्पी साध रखी है।

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