देर से नीति जारी होने से पहले दिन अधर में रही ख्‍ारीद

Faizabad Updated Tue, 02 Oct 2012 12:00 PM IST
फैजाबाद। शायद यह पहली बार हुआ है कि एक अक्तूबर से शुरू होने वाली धान खरीद का आरंभ खरीफ विपणन सत्र 2012-13 में नहीं हो पाया है। भले एक तारीख से औपचारिक शुरुआत ही होती रही, लेकिन धान खरीदने वालीं एजेंसियों को शासन से खरीद स्कीम खरीद शुरू होने से पहले जारी कर दी जाती रही है। पर, इस बार शासन की ओर से एक अक्‍तूबर को ही खरीद नीति जारी होने के कारण खरीद केंद्र तक एजेंसी संचालकों में संशय के हालात रहे। ऐसे में सरकारी खरीद के नोडल विभाग खाद्य अफसरों में असमंजस व्याप्त है।
नए सत्र में कैसे किसानों से धान खरीदा जाएगा? इसको लेकर संशय की स्थिति है। हालांकि अफसरों का कहना है कि अभी किसानों की फसल तैयार नहीं हुई है। इस लिए इससे ज्‍यादा फर्क नहीं पड़ेगा। सरकारी खरीद के अनुसार प्रदेश में एक अक्तूबर से किसानों से धान खरीद शुरू हो जाना था। नए विपणन सत्र 2012-13 में इसके लिए तैयारी भी पिछले माहभर से शुरू थी। जिलों में क्रय एजेंसियों की ओर से सेंटरों की संख्या निर्धारित कर क्रय केंद्र खोल दिए गए हैं। सेंटरों पर किसानों से धान खरीदने वाले प्रभारियों की नियुक्ति हो गई है। किसानों से इलेक्ट्रॉनिक तरीके से तौल कराने के लिए इलेक्ट्रॉनिक कांटा, धान में नमी मापने के लिए नमी मापक यंत्र इत्यादि भी पहुंच गए हैं।
यह बात अलग है कि निजी क्रय एजेंसियों के कुछ क्रय केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक कांटा व अन्य उपकरण अभी नहीं पहुंचे हैं। हालांकि सभी पर सेंटर प्रभारियों की नियुक्ति हो गई है।
खाद्य विभाग की ओर से सरकारी खरीद के बाबत बैनर-पोस्टर भी तैयार करवा लिए गए हैं। फैजाबाद संभाग में किसानों से धान खरीदने के लिए कुल 169 क्रय केंद्र खोले गए हैं। इसमें खाद्य विभाग के 54, पीसीएफ के 70, यूपीएसएस के 18, यूपी एग्रो के नौ, कर्मचारी कल्याण निगम के 13, नैफेड के दो तथा एनसीसीएफ के तीन केंद्र शामिल हैं। इस तरह कमोबेश, खरीद से संबंधित लगभग सभी तैयारी पूरी हो गई है। मगर इसके बाद भी धान खरीद नहीं शुरू हो पाई। इसकी वजह स्कीम जारी होने की जानकारी एजेंसियों तक समय से न पहुंच पाना रहा। 
शासन की ओर से जारी होने वाली स्कीम में खरीद से संबंधित पूरी जानकारी होती है। मसलन, कौन धान खरीदेगा, किसानों से किस तरह धान खरीदा जाएगा, भंडारण किस तरह होगा आदि। इसके अलावा लक्ष्य तय हो जाने के बाद जिलों में एजेंसियों को सेंटरवार लक्ष्य सौंपे जाते हैं। जिसके मुताबिक केंद्रों पर खरीददारी होती है।
दूसरी ओर इसी वजह से राइस मिलों का संबद्धीकरण भी नहीं हो पाया है। ऐसे में सेंटरों पर खरीदा जाने वाला धान किस राइस मिल को कुटाई के लिए दिया जाना है, इसका निर्धारण भी नहीं हो पाया है। वैसे, अधिकारियों का कहना है कि एक अक्तूबर से औपचारिक शुरुआत ही होती है। किसानों की फसल तैयार न होने से सेंटरों पर धान की आवक नहीं होती है।

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